शिव पुराण का उन्नीसवाँ अध्याय बताता है कि कैसे भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उत्पन्न क्रोधाग्नि से कामदेव भस्म हो गए और ब्रह्मा जी ने उस अग्नि को समुद्र में सुरक्षित रखकर सृष्टि की रक्षा की। यह अध्याय शिव के रौद्र और करुणामय स्वरूप का अद्भुत वर्णन करता है।
शिव पुराण अध्याय 19
शिव क्रोधाग्नि की शांति
कामदेव भस्म कथा
भगवान शिव तीसरा नेत्र
शिव पुराण हिंदी
शिव क्रोध कथा
समुद्र में क्रोधाग्नि
ब्रह्मा और शिव कथा