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Description

इस अध्याय में देवी सती भगवान शिव से ज्ञान और मोक्ष की महिमा के बारे में जानने की इच्छा प्रकट करती हैं।

भगवान शिव, भक्तिपूर्वक उनकी जिज्ञासा शांत करते हुए भक्ति, ज्ञान, मोक्ष और उनके आपसी संबंधों का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हैं।

वे श्रद्धा, प्रेम, सेवा, आत्मसमर्पण जैसे नौ अंगों की भक्ति को श्रेष्ठ बताते हैं और यह स्पष्ट करते हैं कि बिना भक्ति के ज्ञान अधूरा है और बिना ज्ञान के भक्ति भी फलदायक नहीं होती।

अंत में देवी सती सभी शास्त्रों का सार पूछती हैं और भगवान शिव उन्हें विभिन्न शास्त्रों—तंत्र, यंत्र, इतिहास, ज्योतिष, वैदिक धर्म—की महत्ता समझाते हैं।

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