छोटे से बड़े होने, यानी अपने व्यक्तित्व में विकास की यात्रा कई रास्तों से होकर गुजरती है। आदर्श रूप से इस यात्रा के दौरान हमें कुछ चीजें छोड़ देनी होती हैं। पर क्यों एक बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी हम अहंकार को नहीं छोड़ पाते? हेल्थ शॉट्स हिंदी पॉडकास्ट मन की मेधा के इस एपिसोड में लाइफ कोच डॉ. मेधावी जैन कर रहीं हैं इस सवाल की पड़ताल।
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