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Rajesh Kumar

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B2B Marketing Shepherd2025-12-1839 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2025-12-181h 02B2B Marketing Shepherd2025-12-1140 minB2B Marketing Shepherd2025-12-0436 minB2B Marketing Shepherd2025-10-3052 minB2B Marketing Shepherd2025-10-2337 minB2B Marketing Shepherd2025-10-1442 minB2B Marketing Shepherd2025-10-0647 minB2B Marketing Shepherd2025-10-0144 minThe Business of Life with Dr King2025-09-2826 minB2B Marketing Shepherd2025-09-2445 minThe Supreet Singh Show2025-08-1154 minThe Fairy BOSSmother Show2025-06-0541 minThe Supreet Singh Show2025-06-0253 minThe Supreet Singh Show2024-08-291h 18Chasing Creativity with Kiran Manral2024-08-0649 minThe CODE Construction. Design. Engineering.India\'s No.1 Construction Podcast2024-06-2808 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2023-07-131h 55Rajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2023-06-131h 13Research with NJ2023-04-161h 03Sleuth Radio: Classis Radio\'s Great Detectives2022-12-1601 minPeople Strategy Forum2022-12-1246 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2022-11-0603 mininspired energy2022-10-2448 minBeing The Change2022-09-2957 minThe Today\'s Leader Podcast2022-08-1037 minHuman Capital Leadership2022-06-2332 minఅనుదిన వాగ్దానము2022-06-2112 minBible Believers Ministries2022-06-2039 minఅనుదిన వాగ్దానము2022-06-1409 minLeadovation2022-05-3135 minThe Teamwork Advantage a Gregg Gregory Podcast2022-05-0244 minThe Workplace Communication Podcast2022-05-0241 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2022-02-2402 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi StoryMy Introductionनमस्ते मेरा नाम राजेश है। मैं भारत के जयपुर शहर में रहता हूं। मैंने मेरा पोस्ट ग्रेजुएशन 2001 में कंप्लीट करने के बाद एजुकेशन में बैचलर डिग्री प्राप्त की है। 11 साल इंश्योरेंस इंडस्ट्री में सर्व करने के बाद मैंने टीचिंग के प्रोफेशन में कदम रखा। 2016 से मैं ऑनलाइन हिंदी को एक सेकंड लैंग्वेज के रूप में स्टूडेंट्स को पढ़ा रहा हूं। मेरे स्टूडेंट्स दुनिया के हर कोने से है जिसमें मुख्यतः ब्रिटेन, अमेरिका ऑस्ट्रेलिया, हांगकांग, जापान, न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया आदि देशों से हैं। मैं यहां पर आपके लिए एक निश्चित समय अंतराल पर हिंदी पॉडकास्ट एपिसोड टेलीकास्ट करूँगा। जहां पर हिंदी सीखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। अगर आप मेरे साथ वन to वन लेसन करना चाहते हैं तो मुझे मैसेज करिए या मेरे साथ ट्रायल बुक कर सकते हैं।  Hello my name is Rajesh. I live in Jaipur city of India. I have completed my post graduation in 2001 and got bachelor degree in education. After serving in the insurance industry for 11 years, I entered the teaching profession. Since 2016 I am teaching online Hindi as a second language to students. My students are from every corner of the world, mainly from countries like UK, America, Australia, Hong Kong, Japan, New Zealand and Australia etc. I will telecast Hindi podcast episodes here for you at a fixed time interval. Where you will get a lot to learn Hindi. If you want to do one to one lesson with me then message me or you can book trial with me
