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Anokha Ankit

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The Anokha show2024-01-0812 minThe Anokha show2023-07-2622 minThe Anokha show2023-05-0709 minThe Anokha show2023-04-0123 minThe Anokha show2023-03-1114 minThe Anokha show
The Anokha showDark Reality about fast fashion Factorial Episode 16लीला वनोदिया 30 साल से मुंबई में लोगों के घर घर जाकर पुराने कपड़े जमा करती हैं. लीला का संबंध, उत्तरी गुजरात की घुमंतू जनजाति-वाघरी से है, जो लंबे समय तक सामाजिक भेदभाव की शिकार रही है. इस समुदाय के लोगों की रोजी-रोटी का आधार पुराने कपड़े हैं. वे पुराने कपड़ों के बदले लोगों को नए बर्तन, प्लास्टिक का सामान या नकदी देते हैं. और फिर इन कपड़ों को आगे बेच देते हैं. लीला बताती है कि वह इन कपड़ों को करीब 10 रुपये में खरीदती हैं और उसे धो कर और आयरन कर 20 से 30 रुपये में बेच देती है. वाघरी लोग, जमा किए कपड़ों को मुंबई के उपनगरीय बाजार में बेच आते हैं. यह एक फुटपाथ बाजार है. उन कपड़ों को खरीद कर, व्यापारी उसे दूर-दराज के गांवों में बेचते हैं, उन जगहों पर, जहां लोगों के पास नए कपड़े खरीदने को अक्सर पैसे नहीं होते. हर महीने इस तरह के एक बाजार से ही लगभग 40 टन  वाघरी जैसे समुदाय सर्कुलर इकोनमी में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इसीलिए एक सामाजिक उद्यम, बॉम्बे रिसाइक्लिंग कंसर्न उनकी मदद कर रहा है. कंपनी के संस्थापक विनोद निंद्रोजिया का कहना है कि एक बाजार में ही वाघरी लोग 5 से 6 टन कपड़ा लाते हैं और इस तरह कार्बन डाईऑक्साइड कम करने में मदद करते हैं. ये कपड़े यदि रद्दी में फेंक दिए जाएं तो उन्हें गलने में सालों लगेंगे. भारत में हर साल कपड़े का करीब 80 लाख टन कचरा निकलता है. अक्सर, उन्हें कूड़ाघरों में या यूं ही कहीं भी फेंक दिया जाता है. ऐसे फेंके जाते हैं पुराने कपड़ेऐसे फेंके जाते हैं पुराने कपड़े ऐसे फेंके जाते हैं पुराने कपड़ेतस्वीर: MARTIN BERNETTI AFP via Getty Images पिछले 15 सालों में दुनिया भर में, कपड़ा उत्पादन दोगुना हुआ है. फास्ट फैशन अभी भी लोगों की, इस्तेमाल करो और फेंको की आदत को बढ़ावा दे रहा है. इसीलिए कपड़े ज्यादा नहीं पहने जा रहे हैं. जल्दी फेंक दिए जाते हैं. कपड़ों को पहने जाने की दर पिछले दो दशकों में करीब 40 फीसदी तक गिरी है. फैशन उद्योग बेशक आर्थिक वृद्धि के विकास में मददगार है लेकिन वो संसाधनों का बड़े पैमाने पर दोहन कर रहा है. फैशन रिवोल्यूशन इंडिया की श्रुति सिंह का कहना है, "फैशन इंडस्ट्री में कल्पना से कहीं ज्यादा, पानी इस्तेमाल होता है. 93 अरब मीट्रिक क्यूब. इतना पानी एक साल में 50 लाख लोगों के पीने के काम आ सकता है." इतना सारा पानी फैशन के लिए बर्बाद किया जा रहा है. इस बर्बादी को बचाने का एक रास्ता है कपड़ों का दोबारा इस्तेमाल. इसीलिए सेकेंड हैंड कपड़ों का ग्लोबल बाजार फलफूल रहा है. भारत में ये बाजार अभी शुरुआत में ही है. इसकी बड़ी वजह है, पुराने सेकेंड हैंड कपड़ों को पहनने से जुड़ी हिचक. लेकिन शहरों में युवा खरीदार, फास्ट फैशन के टिकाऊ विकल्पों पर जोर दे रहे हैं और उन्होंने पहने हुए कपड़ों को अपनाना शुरू कर दिया है. फिर लौटकर आ रहे पुराने कपड़े 06:03 गांवों में पहले भी ऐसा होता था कि बड़ी बहन के कपड़े छोटी बहन पहनती थी और बड़े भाइयों के कपड़े छोटे भाई. देश के शहरी इलाकों में भी किफायत की नई संस्कृति पैदा हो रही है. बढ़ती मांग ने दुकानों को सेकेंड हैंड कपड़ों और दूसरे पुराने सामान से भर दिया है. किफायती स्टोरों की बढ़ती मांग स्टाइलिस्ट और फैशन डिजाइनर अमित दिवेकर बांद्रा के एक किफायती स्टोर में नियमित रूप से आते हैं. वे कहते हैं, "हम सब लोग सस्टेनेबिलिटी का रुख कर रहे हैं, फैशन में इस चीज़ की इस समय काफी मांग है. इसीलिए माल को रिसाइकिल करना सही है. अपने संसाधनों को बर्बाद कर हमेशा नया माल का उत्पादन सही नहीं है." 2019 में खुले बॉम्बे क्लोजेट क्लींस में लोग नकदी के बदले अपने कपड़े बेच सकते हैं. कंपनी की संस्थापक सना खान का कहना है, "जो लोग यहां आते हैं, वे ऐसे लोग नहीं है जो नए कपड़े नहीं खरीद सकते. वे ऐसा इसलिए कर रहे है क्योंकि ये लाइफस्टाइल चेंज है." अनुमान है कि, रीसेल बाजार अगले कुछ बरसों में ई-कॉमर्स बाजार से आगे निकल सकता है.   की ओर मोड़ने में मदद करने वालों में रीलव जैसे प्लेटफॉर्म हैं. ये एक सर्कुलर टेक प्लेटफॉर्म है जिसे कीर्ति पूनिया और प्रतीक गुप्ता ने बनाया है. इसकी मदद से ब्रांड अपनी ही वेबसाइटों पर अपने उत्पादों को फिर से बेच सकते हैं. कीर्ति पूनिया बहुत उत्साहित हैं, "अगर आप पिछले साल जनवरी में इंस्टाग्राम पर #thriftindia देखें तो चार लाख पोस्ट थीं. अभी सात लाख हैं. जनवरी से अब तक ग्रोथ ही हुई है." कुछ किफायती स्टोर अपनी वैल्यू चेन में महिलाओं को लाने की कोशिश कर रहे हैं. वे सीधे महिलाओं से अपने ग्राहकों की पसंद का माल खरीद लेते हैं. महिलाओं के लाए पारंपरिक कपड़ों की बिक्री के लिए भी वो वन स्टॉप कलेक्शन पॉइंट की तरह हैं. इस मॉडल को अगर आगे बढ़ाया जाए, तो यह वाघरी लोगों की एक बड़
2023-02-2709 minThe Anokha show
The Anokha showवेतन, कानून और अधिकार भारत में महिलाओं से कितने दूर? Factorial Episode15यूएन वीमेन (संयुक्त राष्ट्र का महिलाओं के लिए संगठन) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक बाक़ी दुनिया की तरह ही भारत भी साल 2030 तक लैंगिक बराबरी हासिल करने के रास्ते पर नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि हालात मौजूदा गति से सुधरे, तो भेदभावपूर्ण क़ानूनों को हटाने और महिलाओं और लड़कियों को क़ानूनी बराबरी देने में मौजूदा फ़ासलों को कम करने में 268 साल और लग सकते हैं. लैंगिक बराबरी संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में शामिल है. इसका मक़सद लिंग के आधार पर भेदभाव को ख़त्म करना और महिलाओं और लड़कियों को मिलने वाली क़ानूनी सुरक्षा में ख़ामियों को दूर करना है. इसका मतलब है बराबर वेतन, कार्यस्थल पर मान्यता और कार्यस्थल के अंदर और बाहर क़ानूनी अधिकार. विज्ञापन वेतन गैरबराबरी वेतन में ग़ैर बराबरी भारत में ऐसा कोई प्रभावी क़ानून नहीं है जो कार्यस्थल पर बराबर कार्य के लिए बराबर वेतन का अधिकार देता हो. वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की ताज़ा जेंडर गैप रिपोर्ट 2022 में भारत 146 देशों में 135वें नंबर पर है. भारत में ऐसे क़ानून और अधिनियम हैं जो महिलाओं को रात के समय पुरुषों की तरह काम करने से रोकते हैं. उदाहरण के तौर पर, महाराष्ट्र दुकानें और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम 2017, धारा 13, खनन अधिनियम 1952, धारा 46 और कारखाना अधिनियम, धारा 27, 66 और 87 एक महिला की किसी कारखाने में पुरुषों की तरह काम करने की क्षमता को सीमित करते हैं. इन सभी कारकों