हमारे बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं कि प्यार करने वालों की अक्ल पर पत्थर पड़ जाते हैं। दिमाग़ फिर जाता है। आदमी आदमी नहीं रहता। क्यों मुहब्बत में पड़े शख्स को दुनिया हसीन लगती है। आखिर एक चेहरे की मुस्कुराहट में उसे दुनिया भर की खुशियाँ कैसे मिल जाती हैं? क्या इसके पीछे मनोवैज्ञानिक वजहें हैं? सुनिए ज्ञान ध्यान में ज़िक्र मुहब्बत के मनोविज्ञान का, जमशेद क़मर सिद्दीक़ी से