पटरियों को बदलना, एक पटरी पर एक ही गाड़ी चल रही हो ये सुनिश्चित करना, सिग्नल देना, ये सारे काम इंटरलकिंग के अंतरगत आते हैं. ये इंटरलॉकिंग है बेहद सावधानी से किया जाने वाला टास्क है, क्योंकि इसमें ज़रा सी चूक एक बड़े हादसे को बुलावा भेज सकती है, जैसा कि हमने बालासोर में देखा. आखिर ये रेलवे के इंटरलॉकिंग का सिस्टम होता क्या है, और ये किस तरह हादसों को रोकता है... कितना सुरक्षित है ये और कहां चूक हुई इसमें जिसकी वजह से इतना बड़ा हादसा हुआ, सुनिए 'ज्ञान-ध्यान' में
साउंड मिक्स- सौरभ कुकरेती