भारत एक धर्मनिपेक्ष देश है. एक भारतीय भले ही सभी धर्म को नहीं मानता हो लेकिन हर धर्म का आदर और सम्मान करना उसका कर्तव्य होता है. लेकिन यह अफसोस की बात है कि एक तरफ जहां राजनीतिक नेता अपने भाषणों में धर्मनिरपेक्षता को लेकर बड़ी-बड़ी बाते कहते हैं,.... वहीं दूसरी तरफ वे धर्म के नाम पर समाज को बांटने का काम करते हैं. एक ऐसे ही नेता का फर्जी सेकुलरिज्म सामने आया है.