‘मैं गीता पर हाथ रखकर कसम खाता हूं...’ ये लाइन आपने फिल्मों में ज़रूर सुनी होगी. लेकिन क्या असल में अदालत में लोग गीता या फिर कुरआन पर हाथ रखकर कसम खाते हैं? क्या हमारे संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है और ये परंपरा कब शुरू हुई, सुनिए 'ज्ञान ध्यान' में जमशेद क़मर सिद्दीकी से.