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Ashok Pandey

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Listen with IrfanSmriti Samvad Epi 1 | Oral History of Hindi Literary Worldमहात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के लिए नीलाभ और इरफ़ान द्वारा संपन्न मौखिक इतिहास शोध परियोजना। Full transcribed text is available 'स्मृति संवाद' के माध्यम से हमारा उद्देश्य हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने और संजोने के साथ-साथ हिंदी के छोटे-बड़े साहित्यिक केंद्रों की विगत हलचलों को भी यथाशक्य दर्ज करना था। हमने सितंबर 1999 से मार्च 2001 तक उत्तर प्रदेश दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार यानी 7 हिंदी भाषी राज्यों की लगभग 25000 किलोमीटर की यात्राएं रेल, बस, टैक्सी ऑटो रिक्शा और पांव पैदल कीं। इलाहाबाद, बनारस, दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर, जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, बोरुंदा, ब्यावर, भोपाल, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन, देवास, विदिशा, खंडवा, मुंबई, कोलकाता, रांची, पटना, मुजफ्फरपुर और आरा यानी 24 नगरों के 149 साहित्यकारों के साक्षात्कार हमें रिकॉर्ड किये। इन साहित्यकारों की न्यूनतम आयु 30 वर्ष और अधिकतम आयु 95 वर्ष थी। उन साहित्यकारों में से अनेक ने अपने जीवन के अंत समय में यह साक्षात्कार रिकॉर्ड कराए थे। कुछ अस्वस्थ थे, कुछ साहित्यकार साक्षात्कार रिकॉर्ड कराने के फौरन बाद दिवंगत हो गए और कुछ ऐसे भी थे जिन तक हम चाहकर भी उनके जीवनकाल में नहीं पहुंच पाए जैसे डॉ रामविलास शर्मा और कवि केदारनाथ अग्रवाल। इस प्रकार एक एक से डेढ़ घंटे की अवधि वाले 259 ऑडियो कैसेट रिकॉर्ड किए गए जिन से लगभग 9000 पृष्ठों का अत्यंत मूल्यवान इतिवृत्त तैयार हुआ। इसका एक अंश, हिंदी का मौखिक इतिहास शीर्षक से 4 खण्डों में प्रकाशित है। इन साक्षात्कारों में साहित्यकारों की स्मृतियों, साहित्यिक विवादों, बहसों और हलचल का एक ऐसा ब्यौरा एकत्र किया गया है जो हिंदी के परिवेश का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह दस्तावेज बीसवीं सदी के साहित्यिक परिवेश और साहित्यकारों का वस्तुपरक ब्यौरा तो है ही, साथ ही यह साहित्यकारों के अंतर्द्वंद और उनकी आंतरिक बुनावट का रंग बिरंगा जायज़ा भी है। पेश है 29 अगस्त 2001 को नयी दिल्ली के इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर में किये प्रेजेंटेशन का पहला हिस्सा। Time Stamps 00:00:07 :- prabhu joshi 00:00:32 :- arun kamal 00:00:34 :- irfan 00:00:40 :- arun kamal 00:00:44 :- saroj kumar 00:00:50 :- neelabh 00:01:01 :- krishna sobti 00:01:10 :- manager pandey 00:01:12 :- managlesh dabral 00:01:21 :- manager pandey 00:01:40 :- manglesh dabral 00:01:50 :- saroj kumar 00:02:17 :- alok dhanwa 00:02:50 :- unknown 00:02:55 :- vishnu khare 00:3:06 :- rajendra yadav 00:03:56 :- presenter's voice 00:04:32 :- sulochana rangey raghav 00:04:50 :- devi dayal chaturvedi 'mast' 00:05:01 :- pawan kumar mishra 00:05:24 :- vijay daan detha 00:06:39 :- ashok vajpeyi 00:06:56 :- kashinath singh 00:07:14 :- prabhakar shrortriya 00:07:37 :- ravi bhooshan 00:07:55 :- narendra jain 00:08:09 :- arun kamal 00:08:51 :- kashinath singh 00:09:24 :- laxmikant verma 00:09:50 :- ramswaroop chaturvedi 00:10:00 :- unknown 00:10:08 :- amarkant 00:11:41 :- ramswaroop chaturvedi 00:12:59 :- satya prakash mishra 00:13:44 :- ramswaroop chaturvedi 00:14:35 :- shukdev singh 00:15:28 :- kashinath singh 00:15:57 :- unknown 00:16:16 :- kashinath singh 00:17:14 :- kumar pankaj 00:17:59 :- naamwar singh 00:18:32 :- unknown 00:18:46 :- namwar singh 00:19:31 :- asghar wajahat 00:21:14 :- nirmal verma 00:22:24 :- unknown 00:24:01 :- nandkishore acharya 00:25:10 :- naeem 00:26:36 :- ashok vajpeyi 00:27:38 :- krishna baldev vaid 00:28:36 :- krishna sobti 00:28:54 :- vishnu prabhakar 00:29:24 :- nirmal verma 00:29:41 :- krishna sobti 00:30:26 :- krishna baldev vaid 00:31:11 :- nirmal verma 00:32:08 :- krishna sobti 00:32:50 :- pramod trivedi 00:33:41 :- pawan kumar mishra Cover Art: Irfan
2022-06-2139 minIntelligent emotions are governer of Brain2022-05-0408 minListen with Irfan2022-01-292h 01Listen with Irfan2022-01-1519 minDrive in Stockpile of Full Audiobooks in Self Development, Health & Wellness
