हमें अपना ध्यान स्वयं पर केंद्रित करना सीखना चाहिए. हम अपना व्यक्तित्व बदल नहीं सकते हैं. हमारे लिए किसी और की तरह बनना असंभव है. हमारा विकास और हमारी समृद्धि तभी होगी जब हम अपने व्यक्तित्व को स्वीकार करेंगें. यदि हम स्वयं से प्रसन्न नहीं होंगें तो हम कुम्हला सकते हैं. हम सभी में सामर्थ्य, योग्यता, कौशल व उद्देश्य है जिस कारण हमारा जन्म हुआ है. यदि हम इस तथ्य को स्वीकार कर लें और अपनी योग्यताओं का सर्वोत्तम प्रयोग करना सीख लें तो हम अवश्य ही प्रसन्नचित रहेंगें और दूसरों में भी खुशियाँ फैलाएंगें.
http://saibalsanskaar.wordpress.com