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Description

साधक की पहचान उसके तिलक से होती है ।

वह वही तिलक धारण करता है जो उसके गुरु-द्वारा प्रदत्त है, जो उसकी समस्त गुरु परम्परा धारण करती हैं ।

तो क्या आप गुरु-परम्परा द्वारा प्रदत्त तिलक ग्रहण करते हैं ?

क्या गुरु द्वारा प्रदत्त तिलक बदल देना चाहिए ?