से वर्ल्ड बैंक के लैंगिक बराबरी सूचकांक में भारत का स्कोर सिर्फ़ 25 है, जबकि ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों में बेहतर क़ानून हैं जो महिलाओं के वेतन को प्रभावित करते हैं. ऊपर दिए गए संकेतकों में महिलाओं द्वारा परिवार के लोगों के लिए किया जाने वाला अवैतनिक घरेलू काम और सेवा शामिल नहीं है. वर्ल्ड कप: क़तर में चल रही प्रतियोगिता में कौन आगे गया और किसका पत्ता हुआ साफ़ कार्यस्थल पर भारतीय माएं बच्चा होने के बाद उसकी परवरिश और देखभाल एक और कारण है जो महिलाओं की काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है. जबकि, भारत में एक मज़बूत क़ानून है मातृत्व लाभ अधिनियम जो मां को 182 दिनों के सवेतन मातृत्व अवकाश का अधिकार देता है, पिता के लिए सवेतन छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं है. गर्भवती महिलाओं को नौकरी से हटाने से रोकने के लिए भी कोई क़ानूनी प्रावधान नहीं है. इससे महिलाओं को नुक़सान होता है क्योंकि कार्यस्थल उन्हें नौकरी से ना निकालने के लिए क़ानूनी तौर पर बाध्य नहीं हैं. जिन देशों का स्कोर अच्छा हैं वहां पितृत्व अवकाश या दोनों अभिभावकों को सवेतन अभिभावक अवकाश दिया जाता है. इस सूचकांक में सबसे अच्छे स्कोर वाले देश जापान में माता और पिता दोनों को 300 दिनों का सवेतन पैतृक अवकाश दिया जाता है. यूपी में वाल्मीकि समाज की शादी में 60 पुलिसवालों की तैनाती का पूरा मामला क्या है- ग्राउंड रिपोर्ट महिला उद्यमी उद्यम के क्षेत्र में महिलाएं संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को बढ़ाने में एक उत्प्रेरक के रूप में काम करती हैं. कुछ संकेतक किसी महिला की कारोबार चलाने की क्षमता को या तो बढ़ा सकते हैं या तोड़ सकते हैं, इनमें कॉन्ट्रैक्ट साइन करने में किसी भेदभाव का ना होना, व्यापार को पंजीकृत कराना और बैंक खाता ऐसे ही खुलवा लेना जैसे पुरुष खुलवाते हैं, शामिल है. भारत का क़ानून इन मामलों में महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं करता है, हालांकि क़ानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो लैंगिक आधार पर क़र्ज़ लेने में भेदभाव को रोकता हो. भारत इस दिशा में और बेहतर कर सकता है. जेंडर गैप रिपोर्ट 2022 के डाटा दर्शाता है कि, भारत में सिर्फ़ 2.8 प्रतिशत फ़र्मों में ही महिलाओं का मालिकाना हक़ है. गुजरात का वो 'अंधेरा' गांव जहां आज़ादी के 75 साल बाद भी नहीं आई बिजली एसटीईएम में भारतीय महिलाएं लैंगिक बराबरी पर जब बात होती है तो एक और विषय पर चर्चा होती है. ये है एसटीईएम यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स के क्षेत्र में महिलाओं की मौजूदगी. भारत में महिला एसटीईएम स्नातकों की दर 42.7 प्रतिशत है जो अधिकतर विकसित देशों से भी ज़्यादा है. वहीं उपलब्ध डेटा के मुताबिक़ सबसे ज़्यादा महिला एसटीईएम स्नातक अल्जीरिया मे हैं जिसकी दर 55.47 प्रतिशत है. यहां एक अंतर्विरोध है एसटीईएम क्षेत्रों में महिलाओं का रोज़गार. वैश्विक स्तर पर इन क्षेत्रों में महिलाओं की मौजूदगी सिर्फ़ 19.9 प्रतिशत है. इस कम दर की एक वजह कार्यस्थल का माहौल है जो पुरुष केंद्रित है. इसके अलावा ये क्षेत्र कम समावेशी और लचीले हैं. यही वजह है कि महिलाएं और कम प्रतिनिधित्व वाले अन्य समूह इस तरफ़ कम आकर्षित
2023-01-2510 minThe Anokha show
The Anokha showAgriculture Non Agriculture and Construction Workers Wages in Indiaग्रामीण मजदूरों की दैनिक मजदूरी में अलग अलग राज्यों में काफी असमानता है. महंगाई दर के लगातार ऊंची रहने के बावजूद कई राज्यों में मजदूरों को दिन भर काम के बदले सिर्फ करीब 200 रुपये दिए जा रहे हैं. आरबीआई ने भारतीय राज्यों से जुड़े अलग अलग आंकड़ों की अपनी हैंडबुक का सातवां संस्करण निकाला है. इसमें 2021-22 के आंकड़ों को शामिल किया गया है. आर्थिक क्षेत्र की कई गतिविधियों से संबंधित आंकड़ों को इस हैंडबुक में जगह दी गई है, जिसमें ग्रामीण इलाकों में दी जाने वाली दैनिक मजदूरी भी शामिल है. 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य कृषि मजदूरों को मिलने वाली दैनिक मजदूरी का मूल्यांकन किया गया है. आंकड़े अलग अलग राज्यों में दी जाने वाली मजदूरी में बड़ी खाई दिखा रहे हैं. 20 में से कम से कम 10 राज्य राष्ट्रीय औसत जितनी भी मजदूरी नहीं देते. आरबीआई ने बताया है कि इन आंकड़ों का स्रोत केंद्र सरकार का श्रम ब्यूरो है. सभी राज्यों में केरल सबसे आगे है. यहां सामान्य कृषि मजदूरों को 2021-22 के दौरान 726.8 रुपये दैनिक मजदूरी मिली. 2014-15 में इस श्रेणी के लिए दिहाड़ी 575.1 रुपए थी. उसके बाद हर साल इसमें 20-25 रुपयों की वृद्धि हुई. कोरोना वायरस महामारी के दौरान 2020-21 में इसमें सिर्फ छह रुपए की वृद्धि हुई. इस श्रेणी में दैनिक मजदूरीका राष्ट्रीय औसत 323.32 रुपए है. यानी केरल की दर राष्ट्रीय औसत के दुगुने से भी ज्यादा है. अधिकांश राज्यों में 500 रुपयों से कम केरल के बाद स्थान है जम्मू और कश्मीर का, हालांकि वह भी केरल से काफी पीछे है. जम्मू-कश्मीर में सामान्य कृषि मजदूरों को 2021-22 में 524.6 रुपए दैनिक मजदूरी दी गई. 2014-15 में यह 367.7 रुपये थी. इसमें हर साल 15-20 रुपये का इजाफा होता आया है. 2020-21 में इसमें करीब 50 रुपए की बढ़ोतरी हुई. किसान बनते शहरों से लौटे लोग 04:36 बाकी सभी राज्यों में दिहाड़ी की दर 500 रुपये से नीचे ही है. हिमाचल प्रदेश में 457.6 और तमिलनाडु में 445.6 रुपये है. सबसे कम मजदूरी देने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार शामिल हैं. मध्य प्रदेश में सिर्फ 217.8 रुपए मजदूरी दी जाती है, जो देश में सबसे कम है. पिछले एक साल में इसमें सिर्फ लगभग 20 पैसों की बढ़ोतरी हुई है. 2014-15 से भी इसमें सिर्फ 67 रुपयों का इजाफा हुआ है. 2020-21 में इसे 19 रुपए बढ़ाया गया था. गुजरात में दैनिक मजदूरी 220.3 रुपए है. 2014-15 के मुकाबले इसमें सिर्फ 60 रुपयों की बढ़ोतरी हुई है. 2020-21 में इसे पांच रुपयों से भी कम बढ़ाया गया था. निर्माण में ज्यादा मजदूरी कृषि के अलावा दूसरे तरह का काम करने वालों को मिलने वालीदैनिक मजदूरी की भी लगभग ऐसी ही तस्वीर है. 681.8 रुपए दिहाड़ी के साथ केरल इस श्रेणी में भी आगे है. क्यों पैदल जा रहे हैं मजदूर 03:35 जम्मू-कश्मीर में दिहाड़ी 500.8 है, तमिलनाडु में 462.3 और हिमाचल प्रदेश में 389.8 है. सबसे निचला स्थान पाने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश में 230, त्रिपुरा में 250, गुजरात में 252.5 और महाराष्ट्र में 277.2 रुपए दिहाड़ी है. निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर कृषि के मुकाबले थोड़ा ज्यादा कमा लेते हैं. केरल में इन श्रमिकों को 2021-22 में 837.7 रुपए दैनिक मजदूरी मिली. जम्मू-कश्मीर में 519.8 और तमिलनाडु में 478.6 रुपये मिले. त्रिपुरा में 250, मध्य प्रदेश में 266.7 और गुजरात में 295.9 रुपए दिए गए.