2022-01-2801 minBible Believers Ministries2022-01-2620 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2021-10-111h 00Rajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2021-07-061h 09Rajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2021-06-121h 11Rajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2021-03-181h 03OnBase: Smashing Sales and Marketing Misalignments2020-12-1837 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-11-0303 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyमहाभारत की कहानी: दानवीर कर्ण | Danveer Karan Ki Kathaमहाभारत की कथा में कई महान चरित्रों का जिक्र है। उन्हीं में से एक थे दानवीर कर्ण। श्रीकृष्ण हमेशा कर्ण की दानवीरता की प्रशंसा करते थे। वहीं, अर्जुन और युधिष्ठिर भी दान-पुण्य करते रहते थे, लेकिन श्रीकृष्ण कभी उनकी प्रशंसा नहीं करते थे। एक दिन अर्जुन ने श्रीकृष्ण से इसका कारण पूछा। श्रीकृष्ण बोले, “समय आने पर वह यह साबित कर देंगे कि सबसे बड़ा दानवीर सूर्यपुत्र कर्ण है।” कुछ दिनों के बाद एक ब्राह्मण अर्जुन के महल में आया। उसने बताया कि पत्नी की मृत्यु हो गई है। उसके दाह संस्कार के लिए उन्हें चन्दन की लकड़ियों की जरूरत है। ब्राह्मण ने अर्जुन से चंदन की लकड़ी दान में मांगी। अर्जुन ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि राजकोष से चन्दन की लकड़ियों का इंतजाम किया जाए, लेकिन उस दिन न तो राजकोष में चंदन की लकड़ियां मिली और न ही पूरे राज्य में। अर्जुन ने ब्राह्मण से कहा, “आप मुझे क्षमा करें, मैं आपके लिए चंदन की लकड़ी का इंतजाम नहीं कर सका।” श्रीकृष्ण इस पूरी घटना को देख रहे थे। उन्होंने ब्राह्मण से कहा, “आपको एक जगह चंदन की लकड़ियां जरूर मिलेगी, आप मेरे साथ चलिए।” श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भी अपने साथ ले लिया। श्रीकृष्ण और अर्जुन ने ब्राह्मण का वेश बनाया और उस ब्राह्मण के साथ कर्ण के दरबार में पहुंचे। वहां भी ब्राह्मण ने कर्ण से चंदन की लकड़ी दान में मांगी। कर्ण ने अपनी मंत्री से चंदन की लकड़ी का इंतजाम करने को कहा। थोड़े समय बाद कर्ण के मंत्री ने कहा कि पूरे राज्य में कहीं चंदन की लकड़ी नहीं मिली। इस पर कर्ण ने अपने मंत्री को आदेश दिया कि उसके महल में चंदन के खंभे हैं, उन्हें तोड़कर ब्राह्मण को दान दिया जाए। मंत्री ने ऐसा ही किया। ब्राह्मण चंदन की लकड़ी लेकर अपनी पत्नी के दाह संस्कार के लिए चला गया। श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा, “देखो तुम्हारे महल के खंभों में भी चन्दन की लकड़ी लगी है, लेकिन तुमने ब्राह्मण को निराश किया। वहीं, कर्ण ने एक बार फिर अपनी दानवीरता का परिचय दिया।” कहानी से सीख दान वो नहीं जो समृद्ध स्थिति में किया जाता है, बल्कि असली दान वो है, जो अभाव होने पर भी किया जा सकता है।
