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Prof. Ekant Veer

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The Alpha People2026-01-281h 01The Alpha People2026-01-271h 02Our Changing World2026-01-1316 minCheeranjivi Parashuram- RosePod Play2025-09-1507 minCheeranjivi Parashuram- RosePod Play2025-09-1212 minBest of Business2025-08-1402 minNot-So-Common Common Sense2025-07-1533 minRaising the Bar Christchurch 20232025-06-1159 minThrift2025-05-1216 minThrift2025-05-0515 minDecult Talks - Breaking the Silence on Cultic Harm2025-05-0355 minPratidin Ek Kavita
Pratidin Ek KavitaMere Ekant Ka Pravesh Dwar | Nirmala Putulमेरे एकांत का प्रवेश-द्वार | निर्मला पुतुलयह कविता नहींमेरे एकांत का प्रवेश-द्वार हैयहीं आकर सुस्ताती हूँ मैंटिकाती हूँ यहीं अपना सिरज़िंदगी की भाग-दौड़ से थक-हारकरजब लौटती हूँ यहाँआहिस्ता से खुलता हैइसके भीतर एक द्वारजिसमें धीरे से प्रवेश करती मैंतलाशती हूँ अपना निजी एकांतयहीं मैं वह होती हूँजिसे होने के लिए मुझेकोई प्रयास नहीं करना पड़तापूरी दुनिया से छिटककरअपनी नाभि से जुड़ती हूँ यहीं!मेरे एकांत में देवता नहीं होतेन ही उनके लिएकोई प्रार्थना होती है मेरे पासदूर तक पसरी रेतजीवन की बाधाएँकुछ स्वप्न औरप्राचीन कथाएँ होती हैंहोती है—एक धुँधली-सी धुनहर देश-काल में जिसेअपनी-अपनी तरह से पकड़तीस्त्रियाँ बाहर आती हैं अपने आपसेमैं कविता नहींशब्दों में ख़ुद को रचते देखती हूँअपनी काया से बाहर खड़ी होकरअपना होना!
2025-04-2902 minMật ngọt (Nghe murli mỗi ngày)2025-02-0525 minSugs Talks2025-01-0604 minMoving Stories2024-08-2132 minDeep Electronics2024-06-0707 minThrift2024-05-2013 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-05-1016 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-05-0403 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-04-2802 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-04-2249 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-04-1606 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-04-1014 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-04-0412 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-03-2910 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-03-2312 minRuffells Ad Break2024-03-1844 minThe Zac Anesbury Show: Your Marketing Podcast2024-03-172h 06Pratidin Ek Kavita
Pratidin Ek KavitaKavi Ki Atmahatya | Devansh Ekantकवि की आत्महत्या | देवांश एकांत अभिनेता अभिनय करते-करते मृत्यु का मंचन करने लगता हैआप उन्मत्त होते हैं अभिनय देखपीटना चाहते हैं तालियाँ मगर इस बार वह नही उठताक्योंकि जीवन के रंगमंच में एक ही ‘कट-इट’ होता हैकोई हँसते-हँसाते शहर के पुल से छलाँग लगा देता है और तब पिता के साथ नवका विहार में आया लड़का जान पाता हैपानी की सतह पर मछलियाँ ही नहींआदमी भी तैरता हैहर वजन को अपनी हद में रखने वाला वैज्ञानिकआत्मा के ख़ालीपन से दबकर मर जाता है,कुछ घरों में उजाला सूरज से नही कई दिनों बाद गरम रोटी की चमक से होता है सुबह रात के जाने से नही मजूर बाप के आधी रात लौटने से होती है माफ़ कीजिए ये दरअसल घर नही हैंसंग्रहालयों में रखे चित्र की व्याख्या हैआपने यह चित्र जीवंत देखा क्या ?