2023-01-0510 minThe Anokha show
The Anokha showThe moment when India was about to play the FIFA World Cup Factorial Episode 13#fifa #worldcup #qatar #2022 #football #india दरअसल दूसरे विश्व युद्ध के चलते 1942 और 1946 में वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल का आयोजन नहीं हो सका था. 1950 में 12 साल के इंतज़ार के बाद वर्ल्ड कप का आयोजन होने वाला था. ब्राज़ील में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए महज 33 देशों ने क्वालिफ़ाइंग राउंड में खेलने पर सहमति जताई थी. क्वालिफ़ाइंग ग्रुप 10 में भारत को बर्मा (म्यांमार) और फिलीपींस के साथ जगह मिली थी. लेकिन बर्मा और फिलीपींस ने क्वालिफाईंग राउंड से अपना नाम वापस ले लिया था. यानी भारत बिना खेले ही वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफ़ाई कर गया था. इतिहास बहुत दूर नहीं था. भारतीय टीम को पहली बार वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल में अपना करतब दिखाने के लिए टिकट मिल चुका था. 1950 के वर्ल्ड कप में भारत का ग्रुप 1950 के वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल का जब फ़ाइनल राउंड ड्रॉ तैयार हुआ, तो भारत को पूल -3 में स्वीडन, इटली और पराग्वे के साथ जगह मिली. अगर भारत इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेता, तो उसका प्रदर्शन कैसा होता? 1950 में भारतीय फ़ुटबॉल का बहुत ज़्यादा इंटरनेशनल एक्सपोज़र नहीं था लेकिन टीम की प्रतिष्ठा अच्छा गेम खेलने वाले मुल्क के तौर पर थी. इसकी झलक भारतीय टीम ने 1948 के लंदन ओलंपिक खेलों में भी दिखाई थी. फ़्रांस जैसी मज़बूत टीम से भारत महज 1-2 के अंतर से हारा था. हालांकि इस नियम से बचाव के रास्ते भी मौजूद थे, जैसे कि हंगरी, रूस और अन्य सोशलिस्ट देश वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को सेना का सदस्य बता कर दावा करते थे कि सेना का सदस्य प्रोफ़ेशनल नहीं हो सकता. लेकिन संभवत: इतनी जानकारी उस समय भारतीय फ़ुटबॉल के अधिकारियों को नहीं थी. हो सकता है कि एशियाई खेलों और ओलंपिक खेलों में हिस्सेदारी से हटा दिए जाने के डर से ही भारतीय फ़ुटबॉल संघ ने 1950 के वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेने का फ़ैसला किया हो. लेकिन यह फ़ैसला ऐसा ब्लंडर साबित हुआ, जिसका दंश पिछले 72 सालों से भारत के खेल प्रेमियों को साल रहा है, यह टीस हर चार साल पर होने वाले वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल के दौरान कुछ ज़्यादा हो जाती है.
2022-12-1410 minThe Anokha show2022-12-0310 minThe Anokha show
The Anokha showSometimes 25Cr lottery can make you cry The Anokha Show E36#lottery #india #Kerala #Anup #25crore #trending #news #fact #youtube केरल के अनूप बी ने जब इस साल सितंबर में 25 करोड़ रुपये की लॉटरी जीती थी तो उनकी ख़ुशियों का ठिकाना नहीं था. लेकिन ये जीत अब उनके लिए मुसीबत बन गई है. 32 साल के अनूप को लगा कि लॉटरी जीतते ही ज़िंदगी बदल जाएगी. लेकिन उनकी ज़िंदगी में फ़िलहाल जो बदलाव आया है, उसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. लॉटरी जीतते ही अनूप रातोंरात मशहूर हो गए. अब घर से निकलते ही उन्हें हर कोई पहचान जाता है. लेकिन सबसे ज़्यादा दिक़्क़त पैसे मांगने वालों से है. हर कोई उनसे पैसे की उम्मीद कर रहा है. इस वजह से उनके कई दोस्त और रिश्तेदार भी उनसे नाराज़ हैं. ऑटो चलाने के बाद अब शेफ़ का काम करने वाले अनूप कहते हैं, ''मेरे कई क़रीबी लोगों ने हमसे बातचीत करना बंद कर दिया है.'' 25 करोड़ रुपये की लॉटरी जीतते ही अनूप राष्ट्रीय मीडिया में छा गए. लेकिन इसके साथ ही उनकी मुसीबत शुरू हो गई. उनके पास हर रोज़ पैसे मांगने वालों की भीड़ लगने लगी. परेशान होकर उन्होंने एक वीडियो जारी किया. वायरल वीडियो में अनूप ये कहते हुए देखे जा रहे हैं कि 'उन्हें और उनके परिवार को पैसों के लिए परेशान न किया जाए. इसके साथ ही वो ये भी कह रहे हैं कि काश उन्होंने ये लॉटरी ना जीती होती.' होम लोन चुकाने से लेकर बेटे की शादी के लिए पैसों की मांग 'घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है' कुछ अफ़वाहों ने इस दंपति का चैन छीन लिया है. अनूप कहते हैं, ''कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया था कि मैंने कोई लॉटरी नहीं जीती है. मैं झूठ बोल रहा हूं.'' तमाम अख़बारों, न्यूज़ चैनलों और वेबसाइटों में नाम और तस्वीर छपने से अनूप का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. बाहर निकलते ही लोग उन्हें पहचान लेते हैं और फिर पैसे मांगने वालों की भीड़ लगने लगती है. सिर्फ़ अनूप का अनुभव ही ऐसा नहीं है. अनूप की मुलाक़ात एक स्थानीय टीवी चैनल के गेम शो में 59 वर्षीय जयपालन से हुई थी. जयपालन ने एक करोड़ 20 लाख रुपये की लॉटरी जीती थी और उनका भी नाम इसी तरह मीडिया में छा गया था. अब क्या सोच रहे हैं अनूप अनूप कहते हैं, ''लोग सोचते हैं कि लॉटरी जीतने से मेरी सारी परेशानियां ख़त्म हो गई हैं. लेकिन अभी भी सारी चीज़ें तय नहीं हैं. मुझे पता नहीं है कि टैक्स वगैरह कट कर मुझे कितने पैसे मिलेंगे.'' राज्य सरकार 30 फ़ीसदी टैक्स काट कर बाकी पैसे अनूप को देगी. इसके बाद लॉटरी एजेंट का कमीशन कटेगा. लॉटरी जीतने वालों को केंद्र सरकार को सरचार्ज और सेस भी देना होगा. अनूप की लॉटरी जीतने की ख़बर फैलने के बाद राज्य सरकार ने उनके लिए एक दिन का फ़ाइनेंशियल मैनेजमेंट ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया ताकि वह अपने पैसे का सही तरीके से इस्तेमाल कर सकें. फ़िलहाल अनूप लॉटरी के पैसे कहीं लगाने का फ़ैसला करने से पहले कुछ साल इंतज़ार करेंगे.