2020-10-3003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyचांद पर खरगोश | The Hare On The Moon Story In Hindiबहुत समय पहले गंगा किनारे एक जंगल में चार दोस्त रहते थे, खरगोश, सियार, बंदर और ऊदबिलाव। इन सभी दोस्तों की एक ही चाहत थी, सबसे बड़ा दानवीर बनना। एक दिन चारों ने एक साथ फैसला लिया कि वो कुछ-न-कुछ ऐसा ढूंढकर लाएंगे, जिसे वो दान कर सकें। परम दान करने के लिए चारों मित्र अपने-अपने घर से निकल गए। ऊदबिलाव गंगा तट से लाल रंग की सात मछलियां लेकर आ गया। सियार दही से भरी हांडी और मांस का टुकड़ा लेकर आया। उसके बाद बंदर उछलता-कूदता बाग से आम के गुच्छे लेकर आया। दिन ढलने को था, लेकिन खरगोश को कुछ नहीं समझ आया। उसने सोचा अगर वो घास का दान करेगा, तो उसे दान का कोई लाभ नहीं मिलेगा। यह सोचते-सोचते खरगोश खाली हाथ वापस चला गया। खरगोश को खाली हाथ लौटते देख उससे तीनों मित्रों ने पूछा, “अरें! तुम क्या दान करोगे? आज ही के दिन दान करने से महादान का लाभ मिलेगा, पता है न तुम्हें।” खरगोश ने कहा, “हां, मुझे पता है, इसलिए आज मैंने खुद को दान करने का फैसला लिया है।” यह सुनकर खरगोश के सारे दोस्त हैरान हो गए। जैसे ही इस बात की खबर इंद्र देवता तक पहुंची, तो वो सीधे धरती पर आ गए। इंद्र साधु का भेष बनाकर चारों मित्रों के पास पहुंचे। पहले सियार, बंदर और ऊदबिलाव ने दान दिया। फिर खरगोश के पास इंद्र देवता पहुंचे और कहा तुम क्या दान दोगे। खरगोश ने बताया कि वो खुद को दान कर रहा है। इतना सुनते ही इंद्र देव ने वहां अपनी शक्ति से आग जलाई और खरगोश को उसके अंदर समाने के लिए कहा। खरगोश हिम्मत करके आग के अंदर घुस गया। इंद्र यह देखकर हैरान रह गए। उनके मन में हुआ कि खरगोश सही में बहुत बड़ा दानी है और इंद्र देव यह देख बहुत खुश हुए। उधर, खरगोश आग में भी सही सलामत खड़ा था। तब इंद्र देव ने कहा, “मैं तुम्हारी परीक्षा ले रहा था। यह आग मायावी है, इसलिए इससे तुम्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।” इतना कहने के बाद इंद्र देव ने खरगोश को आशीर्वाद देते हुए कहा, “तुम्हारे इस दान को पूरी दुनिया हमेशा याद करेगी। मैं तुम्हारे शरीर का निशान चांद पर बनाऊंगा।” इतना कहते ही इंद्र देव ने चांद में एक पर्वत को मसलकर खरगोश का निशान बना दिया। तब से ही मान्यता है कि चांद पर खरगोश के निशान हैं और इसी तरह चांद तक पहुंचे बिना ही, चांद पर खरगोश की छाप पहुंच गई। कहानी से सीख: किसी भी काम को करने के लिए दृढ़ शक्ति का होना जरूरी है।
2020-10-3003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyपेशावर एक्सप्रेसपेशावर एक्सप्रेस -- कृष्ण चंदर जब मैं पेशावर से चली तो मैंने छका छक इत्मिनान का सांस लिया। मेरे डिब्बों में ज़्यादा-तर हिंदू लोग बैठे हुए थे। ये लोग पेशावर से हुई मरदान से, कोहाट से, चारसदा से, ख़ैबर से, लंडी कोतल से, बन्नूँ नौशहरा से, मांसहरा से आए थे और पाकिस्तान में जानो माल को महफ़ूज़ न पाकर हिन्दोस्तान का रुख कर रहे थे, स्टेशन पर ज़बरदस्त पहरा था और फ़ौज वाले बड़ी चौकसी से काम कर रहे थे। इन लोगों को जो पाकिस्तान में पनाह गजीं और हिन्दोस्तान में शरणार्थी कहलाते थे उस वक़्त तक चैन का सांस न आया जब तक मैंने पंजाब की रूमानख़ेज़ सरज़मीन की तरफ़ क़दम न बढ़ाए, ये लोग शक्ल-ओ-सूरत से बिल्कुल पठान मालूम होते थे, गोरे चिट्टे मज़बूत हाथ पांव, सिर पर कुलाह और लुंगी, और जिस्म पर क़मीज़ और शलवार, ये लोग पश्तो में बात करते थे और कभी कभी निहायत करख़्त क़िस्म की पंजाबी में बात करते थे। उनकी हिफ़ाज़त के लिए हर डिब्बे में दो सिपाही बंदूक़ें लेकर खड़े थे। वजीह बल्लोची सिपाही अपनी