2019 में इकॉनमी स्लोडाउन ने ओवरॉल ग्रोथ पर स्पीड ब्रेकर लगा दिया। इस साल टैक्स वसूली नहीं बढ़ी जिस की वजह से सरकारी योजनाओं में पैसा नहीं लग पाया। एग्रीकल्चर की बात करें तो उस में प्रोडक्शन ज़्यादा होने के बावजूद किसानों को दाम सही नहीं मिल पा रहा. बिजली, सीमेंट की डिमांड में भी ग्रोथ नहीं। यहाँ तक कि कंपनी टैक्स में राहत मिलने के बावजूद इन्वेस्टमेंट बढ़ते नहीं दिख रहे. ये तमाम बातें एक इकनॉमिक क्राइसिस की तरफ इशारा कर रही हैं. बुरी बात ये है कि साल 2020 में भी मंदी से राहत मिलती नहीं दिख रही. एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इकनोमिक स्लोडाउन का इलाज तब शुरू हो गया तब अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े भरोसेमंद होंगे.
आज बिग स्टोरी में सुनिए द क्विंट के एडिटोरियल डायरेक्टर संजय पुगलिया को जो बता रहे हैं कि आने वाले साल यानी कि 2020 में मंदी के लिए किस तरह की एहतियात बरतनी पड़ सकती हैं.
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