Drive in Stockpile of Full Audiobooks in Self Development, Health & WellnessUsne Gandhi Ko Kyun Maara - Ashok Kumar PandeyListen to this audiobook in full for free onhttps://epod.spaceTitle: Usne Gandhi Ko Kyun MaaraAuthor: Ashok Kumar PandeyNarrator: Dilip JainFormat: UnabridgedLength: 10:05:40Language: HindiRelease date: 01-01-2022Publisher: Storyside AB IndiaGenres: Biography & Memoir, GeneralSummary:यह किताब आज़ादी की लड़ाई में विकसित हुए अहिंसा और हिंसा के दर्शनों के बीच कशमकश की सामाजिक-राजनैतिक वजहों की तलाश करते हुए उन कारणों को सामने लाती है जो गांधी की हत्या के ज़िम्मेदार बने। साथ ही, गांधी हत्या को सही ठहराने वाले आरोपों की तह में जाकर उनकी तथ्यपरक पड़ताल करते हुए न केवल उस गहरी साज़िश के अनछुए पहलुओं का पर्दाफ़ाश करती है बल्कि उस वैचारिक षड्यंत्र को भी खोलकर रख देती है जो अंतत: गांधी हत्या का कारण बना। यह किताब जहाँ एक तरफ़ गांधी पर अफ़्रीका में हुए पहले हमले से लेकर गोडसे द्वारा उनकी हत्या के बीच गांधी के पूरे राजनैतिक जीवन में उन पक्षों पर विस्तार से बात करती है जिनकी वजह से दक्षिणपंथी ताक़तें उनके ख़िलाफ़ हुईं तो दूसरी तरफ़ उन पर हुए हर हमले और अंत में हुई हत्या की साज़िशों का पर्दाफ़ाश करती है। दस्तावेज़ों की व्यापक पड़ताल से यह उन व्यक्तियों और समूहों के साथ-साथ उन कारणों को स्पष्ट रूप से सामने लाती है जिनकी वजह से गांधी की हत्या हुई। यह किताब एक तरफ़ राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन और उसमें गांधी की भूमिका दर्ज करती है तो दूसरी तरफ़ गांधी की पूरी वैचारिक यात्रा की पड़ताल करती है। यह किताब दक्षिणपंथ के गांधी के ख़िलाफ़ होने के कारणों, कांग्रेस के भीतर के अंतर्विरोधों और विभाजन की प्रक्रिया सामने लाती है। इसके अलावा एक पूरा खंड गोडसे द्वारा अदालत में गांधी पर लगाए गए आरोपों के बिंदुवार जवाब का है। इस किताब को पढ़ते हुए हिंदी का पाठक एक ही किताब में गांधी के दर्शन, उनकी वैचारिक यात्रा और उनकी हत्या की साज़िश के राजनीतिक कारणों से परिचित हो सकेगा।
2022-01-0110h 05Learning Forward2022-01-0120 minLearning Forward2021-12-0219 minLearning Forward2021-11-0222 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 24 ब्रेस ब्रेस ब्रेसूटी याने जो दल गया वो मल गया: लपूझन्ना- भाग ८ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 8 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब फ़ेसबुक पर भी देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-10-2212 minLearning Forward2021-10-0240 minLearning Forward2021-10-0213 minIntelligent emotions are governer of Brain2021-09-1914 minIntelligent emotions are governer of Brain2021-09-1203 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 21 बच्चों की चड्डी और होशियार सुतरा: लपूझन्ना- भाग ७ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 7 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-09-1009 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 19 एक क़स्बे का जुगराफ़िया वाया थ्योरी मास्साब: लपूझन्ना- भाग ६ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 6 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-08-2009 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEP 16 नौ फुट की खाट और आश्टेलिया के राष्ट्रपति का आगमन: लपूझन्ना- भाग ५ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 5 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-07-2311 minFlirting With A Fish2021-07-2056 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 14 टांडा फिटबाल क्लब और पेले का बड़ा भाई: लपूझन्ना- भाग ४(अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 4 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-07-1613 minMajhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 13 कर्नल रंजीत और विज्ञान के पहले सबक: लपूझन्ना- भाग ३ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 3 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-07-0912 minStart: This Ground-Breaking Full Audiobook For Curious Minds.2021-07-023h 41Don’t Miss The Most Vivid Full Audiobook Today!2021-07-023h 41Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 