2022-11-2308 minThe Anokha show
The Anokha showHistory about Indian Medicine Market Scandals Factorial E12#gambia #maiden #india #africa #cough #syrup कथित तौर पर भारत में बने कफ सिरप पीने से कुछ दिनों पहले गाम्बिया के दर्जनों बच्चों की मौत हो गई. यह पहला मामला नहीं है जिसने भारतीय दवा उद्योग से जुड़े स्याह पक्ष को उजागर किया है. गाम्बिया में हाल ही में 69 बच्चों की मौत के बाद भारतीय दवा कंपनियां फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. कई रिपोर्ट में कहा गया कि बच्चों को भारत में स सिरप का निर्माण भारतीय कंपनी मेडन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने किया था और चार अलग-अलग ब्रांडों के तहत इसे अफ्रीकी देश में निर्यात किया गया था. कफ सिरप से मौत: भारत ने दवा उत्पादन बंद कराया विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि मेडन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा बनाई गईं चार दवाओं में डाइथाइलीन ग्लाइकोल और इथाइलीन ग्लाइकोल की मात्रा सुरक्षित मानकों से ‘अस्वीकार्य स्तर तक' ज्यादा है, जो घातक हो सकता है. डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ये उत्पाद ‘दूषित' थे और इन्हें इस्तेमाल करने की वजह से ‘पेट में दर्द, उल्टी, दस्त, पेशाब में परेशानी, सिरदर्द, मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे वे लक्षण दिखने शुरू हुए जिनसे मौत हो सकती है.' इस पूरे मसले पर मेडन फार्मास्युटिकल्स ने कहा कि वह उत्पादन की प्रक्रिया में ‘स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन कर रहा था'. वह इस घटना से ‘हैरान' और ‘काफी दुखी' है. गाम्बिया की घटना को लेकर भारत सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए विशेष पैनल गठित किया है. फिलहाल, पैनल ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है. हालांकि, इस स्कैंडल ने पहले ही भारत के विशाल दवा उद्योग को लेकर दर्दनाक सवाल खड़े कर दिए हैं. भारत टीकों के निर्माण के मामले में दुनिया का अग्रणी देश है और जेनेरिक दवाओं का भी बड़ा उत्पादक है. जेनेरिक दवाएं कीमत के लिहाज से सस्ती होती हैं. साथ ही, गुणवत्ता के मामले में ब्रैंडेड दवाओं की तरह ही प्रभावी होती हैं. वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं की 20 फीसदी आपूर्ति भारत करता है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स का अनुमान है कि बढ़ती निर्यात हिस्सेदारी के साथ भारत का दवा उद्योग बढ़ता रहेगा और अगले साल तक यह उद्योग लगभग 60.9 अरब डॉलर मूल्य का हो जाएगा. हालांकि, एक विशाल दवा बाजार में नकली दवाओं के उत्पादन और वितरण का भी खतरा होता है, क्योंकि कई लोग भारत के नियम-कानूनों के कड़ाई से पालन पर सवाल उठाते हैं. दवा बाजार के स्कैंडल भारत निर्मित कफ सिरप से जुड़ी गाम्बिया की घटना इस तरह की पहली घटना नहीं है. दो साल पहले, डिजिटल विजन नामक कंपनी के बनाए गए सिरप के सेवन से जम्मू और कश्मीर में 17 बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना की जांच में पाया गया कि सिरप में डाइथाइलीन ग्लाइकोल की मात्रा काफी ज्यादा थी. गाम्बिया में हुई मौत के बाद डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भी पाया गया कि वहां भेजे गए कफ सिरप में डाइथाइलीन ग्लाइकोल और इथाइलीन ग्लाइकोल की मात्रा सुरक्षित मानकों से ‘अस्वीकार्य स्तर तक' ज्यादा थी. जम्मू-कश्मीर की घटना के बाद भारत सरकार ने इस कफ सिरप के इस्तेमाल पर रोक लगा दी और उन उत्पादों के इस्तेमाल का निर्णय लिया गया जिनमें ये दो विषैले पदार्थ डाइथाइलीन ग्लाइकोल और इथाइलीन ग्लाइकोल शामिल नहीं किए जाते. कुछ साल पहले 2016 में, दो भारतीय दवा कंपनियों पर डायबिटीज के नकली दवाओं के निर्यात का आरोप लगा था. भारत के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने फार्मास्यूटिकल प्रॉडक्ट ऑफ इंडिया लिमिटेड और वेनवरी की जांच की. इसमें पाया गया कि इन दोनों के बीच निर्माण और निर्यात को लेकर समझौता था. दोनों कंपनियां डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड की अवैध रूप से रीब्रांडिंग कर रही थीं और उन्हें बांग्लादेश, ब्राजील, मेक्सिको और पाकिस्तान को निर्यात कर रही थीं. यह अवैध गतिविधि कई वर्षों से चल रही थी.  2013 में रैनबैक्सी लैबोरेटरीज नामक कंपनी को मिलावटी दवाओं के निर्माण और वितरण के लिए दोषी ठहराया गया था. अमेरिकी न्याय विभाग के साथ एक समझौते के तहत कंपनी 50 करोड़ डॉलर की जुर्माना राशि का भुगतान करने के लिए तैयार हुई. बात यहीं तक सीमित नहीं है. पिछले साल जब दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत भी कोरोना वायरस की लहर से जूझ रहा था, तब काफी संख्या में रेमडेसिविर की नकली शीशियां ज्यादा कीमतों पर बाजार में बेची गई और निर्यात भी की गई. कोविड के इलाज के लिए इस एंटीवायरल दवा की मांग उस समय काफी ज्यादा बढ़ गई थी. दिनेश ठाकुर दवा उद्योग के क्षेत्र में बतौर अधिकारी काम कर चुके हैं. वह आगे कहते हैं, "दवा के निर्माण और वितरण से जुड़े नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिस नौकरशाही पर है वह बेकार, अक्षम और भ्रष्ट है." मेडन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड का कहना है क
2022-11-1409 minThe Anokha show2022-11-0510 minThe Anokha show
The Anokha show#Football ground tragedies #Indonesia to #Russia Factorial E10इंडोनेशिया में एक फ़ुटबॉल मैच के दौरान भड़की हिंसा और भगदड़ में अब तक 125 लोग मारे गए हैं और बड़ी संख्या में लोग घायल हैं. इसे दुनिया में हुए अब तक के सबसे बड़े स्टेडियम हादसों में से एक बताया जा रहा है. इंडोनेशियाई अधिकारियों ने पहले मरने वालों की संख्या 174 बताई थी लेकिन बाद में यह जानकारी दी गई कि 125 लोगों की मौत हुई है. फ़ुटबॉल मैच के बाद यह हिंसा तब भड़की जब मुक़ाबला हारने वाली टीम के प्रशंसक भड़क उठे और मैदान पर आ गए. मैदान से उन्हें हटाने के लिए पुलिस कर्मियों ने ताबड़तोड़ आंसू गैस के गोले दागे. अनियंत्रित भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और फिर स्टेडियम में भगदड़ मच गई. ईस्ट जावा प्रांत में अरेमा एफ़सी और पर्सेबाया सुरबाया के बीच मैच चल रहा था. अरेमा एफ़सी को 2-3 से हारता देख उसके प्रशंसक मैदान में घुसने लगे. समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक, इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के पुलिस प्रमुख निको अफ़िन्टा ने बताया कि अपनी टीम को मैच हारता देख कुछ लोग फ़ुटबॉल पिच की ओर भागे और उन्हें रोकने के प्रयास के दौरान हालात बेकाबू हुए. उन्होंने कहा, "स्टेडियम में मारपीट और अफरा-तफरी थी. 34 लोगों की मौत स्टेडियम में हुई है जबकि बाकी लोगों की मौत अस्पताल में हुई. मरने वालों में दो पुलिसकर्मी भी हैं." सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम के कई वीडियो शेयर किए जा चुके हैं. प्रत्यक्षदर्शी ने क्या देखा? इस मैच को देख रहे 21 साल के मुहम्मद दिपो मौलाना ने बीबीसी इंडोनेशिया को बताया कि मैच के बाद अरेमा के कुछ फैन्स घरेलू टीम के खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ अपना विरोध जताते हुए मैदान में उतर गए जिन्हें पुलिस ने तुरंत रोका और उनकी 'पिटाई' की. "इसके बाद कुछ और दर्शक विरोध में मैदान पर उतर गए और फिर पूरे स्टेडियम में तनाव का माहौल पैदा हो गया. फिर पुलिस के जवानों की संख्या वहां बढ़ी. वे शील्ड और कुत्तों के साथ वहां आए." दिपो बताते हैं कि उन्होंने स्टेडियम में दर्शकों पर छोड़े जा रहे कम से कम 20 आंसू गैस के गोले की आवाज़ें सुनीं. वे कहते हैं, "ये बहुत सारे गोले थे जो बार बार दागे जा रहे थे. उनकी आवाज़ लगातार और तेज़ी से आ रही थी. आवाज़ वाकई बहुत तेज़ थी और उन सब गोलों को स्टेडियम में दर्शकों पर चलाया जा रहा था." प्रत्यक्षदर्शी दिपो ने बताया, "स्टेडियम से बाहर निकलने की कोशिश में लोग अस्त-व्यस्त और घबराए हुए थे, उनका दम घुट रहा था. वहां कई ऐसे बच्चे और बूढ़े लोग मौजूद थे जिन पर आंसू गैस का असर साफ़ देखा जा सकता था." एमनेस्टी और फ़ीफ़ा ने क्या कहा? एमनेस्टी इंटरनैशनल इंडोनेशिया के कार्यकारी निदेशक उस्मान हामिद ने इस घटना पर दुख प्रकट करते हुए इस मामले के बाद पुलिस से भी आग्रह किया. उन्होंने कहा, "हम पुलिस से आंसू गैस और अन्य कम घातक हथियारों के उपयोग पर अपनी नीतियों की समीक्षा की अपील करते हैं, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि इस तरह की दिल दहला देने वाली घटना फिर कभी न हो." फ़ुटबॉल की अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्था फ़ीफ़ा ने कहा है कि किसी मैच में अनियंत्रित भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को गैस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. फ़ीफ़ा के अध्यक्ष गियानी इन्फैंटिनो ने कहा, "यह फ़ुटबॉल से जुड़े सभी के लिए काला दिन है और यह हादसा समझ से परे है. मैं इस दुखद हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों और दोस्तों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं." इंडोनेशिया की पुलिस के मुताबिक़ ईस्ट जावा में एक फ़ुटबॉल मैच के दौरान मची भगदड़ में कम से कम 125 लोग मारे गए हैं. ये पहला मौका नहीं है जब किसी फ़ुटबॉल मैदान में भगदड़ हुई है या कोई बड़ा हादसा हुआ है. एक नज़र हाल के दशकों के बड़े फ़ुटबॉल हादसों पर बीबीसी हिंदी कैमरून, जनवरी 2022 कैमरून ने इस साल 'अफ़्रीका कप ऑफ़ नेशंस' की मेज़बानी की थी. अंतिम-16 मुक़ाबले में कैमरून और कोमोरोज़ की टीमें आमने-सामने थीं. इस मैच के दौरान हुई भगदड़ में आठ लोग मारे गए थे और 38 घायल हुए थे.
