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एक खबर आई, कि एक महिला और उसके दूर के चचेरे भाई के बीच की शादी को फैमिली कोर्ट ने invalid घोषित कर दिया, महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया तो दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के ‘सपिंड’ विवाह से जुड़े प्रावधान की constitutional वैधता को बरकरार रखा और ये खबर बन गई. यानी बात सिर्फ मियां-बीबी के राज़ी होने तक नहीं है, काज़ी का राज़ी होना भी ज़रूरी है. हाँ हाँ, कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति से ऐसे ही शादी नहीं कर सकता है! तब कौन तय करता है शादी किससे करें? और ये सपिंड क्या बला है? सुनिए आज के 'ज्ञान ध्यान' में


रिसर्च और स्क्रिप्ट- निशांत तिवारी
साउंड मिक्स- नितिन रावत