Listen

Description

Here’s an episode that will keep you waiting for the next one. This poem is written by

Rizwan khan sultan alig

जुदाई

जिंदगी में ये क्या हादसा हो गया

वो मुझे छोड़ कर अब जुडा हो गया

सोचता हूं मैं ये बेबसी में कभी

जाने किस बात पर वो खफा हो गया

ले गया चीन कर दिल के अरमान को

इश्क की राह में क्या से क्या हो गया

जिस से कहता था मैं अपने हर राज को

हां वो ही हमनवा बेवफा हो गया

उस के bin अब तो जीने की आदत हुई

दर्द ही मेरे दिल की दवा हो