2022-10-2908 minThe Anokha show
The Anokha show#5G Start in #INDIA Factorial E9प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भारत में 5जी मोबाइल इंटरनेट सेवा की शुरुआत कर दी है. इसी के साथ भारत में बेहद तेज़ मोबाइल इंटरनेट युग की शुरुआत भी हो गई है. 5जी सेवा लॉन्च करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत सरकार का मक़सद सभी भारतीयों को इंटरनेट सेवा मुहैया कराना है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "अब भारत में इस सेवा की शुरुआत हो गई है और हर भारतीय तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचने में अब बहुत वक़्त नहीं लगेगा." प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तकनीक को सिर्फ़ वॉयस कॉल या वीडियो देखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि इससे नई क्रांति होनी चाहिए. उद्योगपति मुकेश अंबानी ने कहा है कि रिलायंस जियो की 5जी सेवाएं दिसंबर 2023 तक समूचे भारत में उपलब्ध होंगी. वहीं भारती एयरटेल के सुनील मित्तल ने कहा है कि 1 अक्तूबर 2022 से एयरटेल 5जी सेवाएं शुरू कर रही है और मार्च 2024 तक ये समूचे भारत में उपलब्ध होंगी. पहले चरण में भारत के आठ शहरों- अहमदाबाद, बैंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गांधीनगर, गुरुग्राम और हैदराबाद में 5जी सेवाएं शुरू की जाएंगी. भारती एयरटेल का कहना है कि देश के सभी शहरी इलाक़ों में मार्च 2023 तक उसकी 5जी सेवाएं शुरू हो जाएंगी. भारत के सूचना मंत्रालय के मुताबिक 2035 तक देश की अर्थव्यवस्था पर 5जी का असर 450 अरब डॉलर तक होगा. 5जी कनेक्टिविटी के साथ डिवाइस 10 जीबी प्रति सेकंड की इंटरनेट स्पीड हासिल कर सकेंगे. अभी 4जी नेटवर्क में ये अधिकतम 100 एमबीपीएस प्रति सेकंड होती है. 'एरिक्सन कंज़्यूमर लैब' के मुताबिक भारत में क़रीब दस करोड़ मोबाइल उपभोक्ता ऐसे हैं जो 5जी से जुड़ने के लिए तैयार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक इन उपभोक्ताओं के पास 5जी रेडी स्मार्टफ़ोन हैं और ये अगले 12 महीनों के भीतर तेज़ इंटरनेट स्पीड से जुड़ना चाहते हैं. इस साल की दूसरी तिमाही के दौरान किए गए इस शोध में शहरी उपभोक्ताओं के विचार शामिल किए गए हैं. शोध के मुताबिक 5जी को लेकर तैयारी भारत में दुनिया में सर्वाधिक नज़र आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के उपभोक्ताओं में 5जी नेटवर्क पर जाने की इच्छा ब्रिटेन या अमेरिका जैसे एडवांस मार्केट के मुक़ाबले लगभग दोगुनी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत सरकार हर नागरिक तक तेज़ स्पीड इंटरनेट पहुंचाना चाहती है. भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी जियो का कहना है कि वो 2023 के अंत तक पूरे देश में 5जी नेटवर्क पहुंचा देगी. वहीं भारती एयरटेल ने मार्च 2024 तक देशभर में 5जी पहुंचाने का ऐलान किया है. लेकिन अभी भी भारत में मौजूदा 4जी नेटवर्क में भी कई जगह डॉर्क स्पॉट होते हैं. ऐसे में सवाल यही है कि क्या भारत में 5जी नेटवर्क वास्तव में आम लोगों तक पहुंच पाएगा? महेश उप्पल कहते हैं, "अगर 4जी में दिक्कतें हैं तो 5जी में भी ज़रूर होंगी क्योंकि 5जी के लिए और भी घना नेटवर्क बिछाना होगा. मुझे लगता है कि अभी ऑपरेटरों की प्राथमिकता ऐसी जगहों पर 5जी नेटवर्क विकसित करना होगा जहां उन्हें पैसा चुकाने वाले ग्राहक मिल सकें. हो सकता है शुरुआत में फोकस इंडस्ट्री पर ही रहे. आम लोगों तक पहुंचने में इसे अभी और वक़्त लग सकता है.
2022-10-1413 minThe Anokha show
The Anokha showA Political Chase #CBI and #Opposition Factorial E8बीजेपी और कांग्रेस एक दूसरे पर सीबीआई समेत दूसरी केंद्रीय जांच एजेंसियों का ग़लत ढंग से इस्तेमाल करने का आरोप लगाते रहे हैं. पिछले 18 सालों में बीजेपी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधनों के सत्ता में रहते हुए सीबीआई ने लगभग 200 विपक्षी नेताओं पर मामले दर्ज किए हैं. लेकिन सवाल उठता है कि किस गठबंधन के दौरान कितने विपक्षी नेता सीबीआई के घेरे में आए. अंग्रेजी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल में सामने आया है कि यूपीए के दौर में सीबीआई के घेर में आए नेताओं में जहाँ लगभग 60 फीसद विपक्ष के थे, वहीं एनडीए के दौर में ये आँकड़ा बढ़कर 95 फीसद हो गया है. कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए के 10 वर्षों (2004-2014) के दौरान, कम से कम 72 नेता सीबीआई जांच के दायरे में आए हैं और उनमें से 43 (60 प्रतिशत) नेता विपक्ष से थे. भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए-द्वितीय के आठ वर्षों के शासन में, विपक्ष की सक्रियता घटने के बावजूद कम से कम 124 प्रमुख नेताओं को सीबीआई जांच का सामना करना पड़ा है और उनमें से 118 विपक्ष से हैं - यानी 95 प्रतिशत. Express Investigation An investigation by The Indian Express reveals that in the span of 18 years, under the governments of the Congress and BJP, close to 200 key politicians were booked, arrested, raided or questioned by the CBI -- of these, over 80 per cent have been from the ranks of the Opposition. 🔴 The trend has got sharply more pronounced since the NDA took charge in 2014.   🔴 Under the Congress-led UPA’s 10 years at the helm (2004-2014), 60 per cent of the 72 political leaders who came under the CBI scanner were from the Opposition. Whereas, under the BJP-led NDA-II’s eight years in power so far, at least 95 per cent of the 124 leaders who have faced CBI probes are from the Opposition.   🔴 Take a look at the full list of names under the CBI scanner during UPA (2004-2014) and NDA (2014-present) here.   🔴 To know more about the CBI’s uneasy history, doubts over its credibility and its struggle to fix processes, click here.   Meanwhile, West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee said Monday that she believed Prime Minister Narendra Modi was not behind the alleged misuse of CBI and ED — that was the handiwork of some BJP leaders.
