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“आप जप करते रहें, आपको आपका स्वरुप प्रकाशित होगा।”- Iskcon में इस प्रकार बताया जाता है ।

परन्तु क्या यह वास्तविकता है ?

‘बिना किसी सम्बन्ध’ के जप करने से… बाद में ‘सम्बन्ध’ प्रकाशित हो सकता है ? इस Video में करुणावश, श्री श्री 108 शचीनन्दन जी इसका उत्तर दें रहे हैं ।