भारत को चुनाव प्रधान देश कहा जाए तो गलत नहीं होगा. यहां हर मौसम में कहीं न कहीं, किसी न किसी स्तर के चुनाव होते रहते हैं. कभी पंचायती चुनाव, कभी विधानसभा तो कभी राज्यसभा. हर बार चुनावों में कुछ नई पार्टियां भी हिस्सा लेती हैं, कुछ कामयाब होती हैं कुछ वक्त की धूल में खो जाती हैं. जो जीतती हैं वो क्षेत्रीय पार्टी के तौर पर खुद को स्थापित करती हैं और बाद में अपने दायरे को बढ़ाते हुए राष्ट्रीय पार्टी बनती हैं, जैसा कि आम आदमी पार्टी के केस में हुआ. तो सवाल ये है कि आखिर क्षेत्रीय पार्टी और राष्ट्रीय पार्टी में फर्क क्या होता है? राष्ट्रीय पार्टी बनने की क्या शर्तें हैं, और क्या फायदें हैं? सुनिए 'ज्ञान ध्यान' में.
रिसर्च - विनायक सिंह
साउंड मिक्सिंग - अमृत रेज़ी