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रिश्ते हों, हमारे आसपास की चीजें या दुनिया को देखने का दृष्टिकोण, हमें बचपन से ही कुछ खास तरह के लेबल के साथ इन्हें देखना सिखाया जाता है। पर असल में संसार इन लेबल से बहुत पार है। और इन तक पहुंचने का रास्ता अनुभूतियों से होकर जाता है। क्या आपने कभी दुनिया को बिना लेबल के उसकी मौलिकता में देखने की कोशिश की है? हेल्थशॉट्स पॉडकास्ट मन की मेधा के सीजन 2 के इस तीसरे एपिसोड में जैन स्कॉलर और लाइफ कोच डॉ. मेधावी जैन कर रहीं हैं इसी मुद्दे पर बात।
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