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Description

1. पौलुस और मूसा की शरीअत के अधीन जीवनपौलुस पहले मूसा की शरीअत के अधीन जीवन जीता था।वह फरीसी था और व्यवस्था (शरीअत) का कड़ाई से पालन करता था।वह अपने कामों और नियमों के द्वारा धर्मी ठहरना चाहता थाउसे लगता था कि व्यवस्था का पालन करने से ही मनुष्य परमेश्वर के सामने सही ठहरता हैइसी कारण वह कलीसिया को सताता भी था2. मसीह की फ़ज़ल और सच्चाई के अधीन जीवनजब पौलुस का जीवन यीशु मसीह से बदला, तब वह फ़ज़ल (अनुग्रह) और सच्चाई के अधीन आ गया।अब वह कामों से नहीं, बल्कि विश्वास से धर्मी ठहरने की शिक्षा देता हैउसने सिखाया कि उद्धार परमेश्वर की कृपा से मिलता है, न कि मनुष्य के कामों सेउसका जीवन बदल गया और वह सुसमाचार का प्रचारक बन गयाउसने दुख, सताव और कष्ट सहकर भी मसीह का नाम फैलाया3. यहूदा इस्करियोती का जीवन (लालच, झूठ और चोरी)यहूदा इस्करियोती यीशु के 12 चेलों में से एक था, लेकिन उसका जीवन गलत रास्ते पर चला गया।वह लालची थावह चेलों के धन की थैली रखता था और उसमें से चोरी करता थाउसने 30 चाँदी के सिक्कों के लिए यीशु को पकड़वाने के लिए धोखा दियाउसका हृदय सच्चा नहीं था, बल्कि स्वार्थ और लालच से भरा हुआ थाअंत में उसका जीवन विनाश में समाप्त हुआनिष्कर्ष (सीख)पौलुस का जीवन दिखाता है कि मनुष्य बदल सकता है और परमेश्वर की कृपा से नया जीवन पा सकता हैयहूदा का जीवन चेतावनी देता है कि लालच, झूठ और पाप मनुष्य को विनाश की ओर ले जाते हैं