2022-10-0110 minThe Anokha show2022-09-2410 minThe Anokha show
The Anokha showNDTVVS ADANI SAGA क्या बिक गया एनडीटीवी? Factlorial E6नमस्कार। फैक्टोरियल के एक और एपिसोड के साथ हम आपके समक्ष हाजिर है। आज बातें कैसे टीवी चैनल के करेंगे जो हमेशा सरकार की आलोचना करता है और उससे कठिन सवाल पूछता रहता है। कुछ दिन पहले ही एक पूंजीपति ने इसको खरीदने की कोशिश की है या खरीद लिया है। तो आइए इस वीडियो में जानते हैं कब कैसे और क्या हुआ है इस टीवी चैनल के साथ। एशिया के सबसे रईस शख़्स गौतम अडानी के नियंत्रण वाले अडानी ग्रुप ने मीडिया कंपनी एनडीटीवी में अप्रत्यक्ष रूप से 29.18 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया है. कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज़, एनएसई को बताया है कि वह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी और हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र भी लाएगी. यानी कुल मिलाकर अडानी समूह का इरादा एनडीटीवी में मालिकाना हिस्सेदारी हासिल करने का है. अगर अडानी का ओपन ऑफ़र कामयाब रहा तो एनडीटीवी में उसकी कुल हिस्सेदारी 55 फ़ीसदी से अधिक हो जाएगी. हालाँकि एनडीटीवी प्रबंधन ने अडानी समूह के इस क़दम पर हैरानी जताई है और कहा है कि उसे इस डील के बारे में कुछ भी पता नहीं था. कैसे हुई अडानी की एंट्री? अडानी ने जिस तरह से एक अनजान सी कंपनी के ज़रिये एनडीटीवी में हिस्सा ख़रीदा उसे जानकार 'होस्टाइल टेकओवर' यानी प्रबंधन की इच्छा के विरुद्ध कंपनी पर क़ब्ज़े की कोशिश मान रहे हैं. दरअसल, मंगलवार को अडानी ग्रुप ने एक्सचेंज को बताया कि उसने विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड यानी वीसीपीएल को ख़रीद लिया है. अडानी ने 100 फ़ीसदी हिस्सा तक़रीबन 114 करोड़ रुपये में ख़रीदा. एनडीटीवी ने शेयर क्यों रखे गिरवी? कोरोना वायरस दरअसल, प्रणॉय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय एनडीटीवी के संस्थापक और प्रोमोटर्स हैं. साल 2008-09 में उन्होंने आरआरपीआर (राधिका रॉय प्रणॉय रॉय) होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के ज़रिये वीसीपीएल से क़र्ज़ लिया था. इस क़र्ज़ के बदले वीसीपीएल को 29.18 फ़ीसदी रेहन में दिए गए थे. साथ ही ये विकल्प भी दिया गया था कि क़र्ज़ न चुका पाने की स्थिति में वे इन वाउचर्स का 99.5 फ़ीसदी हिस्सा इक्विटी में बदल सकते हैं. ये क़र्ज़ 10 साल के लिए लिया गया था और इसकी अवधि 2019 में ख़त्म हो गई थी. लेकिन आरआरपीआर ने लिया गया क़र्ज़ नहीं चुकाया था. अडानी का मालिकाना हक़ पाने का इरादा कोरोना वायरस वीसीपीएल के ज़रिये एनडीटीवी में 29 फ़ीसदी से अधिक हिस्सा लेने के बाद गौतम अडानी ने ये बताने में जरा भी देर नहीं की कि वो एनडीटीवी में मालिकाना हक हासिल करने का इरादा रखते हैं. एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक़, अडानी समूह एनडीटीवी में 26 फ़ीसदी हिस्सेदारी और ख़रीदेगा. यानी कुल मिलाकर उसका लक्ष्य एनडीटीवी में 55 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदना है. अडानी समूह ये 26 फ़ीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी ओपन ऑफ़र के ज़रिये खरीदेगा. समूह की तीन कंपनियां एएमएनएल और अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड ओपन ऑफ़र में हिस्सा ख़रीदेंगी. ये ओपन ऑफ़र 294 रुपये प्रति शेयर के भाव पर होगा, जो कि शेयर की मौजूदा क़ीमत से क़रीब 20 फ़ीसदी कम है. मंगलवार को एनडीटीवी का शेयर 366 रुपये पर बंद हुआ था. यानी 26 फ़ीसदी की अतिरिक्त हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए अडानी समूह 493 करोड़ रुपये ख़र्च करेगा. क्या होता है ओपन ऑफ़र? कोरोना वायरस शेयर बाज़ार की नियामक संस्था सेबी के नियमों के मुताबिक़, देश में लिस्टेड किसी भी कंपनी जिसके पास 25 फ़ीसदी या उससे ज़्यादा शेयर हैं उसे और हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए ओपन ऑफ़र लाना अनिवार्य होता है जिससे कंपनी के माइनॉरिटी शेयर होल्डर पहले से तय क़ीमत पर अपने शेयर अपनी मर्ज़ी से नए निवेशक को बेच सकें. एनडीटीवी की क्या है आपत्ति? कोरोना वायरस एनडीटीवी ने एक्सचेंज को बताया कि वीसीपीएल ने इस संबंध में उसे कोई जानकारी नहीं दी. एनडीटीवी ने बताया, "एनडीटीवी के संस्थापक और कंपनी ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि वीसीपीएल ने क़र्ज़ को इक्विटी में बदलने के अधिकार का इस्तेमाल हमसे बातचीत और हमारी सहमति के बिना लिया गया है. हमें इस क़दम की जानकारी आज ही मिली है. हमने कल ही एक्सचेंज को बताया था कि संस्थापकों की हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं है." कंपनी का यह भी कहना है कि वो आगे की प्रक्रिया पर जानकारी जुटा रही है और उसमें क़ानूनी या रेगुलेटरी विकल्प भी शामिल हो सकते हैं. अब किसके पास कितनी हिस्सेदारी? कोरोना वायरस एनडीटीवी के प्रमोटर्स प्रणॉय रॉय के नाम कंपनी में 15.94 फ़ीसदी हिस्सेदारी है, जबकि उनकी पत्नी और राधिका रॉय का कंपनी में 16.32 फ़ीसदी हिस्सा है. प्रणॉय और राधिका ही आरआरपीआर के प्रोमोटर्स थे, इस कंपनी के पास एनडीटीवी के 29.18 फ़ीसदी शेयर थे. रीटेल निवेशकों के पास कंपनी के 12.57 फ़ीसदी शेयर है
2022-09-0709 minThe Anokha show
The Anokha showJAIL FACTS- जेल में बंद कितने विचाराधीन कैदी? Factorial E5नमस्कार आज हम आपको एक यात्रा पर लेकर चल रहे हैं। यह वह यात्रा है जहां आप जाना तो नहीं चाहेंगे लेकिन आज के वक्त में बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं। हम बात कर रहे हैं देश की नई धरोहर जेल की। जी हां आज आप यहां बड़ी आसानी से पहुंच सकते हैं बस आपको करना इतना है क्या आपको सरकार की आलोचना करनी।। उसके बाद आप इसके साक्षात दर्शन कर सकते हैं। तो चलिए आज की वीडियो में हम आपको आंकड़ों के माध्यम से जेल की यात्रा कर आते हैं। In this episode we are going to talk about how many people are still or haven't face the trail despite being in jail for decades. Prison is known for convicts who might have done horrible crimes but sometimes that's not the case always. There are many who have been put behind bars and they have not given a trail in courts. एनसीआरबी रिपोर्ट 2022 देश में साल 2020 तक कुल कैदी 4.8 300000 विदेशी कैदी 4926 दोषी करार कैदी 1.11 लाख / 23.04% विचाराधीन कैदी 3.6 800000  76.17% पुरुष 96 परसेंट महिलाएं 3.98 परसेंट ट्रांसजेंडर 0.01 परसेंट टॉप फ्री राज्य उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश राज्य अनुसार कुल कैदी उत्तर प्रदेश 1.06 लाख/ 22.0 1% बिहार 51849  / 10.07 परसेंट मध्य प्रदेश 45456/ 9.4 परसेंट राज्यों में दोषी करार कैदी उत्तर प्रदेश ट्वेंटी सिक्स थाउजेंड सिक्स हंड्रेड 7 बटा 23.09 परसेंट बिहार 13641 बटा 12.02 परसेंट मध्य प्रदेश 7730 बटा 6.9 परसेंट उम्र अनुसार दोषी करार कैदी 30 से 35 साल 55563 बटा 49.09 परसेंट  18 से 30 साल 31935 बटा 28.7 परसेंट 50 साल से ऊपर 23856 बटा 21.4 परसेंट राज्यों में विचाराधीन कैदी उत्तर प्रदेश 80268 बटा 21.8 परसेंट बिहार 44113 बटा 12 परसेंट मध्य प्रदेश  31695 बटा 8.6 परसेंट उम्र अनुसार विचाराधीन कैदी 18 से 30 साल 1.79 लाख बटा 48.8 परसेंट 30 से 35 साल  1.49 लाख बटा 40.6 परसेंट 50 साल से ऊपर 49196 बटा 10.6 परसेंट