मेरी आँखों का कालापन शायद राख है काफ़्का के उन पत्रों कीजो उसने मिलेना को भेजने से पहलेअपनी हीनता के बोध में जला डाले होंगेरात्रि के झींगुर नाद के मध्यजब तुम कर रहे होगे अपनी कविताओं में कांट छाँटतुम अचानक पाओगे कि मुक्ति का साधक मुक्तिबोधसबसे अधिक बंधा था बेड़ियों में ब्रह्मराक्षस आज भी करता है नरक में उसका पीछादेह में रक्त ही नही प्रतीक्षा भी दौड़ती है रक्तचाप से अधिक प्रतीक्षा झँझोड़ती है यह मैंने ड्योढ़ी पे बैठे उस दरवेश से जानाबह गयी जिसकी प्रेमिका गाँव की बाढ़ में जल्द लौटने का वादा करभीतर की एक-एक नस थरथरा उठती है यह सोचकर कि एक दिन नही होगी माँ, नहीं होंगे पितातब कौन पुकारेगा बेटातब कौन लेगा भूख का संज्ञानयह सोचते-सोचतेहर रात मेरे भीतर का कविकर लेता है आत्महत्या।
2024-01-2802 minMeditate with Gurudev - The Art of Living2024-01-1428 minDevangana2024-01-1011 minKisse or कहानी2024-01-0205 minPratidin Ek Kavita
Pratidin Ek KavitaLok Jagat Ka Ladka | Devansh Ekantलोक जगत का लड़का | देवांश एकांतलगभग देहात और लगभग बीहड़ के बीच सेवह लगभग क़स्बा आया थाऔर उसे यह क़स्बालगभग से आगे बढ़पूरा का पूरा शहर लगा थाउसकी आँखों मेंबल्ब का प्रतिबिम्बअसल रोशनी से अधिक जगमगायामेज़ पर रखा कम्प्यूटर देख स्टीव जॉब्सया बिल गेट्स भी इतना उत्साहित न हुए होंगेजितना वह हो गया था न्योछावरशीशे पर अक्षरों और चित्रों को उड़ते देखगाड़ी के इंजन की ध्वनि सुनउसके भीतर की प्रणालियाँ चल पड़तींवह दौड़ता हुआ गेट पर टंग जाताजब तक गाड़ी न जाती, वह भी न जाताऔर समूचे दृश्य मेंवह खुद एक गेट हो जाताजीवन के दो वर्गों के बीचबोली में पत्थर और पहनावे से धूसरउसकी आँखों में अचरज नदी की तरह बहतामिट्टी के मकान से आया वह मिट्टी सा लड़काहवा की नींव में जड़ों सा फैल जाताउसकी हँसी मेंपगडंडियों पर घूमते टायर जैसा असंतुलन थाडंडे की मार से उड़ी गिल्ली सा उच्छल पन थाचाल में नवजात बछड़े सी फुर्ती थीबातों में अमर बेल सी जटिलतागिलहरी सी तेज़ी जवाबों मेंक़िस्सों में देहाती मसखरी थीबूढ़ों की खैनी बीड़ी थीकिशोरों की चुहल थीफसलों की सिंचाई थीत्योहारों के गीत थेसमूचा जगत था आसपासउसके होने सेनहीं था तो वह स्वयं परिणतअपने उस लोक कोअपनी दुनिया की खपरैल से फाँदता आ पहुँचा थाइस दूसरी दुनिया की दहलीज़ तकजाना नही चाहता था वह वापसउसकी विनत आँखें तत्पर थींहर सम्भव कोशिश कोकरा लेते चाहे जो भी कामन भी होते वाजिब दामबस रहना था उसेतथाकथित ‘नगर’ मेंअंतिम दिन उसकी चाल मेंदिखा था अभाव सदियों कामुड़-मुड़ कर देखता रहा वहहाय जो रुक न सका !बेमन लौटी उसकी भंगिमाअब भी है मेरे भीतरदौड़ती कूदती हँसती चिल्लातीकई अबूझ प्रश्न पूछतीफिर कहीं छिप-छिप जाती ।
2023-12-2903 minPratidin Ek Kavita
Pratidin Ek KavitaVikshipt | Devansh Ekantविक्षिप्त | देवांश एकांत उनके पैदा होते हीआदमी-औरत से माँ-पिता बने युगल कीकामनाओं को ज्वर आ गयामेडिकल जाँच में ख़ारिज हुई उनकी परिपक्वताऔर मुक्त कर दिया गया उन्हें आकांक्षाओं सेजैसे बहा दी गयीं हों अस्थियाँ गंगा मेंधीरे से उन्हें पागल कहा गयाऔर तेज़ी से यह शब्द उनकी देह पररोया बन उगने लगाउनमें से कुछ को हँसने का रोग थावे ईश्वर का चुटकुला कहलायेकुछ को दृश्यों के पीछे प्रेत दिखेवे किसी तांत्रिक