क्या हुआ जो इस बरस भी आरजू ए मोहब्बत पूरी ना हो सकी ....
क्या हुआ जो दरमियाँ उसके और तुम्हारे खत्म दूरी ना हो सकी ...
इश्क़ तो है ना तुम्हें उससे और उम्मीदे वफा भी...
इसलिए सब्र करो वो दौर भी आयेगा...
जब होगा मेहरबां वक़्त भी और महबूब भी दौड़ा चला आयेगा...
इसलिए ना हो उदास, ना डूबो गम के अँधेरों में...
ये मिजाज ए हुस्न है पल पल बदलता रहेगा,
ये सिलसिला है प्यार का चलता रहेगा....