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“नवां अध्याय — पार्वती का स्वप्न” शिव पुराण का अत्यंत पवित्र अध्याय है, जिसमें देवी पार्वती के दिव्य जन्म, उनके भविष्य के संकेत, भगवान शिव से विवाह के पूर्व के शुभ स्वप्न और माता मैना-हिमालय की भावनाओं का दिव्य वर्णन मिलता है। इस अध्याय में बताया गया है कि देवी पार्वती को ब्रह्ममुहूर्त में एक अद्भुत स्वप्न प्राप्त होता है जिसमें एक तपस्वी ब्राह्मण (भगवान शिव का ही स्वरूप) उन्हें उनके भविष्य—‘शिवप्राणवल्लभा’ बनने का वरदान देते हैं। माता मैना और राजा हिमालय अपने-अपने स्वप्नों की व्याख्या एक-दूसरे से साझा करते हैं और पार्वती को शिव की तपस्या करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह अध्याय शिव-पार्वती प्रेम, भक्ति, तपस्या और दिव्य भविष्यवाणी को उजागर करता है। शिव पुराण पढ़ने वालों, भक्तों, अध्यात्म प्रेमियों और पुराणकथाओं के शोधकर्ताओं के लिए यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण और ज्ञानवर्धक है।

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