2022-09-0103 minThe Anokha show2022-08-2810 minThe Anokha show2022-08-2714 minThe Anokha show2022-08-2611 minThe Anokha show2022-08-2505 minThe Anokha show2022-04-2315 minThe Anokha show2022-03-0316 minThe Anokha show2022-02-0313 minThe Anokha show2022-01-2715 minThe Anokha show2022-01-1319 minThe Anokha show2022-01-0419 minThe Anokha show
The Anokha showशान का ढिंढोरा।। The Anokha Show E29नमस्कार अनोखा शो के एक और एपिसोड में आपका स्वागत है। आज के एपिसोड में आप देखेंगे फेसबुक के मुखिया जुकरबर्ग की गिरती शान और मध्यप्रदेश में एक युवा द्वारा फैलाई गई झूठी शान का ढिंढोरा इसके अलावा आप मिलेंगे एक ऐसे कुत्ते से जो टर्की में शानदार तरीके से अकेले ही घूम रहा है। इसके बाद आप जानेंगे देश की शान में बोले गए बेहतरीन शब्दों को जो कि आपका दिल और दिमाग दोनों शानदार कर देंगे। हमेशा की तरह हमारे दो स्तंभ रिकॉर्ड और रिपोर्ट भी आपको मिलेंगे। chapter head 00:00- intro 00:23- Guinness Book of World Record 01:10- Report card 02:27- Facebook3 03:31- Iran 04:44- Air Force 05:50- Turky 06:40- Petrol Tax 07:52- uneducated 08:52- Free Water 10:00- Modi Please news article world oldest man https://www.timesnownews.com/amp/the-buzz/article/guinness-world-records-certifies-112-year-old-great-grandfather-from-spain-as-worlds-oldest-living-man/819721?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts चुनाव आयोग https://repository.inshorts.com/articles/en/PTI/6e16b7ee-8cfc-4912-a236-2479960466b0?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts फेसबुक के मुखिया https://www.bloombergquint.com/onweb/zuckerberg-loses-7-billion-in-hours-as-facebook-plunges Iran TV censorship https://www.timesnownews.com/amp/the-buzz/article/women-banned-from-eating-pizza-men-to-not-serve-tea-to-ladies-under-bizarre-tv-censorship-rules-in-iran/822109?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts ढिंढोरा https://repository.inshorts.com/articles/en/PTI/0a28f8e6-185e-4f8b-b730-570abc0371e6?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts घुमक्कड़ कुत्ता https://www.reuters.com/world/middle-east/wandering-dog-is-istanbul-commuters-best-friend-2021-10-06/?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts रामेश्वर तेली https://mobile.twitter.com/ANI/status/1447560618433675265?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts अमित शाह . https://indianexpress.com/article/cities/delhi/uneducated-people-burden-india-amit-shah-7564730/lite/?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts मल्टीप्लेक्स . https://indianexpress.com/article/cities...
2021-12-3111 minThe Anokha show
The Anokha showSahi Seekho Sach Seekho ।। The Anokha Show E28हफ्ते का ओवर हुआ वेट, लो आ गया एपिसोड 28। बीते हफ्ते की बात करें तो वह सांसो के लिए काफी भारी रहा। सबसे पहले #Lakhimpurkheri में 4 #किसान एक मीडिया पर्सन सहित 9 लोगों की सांसो को रौंद दिया गया। हम यह भी कह सकते हैं कि #Bollywood के सलमान खान के बाद अब हमें #पॉलिटिक्स का सलमान खान भी मिल गया। इसके बाद बीते सोमवार हमारी और आपकी हालत मुन्ना भाई एमबीबीएस के आनंद बनर्जी ऐसी खो गई थी जब #Facebook, #WhatsApp, #Instagram बंद हो गए थे। 6 घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद इसे रिस्टोर किया जा सका। अब आप इसे युद्धस्तर का ऑपरेशन भी कह सकते हैं या मेडिकल स्तर का भी इसमें मगर सबसे ज्यादा नुकसान व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के टीचरों और उनके स्टूडेंट का हुआ। इन दोनों के बाद भिंडोरा पेपर्स ने देश के 300 से अधिक सेलिब्रिटी की सांसे अटका दी। इसमें सचिन तेंदुलकर का नाम भी शामिल है इसे जानने के बाद ही रुक सोच रहे होंगे कि इतनी प्राइवेसी और सिक्योरिटी के बाद भी नाम आ जाता है सरकार ने इसकी जांच के आदेश दे दिए है Pegasus के अभी भी नहीं दिए हैं अब कुछ सीख की बात कर लेते हैं और यह सीख है #France के राष्ट्रपति #Macron के लिए, अब भाई उनके साथ इतनी अजब गजब की चीजें हो जाती है कि पूछो मत कभी कोई थप्पड़ मार कर चल देता है तो कभी कोई अंडा फेंक देता है और जो लोग यह करते हैं उन्हें हद से हद 4 महीने की सजा होती है। साहब को हमारे देश के ढंकापति से कुछ सीख ले लेनी चाहिए। अब हमारे यहां #ट्विटर पर #आलोचना करने पर मेल पहुंच जाता है या अकाउंट सस्पेंड हो जाता है पोस्टर चिपका लेने पर एफ आई आर हो जाती है और #आंदोलन कर देने पर तो #UAPA और #NSA लग जाता है। बड़ी बात तो यह है कि इसमें डायरेक्ट इंटरेक्शन भी नहीं है फिर भी ऐसा हो जाता है। Macron साहब आप इतने कमजोर हैं कि आप पर जो अंडा पड़ा वह फूटा ही नहीं लेकिन अगर वह अंडा मोदी जी पर पड़ा होता तो फुट जाता क्योंकि जो भी #मोदी जी से टकराएगा वह चूर चूर हो जाएगा। अब बात करते हैं इस हफ्ते के रिकॉर्ड की तो इस बार यह रिकॉर्ड बनाया है भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीपद श्रीराम ने उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में fastest सोलो मैन साइकिलिंग रिकॉर्ड बनाया है। इस रिकॉर्ड के तहत उन्होंने 472 किलोमीटर की दूरी को 34 घंटे और 54 मिनट में पूरा कर लिया मैं शनिवार सुबह लेह से निकले थे और मनाली रविवार दोपहर तक पहुंचे इस दौरान उन्होंने पांच दरों को भी पार किया। नहीं, यह डायलॉग ही गलत है सही डायलॉग है झूठ को सच बनाकर बोलो अब आपको वह गाना तो याद ही होगा जो तुमको हो पसंद बस यही गाने को पूरा किया जा रहा है स्क्रीन पर दिख रही है तस्वीर अगर आपके व्हाट्सएप तक पहुंची है तो समझ लिया आपका सी काटा गया है। दरअसल ऐसा कोई आर्टिकल और फोटो न्यूयॉर्क टाइम्स में छापा ही नहीं गया है। मैं कुछ पॉइंट बताता हूं इससे आपको सब समझ में आ जाएगा। 1- आर्टिकल के शीर्षक में जो फॉन्ट इस्तेमाल किया गया है वह न्यूयॉर्क टाइम्स के ओरिजिनल फोंट से मैच नहीं खाता है। 2- डेट में जो सितंबर लिखा हुआ है वह गलत तरीके से लिखा गया है। 