शिव पुराण - विद्येश्वर संहिता
अध्याय १७ - षडलिंगस्वरूप प्रणवका महात्मय, उसके सुक्ष्म रूप (ॐ कार) और स्थूल रूप (पंचाक्षर )- का विवेचन, उसके जप की विधि एवं महिमा, कार्यब्रह्म के लोकोंसे लेकर कारन रुद्रके लोकोंतक का विवेचन करके कालातीत, पंचावरण विशिष्ट शिवलोक के अनिर्वचनीय वैभव का निरूपण तथा शिव भक्तों के सत्कारकी महत्ता।
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