का परीक्षण बनेवे ताउम्र हँसते रहे, रोते रहेयंत्रणाओं का शिकार होते रहेअपनी देह के निशानों पररात-रात भर चकित रहेकमरों के अंधेरों मेंउजाले को टोहते रहेइलेक्ट्रिक शॉकहाई डोज़ की दवाइयों सेउनकी ऐंठी उँगलियों को देखउनकी माताओं की आँखों मेंमृत सपनों की काई जमा हो गयीजिसपर एक पिता फिसलकर गिरता रहाख़ुद को सम्भालते हुएअक्सर मज़ाक़ मेंउनकी खोपड़ी पर मारी गयी टीपभाग्य द्वारा चलायी गयी लाठी हैउन्हें उपेक्षित करके निकल जानाउनकी बेसर-पैर बातों पर ऊब उठनाफूलों की हत्या हैउनका हवाओं से बातें करनाऔर उसपर किसी का दया दिखानाघट रही कला को महसूस न कर पाने की असमर्थता हैमत बुलाना उन्हें पागलमैं कहता हूँ कभी मत बुलाना !किसी दूसरी दुनिया के संपर्क में डूबते उतरातेजाने कौनसी संरचना में फँसे हैं वोउनके संग हँसनाउनपर मत हँसनाउनकी विषमताओं को समझनाखुद विषम मत बननाउनकी काँपती हथेलियों से बने चित्र मेंकोई पूर्णता ढूँढने से अधिकजीवन में किए गए प्रयासों कीआवश्यक स्थिरता को तलाशनाऔर समझ जाना किचंद्रमा पर जो दाग़ हैवह उनकी पेंसिल से घिसा ग्रैफ़ाइट हैबग़ैर जिसके उस उपग्रह के छाया चित्र मेंछाया सम्भव नही ।
2023-12-2103 minThe Supreet Singh Show2023-11-251h 00Elim Church Christchurch - Burnside2023-11-1331 minKhauf Stories2023-11-0811 minKhauf Stories2023-11-0811 minKhauf Stories2023-11-0712 minKhauf Stories2023-11-0712 minSmart Talk2023-07-1150 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2023-05-0741 minElim Church Christchurch - Burnside2023-05-0332 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2023-04-2756 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2023-03-1628 minElim Church Christchurch - Burnside2022-08-2845 minElim Church Christchurch - Burnside2022-08-1536 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-07-1353 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-06-2757 minElim Church Christchurch - Burnside2022-05-2232 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-03-3146 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-03-2148 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-03-1341 minSmart Talk2022-03-0151 minNeend - Bedtime Stories in Hindi2022-02-0741 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-02-0337 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-01-2548 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-01-2436 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-01-1934 minVeerOffTrack - A Marketing and Consumer Behaviour Podcast by Prof. Ekant Veer2022-01-1646 minKirtan - Sant Shri Asharamji Bapu Kirtan2021-07-1228 minKirtan - Sant Shri Asharamji Bapu Kirtan2021-07-1128 minJapa Talks by Radheshayam Prabhu2021-03-3105 minPinkcity2020-10-1916 minTruptis Kavita2020-10-1803 minSACC India - Startup Accelerator Chamber of Commerce2020-05-1506 minWOOpodcast2020-04-2800 minDeep Ki Duniya2020-04-1101 minKirtan - Sant Shri Asharamji Bapu Kirtan2019-01-2017 minKirtan - Sant Shri Asharamji Bapu Kirtan2019-01-1917 minHeart2Heart TALK2018-08-1818 min