12 बागड़बिल्ले का टौंचा: लपूझन्ना- भाग २ (अशोक पाण्डे) / Lapoojhanna- Part 2 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पाण्डे जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है अपने नये पॉडकास्ट सीरीज़ में, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और फ़ेसबुक पर भी देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-07-0212 minGet Pileup of Full Audiobooks in Fiction & Literature, Literary Fiction2021-07-023h 41Explore the Latest Full Audiobooks in Non-Fiction, Social Science2021-07-023h 41Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherished
Majhdhaar / मझधार : Literature to be cherishedEp 11 लपूझन्ना - भाग १ (अशोक पांडेय) / Lapoojhanna - Part 1 (Ashok Pandey)ढाई तीन दशक पहले, जब ज़िंदगी उपभोक्तावाद के प्लास्टिक पंजों में इतनी बुरी तरह जकड़ी नहीं गयी थी, बचपन का समय एक अलमस्त बेफ़िक्री से भरा समय था। ख़ासकर छोटे शहरों और क़स्बों में, बच्चे ऐंचक बेंचक गली मोहल्लों में खेलते कूदते, ज़िंदगी और इसके किरदारों से एक्सपेरिमेंट्स करते कराते, टीन एज की ओर ख़िरामाँ ख़िरामाँ बढ़ते रहते थे। लपूझन्ना एक छोटे शहर के ऐसे ही एक बचपन की संस्मरणात्मक शैली की कथा है जो लेखक-अनुवादक अशोक पांडेय जी ने लिखी है। अशोक जी के लिखे इस हास्य से भरपूर और बेहद मज़ेदार कथानक को मैंने आवाज़ दी है, और मेरा आग्रह है कि इसे एक बार समय ज़रूर दें। यह मेरा दावा है कि अशोक जी की लेखनी, जिसका नमूना वह पहले अपने प्रसिद्ध ब्लॉग “कबाड़ख़ाना” पर और अब यहाँ फ़ेसबुक पर देते रहते हैं, आपको फिर फिर वापिस बुलायेगी 😊
2021-06-2507 minRangManch2021-05-1431 minListen with Irfan
Listen with IrfanGorakh Pandey's ghazal sung by Ashok Chaudhary | 8 May 2016Senior journalist Ashok Chaudhary is a noted cultural activist too. In his student life he was an integral part of students protest and constructive activism. He lives in Gorakhpur and a regular visitor to the Lokrang, Fazilnagar, Kushinagar.  In 2016 he sang this ghazal Rafta Rafta Nazarbandi ka jadu Ghat-ta jaye hai of Gorakh Pandey when the second night cultural programs were about to take off. रफ़्ता-रफ़्ता नज़रबंदी का ज़ादू घटता जाए है रुख से उनके रफ़्ता-रफ़्ता परदा उतरता जाए है ऊंचे से ऊंचे उससे भी ऊंचे और ऊंचे जो रहते हैं उनके नीचे का खालीपन कंधों से पटता जाए है गालिब-मीर की दिल्ली देखी, देख के हम हैरान हुए उनका शहर लोहे का बना था फूलों से कटता जाए है ये तो अंधेरों के मालिक हैं हम उनको भी जाने हैं जिनका सूरज डूबता जाये तख़्ता पलटता जाए है (Text courtesy Kavitakosh.org ) Recorded on 6 May 2016 Produced by Irfan Representational Image from Ashok Chaudhary's facebook wall.
2021-05-0904 minListen with Irfan2021-05-0703 minMasterclass With Fearless Educator2021-03-0125 minThe #EduRockstar Talks2020-11-3030 minThe Chords of Life - Vineet Tandon2020-03-0537 minSaangte Aika
Saangte AikaREVIEW: Films- "Prawas" and "Vikun Taak"In this episode, Rima Sadashiv Amarapurkar does an audience perspective review, rates and talks about Ashok Saraf and Padmini Kolhapure starrer film 'Prawaas', Written and Directed by Shashank Udaapurkar, and  'Vikun Taak', directed and Written by Sameer Patil and starring Chunkey Pandey, Shivraj Waychal, Hrishikesh Joshi, Sameer Chaughule, Rohit Mane, Jaywant Wadkar, Rutuja Deshmukh and Varsha Dandle. या भागात,रिमा सदाशिव अमरापूरकर,प्रेक्षकांच्या दृष्टीने विश्लेषण करणार आहेत आणि रेटिंग देणार आहेत दोन कलाकृतींना. पहिली आहे ओम चान्गियानी फिल्म निर्मित शशांक उदापुरकर लिखित व दिग्दर्शित चित्रपट 'प्रवास'. यातील मुख्य कलाकार आहेत अशोक सराफ,पद्मिनी कोल्हापुरे अणि श्रेयस तळपदे. दुसरी कलाकृती आहे, समीर पाटिल लिखित अणि दिग्दर्शित फिल्म "विकून टाक ". यातिल मुख्य कलाकार आहेत चंकी पान्डे,शिवराज वायचळ, समीर चौघुले,रुतुजा देशमुख,हृषिकेश जोशी,रोहित माने, जयवंत वाडकर व वर्षा दांडळे. Listen To Saangte Aika & Other podcasts by Ep.Log Media on www.eplog.media Follow Us on Instagram @eplogmedia Mail us for feedback/partnership on bonjour@eplog.mediaSee omnystudio.com/listener for privacy information.
2020-02-1506 minWhy Agile Transformations Fail2018-06-0200 min