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Description

बिखरते हुए हौसले की सांसों में फिर से हवा भरने वाली यह कविता प्रियदर्शन ने रची है. पेशे से पत्रकार हैं प्रियदर्शन, पर स्वभावतः साहित्यकार. इसलिए उनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास मानवीय संवेदनाओं से लबरेज हैं.