3- इस फोटो और आर्टिकल के साथ वेबसाइट का कोई ओरिजिनल लिंक भी शेयर नहीं किया जा रहा है। बाकी अब आप समझदार है। अब आप अगर यह जानना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार करना सही है या गलत तो फिर आपको एक देवी जी की कक्षा में इनरोल हो जाना चाहिए। यह देवी जी हैं मध्य प्रदेश की बीएसपी विधायक रामबाई सिंह जब यह अपनी कांस्टीट्यूएंसी में पहुंची तब ग्रामीणों ने बताया कि उनके साथ पीएम आवास योजना के अंतर्गत भ्रष्टाचार किया जा रहा है। फिर क्या होना था यह गुस्सा हो गई और उन्होंने उन दोनों अधिकारियों को बुलाया जो यह भ्रष्टाचार कर रहे थे और उनको ज्ञान दिया कि देखिए आप आटे में नमक बराबर भ्रष्टाचार कर सकते हैं पर अब गरीबों से पूरी थाली नहीं छीन सकते। अब इस अद्भुत ज्ञान के बाद मेरे पास तो कोई शब्द नहीं आपके पास कुछ कहने को हो तो कमेंट कर सकते हैं। आपने अपने आसपास ऐसा देखा सुना होगा कि किसी की कोई चीज खो गई और वे उसे ढूंढने लग गया पर आपने यह नहीं देखा सुना होगा कि कोई खो गया और वह अपने ही खोज में लग गया हो। तुर्की में कुछ ऐसा ही हो गया जब एक 50 साल का व्यक्ति गायब हो गया तो उसके दोस्तों ने उसके खो जाने की सूचना दी कमाल तू अब शुरू हुआ जब रेस्क्यू टीम आई और सर्च ऑपरेशन में लगी तो पता चला जिस व्यक्ति को ढूंढा जा रहा है अपने ही सर्च ऑपरेशन में शामिल है और आवाज लगाई गई तो बोला भाई किसे ढूंढ रहे हो मैं तो यही हूं। हैरानी तो यह भी होती है कि उस सर्च टीम में उसके दोस्त भी थे और वह भी उसे पहचान नहीं पाए कि भाई अपनी खोज खुद करा रहा है। यह तो व
2021-12-2709 minThe Anokha show
The Anokha showSab Kismat Ka Kehl Hai ।। The Anokha Show E27आए हैं लेकर अगर #satire की ख्वाहिश, तो बैठ जाइए, शुरू हो रहा है एपिसोड 27। सो के द्वार आज रिपोर्ट से खोलते हैं। यह रिपोर्ट #Bloombutg ने जारी की है जिसमें उन्होंने दुनिया के सबसे अमीर परिवारों का जिक्र किया है। उस लिस्ट से पहले आपको बता दूं कि दुनिया के टॉप 25 अमीरों ने पिछले 1 साल में 22 परसेंट के उछाल के साथ अपनी झोली में कुल 1.7 ट्रिलियन डॉलर जमा कर ली है। इस लिस्ट में पहला स्थान #walmart के प्रवर्तक वॉल्टन परिवार का है जिनकी कुल संपत्ति 238.2 अरब डॉलर है। वही इस लिस्ट में छठा स्थान मुकेश अंबानी यानी कि जिओ के मालिक का है जिनकी कुल संपत्ति 93.7 अरब डॉलर है। बाकी की लिस्ट के लिए जरा आर्टिकल पढ़ लीजिए अब कुछ राज की बात कर लेते हैं यह राज उजागर किए हैं इंग्लैंड के फास्ट बॉलर स्टुअर्ट ब्रॉड ने उन्होंने कहा जब हम पिछली बार #भारत दौरे पर गए थे तब हमें 10 हफ्तों के लिए कैद कर दिया गया था हमने किसी बाहरी आदमी को नहीं देखा। वाईफाई भी स्लो था इसमें हम #Netflix भी स्ट्रीम नहीं कर पा रहे थे । लेकिन जनाब मेरा एक सवाल है आप बेइज्जती किसकी करना चाहते हैं #BCCI की या वाईफाई प्रोवाइडर कि यह क्लियर कर देते तो अच्छा होता। किस्मत हो तो ऐसी हो अब हम और आप लड़की पटाने के लिए या तो जूते चप्पल घिसते हैं या फिर जूतों से पीटते हैं मगर लड़की नहीं पटती लेकिन #japan की #princess ने एक आम आदमी को पटा लिया या यूं कहें कि आम आदमी ने राजकुमारी को पटा लिया 29 साल की इस राजकुमारी ने अपनी ही साथ पढ़ने वाले एक सहपाठी से यानी क्लासमेट से शादी करने का निर्णय लिया ह इसके लिए बकायदा राजकुमारी अपना शाही दर्जा और ₹100000000 एकमुश्त रकम भी छोड़ने के लिए तैयार है। 2017 में राजकुमारी ने सगाई की बात कही थी पर आपको तो पता ही है कुछ पारिवारिक कारण हो जाते हैं जिसके चलते यह बात टल गई। अब सुनने में आ रहा है कि# #october में शादी की डेट आ सकती है और उसके बाद यह शाही जोड़ा $USA में रहेगा मेरा मतलब नॉन शाही जोड़ा अब बात कर लेते हैं मुंह से जहर उगलने वाली मैगजीन के बारे में इसका नाम है पांचजन्य जिसे #RSS ने जन्म दिया है। पहले इन्होंने #Infosys को #Antinational कहां और अब #Amazon को ईस्ट इंडिया कंपनी 2.0 कह दिया है। मैगजीन ने आगे जहर उगलते हुए कहा है कि amazon-in नेदेश की अनुकूल नीतियों के अनुसार काम करने के लिए घूस दी है मगर magazine यह बताना मुनासिब नहीं समझती कि यह घूस मांगी गई है या इन्होंने खुद भी है। अब सवाल अगर मांगी गई है तो किसने मांगी है और अगर इन्होंने खुद दी है तो जिस ने ली उसने शिकायत क्यों नहीं की पर यह मैगजीन बड़ी सफाई से इन सवालों पर पर्दा डाल देती है बस इतना ही नहीं है अभी तो कहानी और बाकी है मैगजीन ने अमेजॉन प्राइम पर दिखाए जाने वाली web series और टीवी सीरियल को भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया है अब मेरा एक सवाल और एक सुझाव है सवाल यह है कि अगर यह आपकी भारतीय संस्कृति के खिलाफ है तो शायद दूसरे धर्म को नीचा दिखाना आप की संस्कृति की शान होगा आप सुझाव है कि बार-बार की चिकचिक से अच्छा है कि आप एक बार में ही सभी धंधा को बेकार बता दो और कह दो कि सिर्फ धर्म और पाखंड का धंधा ही सही है बोलो जय श्री राम यह खबर थोड़ी इमोशनल है इसे पढ़ते वक्त में रो पड़ा था एक 13 साल का डिसएबल बच्चा है जिसका नाम रिस पोर्टर है । इसे फुटबॉल से प्यार है और उसने f#ootball से जुड़ी अपनी कुछ वीडियोस को टिक टॉक पर शेयर किया जहां पर उसे बुली किया गया और गालियां दी गई। इस 13 साल के युवा बच्चे ने स्काई स्पोर्ट से बात करते हुए कहा कि मैं कमेंट पढ़कर दुखी हुआ पर मैंने कोशिश की इससे उबरने की यह बच्चा उस वक्त वायरल हुआ जब #fullhem ने अपने गोल का सेलिब्रेशन stand में बैठे इसी बच्चे के साथ किया जिसे एक और एक स्पैक्टेटर ने वीडियो भी बना दिया जिसको ट्विटर पर 24 घंटे में 2 मिलीयन व्यूज मिले इतना ही नहीं इस क्लब ने इस बच्चे का नाम फर्स्ट टीम स्क्वाड में भी फुल प्रोफाइल के साथ शेयर किया और गोलकीपर के साथ इसकी ट्रेनिंग भी करवाई यह खबर दो चेहरे प्रस्तुत करती हैं पहला जो लोगों के चारों पर दुख देखना चाहते हैं और दूसरा जो उसी चेहरे पर मुस्कान देखना चाहते हैं। एक बार फिर परंपरा को आगे बढ़ाते हुए धर्म की बात करते हैं यानी कि #cricket की बात करते हैं। #India vs #Australia महिलाओं के बीच सीरीज हो रही है जहां भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही है पहले 3odi हुए अब एकमात्र पिंक डे नाइट टेस्ट और 7 अक्टूबर से तीन टी-20 मैच की सीरीज बाकी है भारत ओडीआई सीरीज तो 2-1 से हार चुका है पर उसने तीसरा और अंतिम मैच जीतकर ऑस्ट्रेलिया के लगातार 26 मैच जीतने के सिलस
2021-12-2413 minThe Anokha show2021-12-2111 minThe Anokha show2021-12-1910 minThe Anokha show2021-12-1709 minThe Anokha show2021-12-1513 minThe Anokha show2021-10-2711 minThe Anokha show2021-10-2612 minThe Anokha show2021-10-1212 minThe Anokha show2021-08-0616 minThe Anokha show2021-07-3114 minThe Anokha show2021-07-1912 minThe Anokha show2021-07-1214 minThe Anokha show2021-07-0618 minThe Anokha show2021-06-2918 minThe Anokha show2021-06-2215 minThe Anokha show2021-06-1415 minThe Anokha show2021-06-0917 minThe Anokha show2021-06-0114 minThe Anokha show2021-05-2417 minThe Anokha show2021-05-1714 minThe Anokha show2021-05-1014 minThe Anokha show2021-05-0317 minThe Anokha show2021-04-2628 minThe Anokha show2021-04-1910 minThe Anokha show2021-04-1216 minThe Anokha show2021-04-0515 minThe Anokha show2021-03-2910 min