पगड़ियों के अक़ब मोर के छत्तर की तरह ख़ूबसूरत तुर्रे लगाए हुए हाथ में जदीद राइफ़लें लिए हुए उन पठानों और उनके बीवी बच्चों की तरफ़ मुस्कुरा मुस्कुरा कर देख रहे थे जो एक तारीख़ी ख़ौफ़ और शर के ज़ेर-ए-असर उस सरज़मीन से भागे जा रहे थे जहां वो हज़ारों साल से रहते चले आए थे जिसकी संगलाख़ सरज़मीन से उन्होंने तवानाई हासिल की थी। जिसके बर्फ़ाब चश्मों से उन्होंने पानी पिया था। आज ये वतन यकलख़्त बेगाना हो गया था और उसने अपने मेहरबान सीने के किवाड़ उन परबंद कर दिए थे और वो एक नए देस के तपते हुए मैदानों का तसव्वुर दिल में लिए बादिल-ए-नाख़्वासता वहां से रुख़्सत हो रहे थे। इस अमर की मसर्रत ज़रूर थी कि उनकी जानें बच गई थीं। उनका बहुत सा माल-ओ-मता और उनकी बहुओं, बेटीयों, माओं और बीवीयों की आबरू महफ़ूज़ थी लेकिन उनका दिल रो रहा था और आँखें सरहद के पथरीले सीने पर यों गड़ी हुई थीं गोया उसे चीर कर अंदर घुस जाना चाहती हैं और उसके शफ़क़त भरे मामता के फ़व्वारे से पूछना चाहती हैं, बोल माँ आज किस जुर्म की पादाश में तू ने अपने बेटों को घर से निकाल दिया है। अपनी बहुओं को इस ख़ूबसूरत आँगन से महरूम कर दिया है। जहां वो कल तक सुहाग की रानियां बनी बैठी थीं। अपनी अलबेली कुँवारियों को जो अंगूर की बेल की तरह तेरी छाती से लिपट रही थीं झिंझोड़ कर अलग कर दिया है। किस लिए आज ये देस बिदेस हो गया है। मैं चलती जा रही थी और डिब्बों में बैठी हुई मख़लूक़ अपने वतन की सतह-ए-मुर्तफ़े उसके बुलंद-ओ-बाला चटानों, उसके मर्ग़-ज़ारों, उसकी शादाब वादियों, कुंजों और बाग़ों की तरफ़ यूं देख रही थी, जैसे हर जाने-पहचाने मंज़र को अपने सीने में छिपा कर ले जाना चाहती हो जैसे निगाह हर लहज़ा रुक जाये, और मुझे ऐसा मालूम हुआ कि इस अज़ीम रंज-ओ-अलम के बारे मेरे क़दम भारी हुए जा रहे हैं और रेल की पटरी मुझे जवाब दिए जा रही है। हुस्न अबदाल तक लोग यूँही मह्ज़ुं अफ़्सुर्दा यासो नकबत की तस्वीर बने रहे। हुस्न अबदाल के स्टेशन पर बहुत से सिख आए हुए थे। पंजा साहिब से लंबी लंबी किरपानें लिए चेहरों पर हवाईयां उड़ी हुई बाल बच्चे सहमे सहमे से, ऐसा मालूम होता था कि अपनी ही तलवार के घाव से ये लोग ख़ुद मर जाऐंगे। डिब्बों में बैठ कर उन लोगों ने इत्मिनान का सांस लिया और फिर दूसरे सरहद के हिंदू और सिख पठानों से गुफ़्तगु शुरू हो गई। किसी का घर-बार जल गया था कोई सिर्फ़ एक क़मीज़ और शलवार में भागा था, किसी के पांव में जूती न थी और कोई इतना होशयार था कि अपने घर की टूटी चारपाई तक उठा लाया था। जिन लोगों का वाक़ई बहुत नुक़्सान हुआ था वो लोग गुम-सुम बैठे हुए थे। ख़ामोश , चुप-चाप और जिसके पास कभी कुछ न हुआ था वो अपनी लाखों की जायदाद खोने का ग़म कर रहा था और दूसरों को अपनी फ़र्ज़ी इमारत के क़िस्से सुना सुना कर मरऊब कर रहा था और मुसलमानों को गालियां दे रहा था।
2020-10-2426 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi StoryLazy-Donkey-Story-In-Hindi आलसी गधे की कहानीकिसी गांव में एक गरीब व्यापारी अपने गधे के साथ रहा करता था। व्यापारी का घर बाजार से कुछ दूरी पर ही था। वह रोज गधे की पीठ पर सामान की बोरियां रखकर बाजार जाया करता था। व्यापारी बहुत अच्छा और दयालु इंसान था और अपने गधे का अच्छी तरह ध्यान रखता था। गधा भी अपने मालिक से बहुत प्यार करता था, लेकिन गधे की एक समस्या थी कि वह बहुत आलसी था। उसे काम करना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। उसे