जब उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य की मूल निवासी महिलाओं को तीस फीसद आरक्षण दिए जाने के एक शासनादेश पर रोक लगा दी थी तब इस विशेष अधिकार को लेकर बहस खड़ी हुई थी। उच्च न्यायालय के उस फैसले में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों की आपत्ति को एक तरह से स्वीकार्यता मिली थी कि कोई भी राज्य सरकार जन्म और स्थायी निवास के आधार पर आरक्षण नहीं दे सकती।