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आमतौर पर उनके भाषणों में समग्रता से तमाम मुद्दों पर बात होती है, उनका विस्तार होता है और उससे आगे बढ़ने की दृष्टि होती है, लेकिन इस बार स्वतंत्रता दिवस पर फिर उन्होंने फिर यही दर्शाया है कि देश में समस्याओं की व्यापकता के बरक्स उनका मोर्चा अभी कमजोर नहीं हुआ है।