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Shradha Prakash

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Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----टीस / Teesप्रायः आपको अपने आस-पास ऐसी स्त्रियाँ मिल जाएँगी जो परिवार के हित के लिए सब कुछ स्वाहा करके भी खाली हाथ रह जाती हैं। यदि आवाज़ उठाती हैं तो न जाने कितने विशेषणों से परिभाषित की जाती हैं और चुपचाप सहती जाती हैं तो स्वयं कुंठा का शिकार होती रहती हैं। आवश्यकता है तो संतुलन की। इस संतुलन को बनाए रखने में सभी का योगदान होना चाहिए न कि केवल और केवल स्त्री का।  मेरी टीेस कहानी ने आपको भी टीस का अहसास कराया हो तो अपने कहानी सुनने के शौकीन मित्रों के साथ सांझा जरूर कीजिएगा तथा अपने विचार shradha.pdy@gmail.com  पर लिखने का कष्ट कीजिएगा। जल्द ही मिलेंगे अपनी लिखी एक और कहानी के साथ    तब तक आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में---
2022-06-1216 minMandir/ मंदिर2022-06-0136 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2022-05-1312 minDesign Talk (dot IE)2022-03-0314 minMandir/ मंदिर2022-02-0734 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2022-01-1412 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-12-1510 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-12-0116 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-11-1617 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----
Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----Diyon Wali Deewali/ दीयों वाली दीवालीबेटा! बहुत दिन हो गए, तुम्हारे लिए कोई नया कपड़ा नहीं खरीद पाए, तुमको खीर पूड़ी भी नहीं खिला पाए, इस बार दीवाली पर ये सारे दीए और खिलौने शहर जा कर बाजा़र में बेच कर तुम्हारे लिए नया कपड़ा लायेंगे। क्या यह सपना पूरा हुआ? आइए यह संकल्प ले लें कि हमारी दीवाली में किसी गरीब की भी दीवाली मने। किसी गरीब के चेहरे पर खुशियां फैलें शायद तभी सच्ची दीवाली होगी। मेरी कहानी ने यदि आपके दिल को छू लिया हो तो कृपया अपने मित्रों के साथ जरूर साँझा कीजिए और अपने विचार shradha.pdy @ gmail com पर भेजने का कष्ट कीजिए। एक पक्ष के पश्चात फिर मिलेंगे एक नई कहानी के साथ
2021-11-0113 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-10-1412 minThe Inner Reel2021-10-1238 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-09-3014 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-09-1215 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-08-1410 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-08-1414 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-08-0117 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-07-1511 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----
Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----majduri banam majburi / मजदूरी बनाम मजबूरीजल्दी ही शहर जाने का इंतजाम करके वह चल पड़ा उस राह पर जहाँ न जाना चाहते हुए भी जाना उसकी बेबसी बन गई थी। जब घर से चला तो अम्मा रोने की जगह खुश थी। बाबू गर्व से कंधे पर हाथ रख कर बोले-अपना ख्याल रखना। निर्मला भी खिड़की से सट कर पर्दे के पीछे से आँखों में आँसू भर कर देखने की जगह अपनी सोने की बाली के सपने सजाती हुई काम में व्यस्त रही। वह ट्रैक्टर पर बैठ गया। घर पीछे छूटा। गाँव और फिर गाँव की सीमा। महेश चुपचाप मज़दूरी को अपनी नियति मान कर चला जा रहा था। अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तो अपने विचार Shradha.pdy@Gmail.com पर भेजने की कृपा कीजिए।
2021-07-0114 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-06-1409 minBest in Class with Harish Narayanan2021-06-1355 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----
Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----gulzar balkaniyan / गुलजार बालकनियाँबिलकुल नहीं बिलकुल नहीं दोनों बहुओं के साथ-साथ साची की बेटियों ने एक साथ कहा। अरे भई हमारे पापा मम्मी लोगों के लिए मिसाल है इसलिए कुछ कमाल और धमाल तो होना ही चाहिए। शादी पूरे धूम.धाम से होगी। शायद इसी शोर-शराबे और जश्न ने उन दोनों को लोगों का दुश्मन बना दिया। हर गली, हर चौराहे पर नए दम्पति की चर्चा हो रही थी। इसी चर्चा ने सुनसान बालकनियों को गुलजा़र कर दिया।  "गुलजा़र बालकनियाँ " है तो कहानी पर सच्ची। मैं इसकी सत्यता का दावा भी कर सकती हूँ। आज के समय में जब बच्चे दूर रहते हैं तब बुढ़ापे में एकाकीपन एक अभिशाप है अतः मुझे यह विवाह उचित लगा वैसे आप अपने तरीके से सोच सकते हैं। अगर आपको मेरी कहानी पसंद आई तोअपने विचार Shradha.pdy@Gmail.comपर भेजने की कृपा कीजिए।
2021-06-0122 minM-Power2021-05-2035 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-05-1513 minYeukai Business Show2021-05-1331 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-05-0117 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----
Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----Antral/ अंतरालओजस गुनगुनी धूप में बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। पास ही बैठी उनकी पत्नी मटर छील रही थीं। ओजस का परिवार आधुनिक समाज में उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है जहाँ तीन-तीन पीढ़ियाँ बड़े प्रेम व सौहार्द से रह रही थीं। परिवार टूटते ही क्यों है? आज तक न ओजस को इस प्रश्न का उत्तर मिला न ही हम सबको। परिवार के टूटने व जुड़े रहने की गुत्थी को सुलझाने में कितने ही समाज शास्त्रियों ने कितना समय लगा दिया पर आज तक इस गुत्थी को न वे सुलझा पाएए न ये ओजस जी के वश की बात है। हम कहीं इस विषय में और न उलझ जाएँ अतः चलिए उस सुहानी धूप में जहाँ ओजस अपने परिवार के साथ सीनियर सिटिज़न का आनन्द उठा रहे थे। Email-shradha.pdy@gmail.com 
2021-04-1517 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2021-04-0112 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----
Stories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----Apni Paari/ अपनी पारीदिनकर जी ने कहा था एक नहीं दो दो मात्राएँ नर से भारी नारी। जयशंकर प्रसाद दम कहा-नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नभ पग तल में , पीयूष स़़्त्रोत सी बहा करो जीवन के सुंदर समतल में।  हमारा हिंदी साहित्य भरा पड़ा है ऐसे अनेक सूक्तियों सूत्रों कविताओं व लेखों से पर क्या नारी को उसका वह स्थान मिल पाया है जिसकी वह हकदार है? कुछ मेरे मित्र हाँ भी कह सकते है पर बहुत ऐसे मिलेंगे जो हाँ कहने में थोड़ा हकलाएँगे। आखिर क्यों? कई बार मेरा मन अपने आप से प्रश्न भी करता है कि आखिर क्या कारण है कि महिला को अपने अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए महिला दिवस मनाने की जरूरत पड़ रही है? शायद इसका कारण स्वयं नारी ही है। आप मुझसे सहमत हो तो यह कहानी आपके लिए और असहमत हों तब तो यह कहानी आपके लिए ही है।अपने विचार मुझे shradha.pdy@gmail.com पर भेजिए।  लोगों से मिली प्रसंशा की झलकियां  Awesome story and Kudos to your unique style of narration. I felt as if the whole story is being picturised in front of my eyes and all the characters are playing live in front of me. Truly amazing ma'am 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻 👌👌👌Wow Lovely share . Just heard the first story today . It was marvellous ! After such a long time I have heard a lovely story
2021-03-1413 minBetween Us with Shadman Rahman2021-01-2628 minI\'m CraZy But You Can\'t Lock Me Up2021-01-1121 minChoosing Your Reflection2020-11-0428 minPops in a Pod2020-09-2233 minMaharani Talks2020-07-2853 minImpact India2020-07-1639 minVyakhyaan by Vinod ji Agarwal_\'B\'2020-05-2203 minStories from the Heart कहानियाँ जो दिल से निकलें और दिल पर दस्तक दें ----2020-05-0213 minTantra Made Easy2020-04-2341 minSelf Achievement Network2020-03-2402 minSeedToScale | Curated by Accel2019-03-2246 minCEIBS China Knowledge2018-08-3100 minToday\'s Leading Women with Marie Grace Berg ~ Real Stories. Real Inspiration. Real Take-aways. 7-Days A Week!2014-11-3000 min