सिर्फ खाना और आराम करना पसंद था। एक दिन व्यापारी को पता चला कि बाजार में नमक की बहुत मांग है। उस दिन उसने सोचा कि अब वो बाजार में नमक बेचा करेंगे। जैसे ही हाट लगने का दिन आया, व्यापारी ने नमक की चार बोरियां गधे की पीठ पर लादी और उसे बाजार चलने के लिए तैयार किया। व्यापारी, गधे के आलसीपन के बारे में जानता था, इसलिए गधे के न चलने पर उसने गधे को एक-दो बार धक्का दिया और गधा चल पड़ा। नमक की बोरियां थोड़ी भारी थीं, जिस वजह से गधे के पैर कांप रहे थे और उसे चलने में मुश्किल हो रही थी। किसी तरह, गधे को धक्का देते हुए व्यापारी उसे आधे रास्ते तक ले आया। व्यापारी के घर और बाजार के बीच एक नदी पड़ती थी, जिसे पुल की मदद से पार करना पड़ता था। गधा जैसे ही नदी पार करने के लिए पुल पर चढ़ा और कुछ दूर चला, उसका पैर फिसल गया और वह नदी में गिर गया। गधे को नदी में गिरा देख, व्यापारी घबरा गया और हड़बड़ाते हुए तैरकर उसे नदी से निकालने जा पहुंचा। व्यापारी ने किसी तरह अपने गधे को नदी से बाहर निकाल लिया। जब गधा नदी से बाहर आया, तो उसने देखा कि उसकी पीठ पर लदी बोरियां हल्की हो गई हैं। सारा नमक पानी में घुल गया था और व्यापारी को आधे रास्ते से ही वापस घर लौटना पड़ा। इस वजह से व्यापारी का बहुत नुकसान हो गया, लेकिन इस घटना से आलसी गधे को बाजार तक न जाने की एक तरकीब सूझ गई थी। अगले दिन बाजार जाते समय जब पुल आया, तो गधा जानबूझकर नदी में गिर गया और उसकी पीठ पर टंगी बोरियों में रखा सारा नमक पानी में घुल गया। व्यापारी को फिर से आधे रास्ते से ही घर लौटना पड़ा। गधे ने हर दिन ऐसा करना शुरू कर दिया। इसके कारण गरीब व्यापारी को बहुत ज्यादा नुकसान होने लगा, लेकिन धीरे-धीरे व्यापारी को गधे की यह युक्ति समझ आ गई थी। एक दिन व्यापारी ने सोचा कि क्यों न गधे की पीठ पर ऐसा सामान रखा जाए जिसका वजन पानी में गिरने से दोगुना हो जाए। यह सोच कर व्यापारी ने गधे की पीठ पर रूई से भरी बोरियां बांध दी और उसे लेकर बाजार की ओर चल पड़ा। जैसे ही पुल आया, गधा रोज की तरह नदी में गिर गया, लेकिन आज उसकी पीठ पर लदा वजन कम नहीं हुआ, बल्कि और बढ़ गया। गधा इस बात को समझ नहीं पाया। ऐसा अगले दो से तीन तक होता रहा। व्यापारी गधे की पीठ पर रूई से भरी बोरी बांध देता और पानी में गिरते ही उसका वजन दोगुना हो जाता। आखिरकार गधे ने हार मान ली। गधे को अब सबक मिल चुका था। चौथे दिन जब व्यापारी और गधा बाजार के लिए निकले, तो गधे ने चुपचाप पुल पार कर लिया। उस दिन के बाद से गधे ने कभी भी काम करने में आलस नहीं दिखाया और व्यापारी के सारे नुकसान की धीरे-धीरे भरपाई हो गई। कहानी से सीख बच्चों, आलसी गधे की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि अपने कर्त्तव्य का पालन करने में कभी भी आलस नहीं दिखाना चाहिए। साथ ही, व्यापारी की तरह सही समझ और सूझबूझ से किसी भी काम को आसानी से किया जा सकता है।
2020-10-2304 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-10-2204 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Story1919 की एक बात -- सआदत हसन मंटोये 1919 ईस्वी की बात है, भाईजान, जब रौलेट ऐक्ट के ख़िलाफ़ सारे पंजाब में एजीटेशन हो रहा था। मैं अमृतसर की बात कर रहा हूँ। सर माईकल ओडवायर ने डिफ़ेन्स ऑफ़ इण्डिया रूल्ज़ के मातहत गांधी जी का दाख़िला पंजाब में बन्द कर दिया था। वो इधर आ रहे थे कि पलवाल के मुक़ाम पर उनको रोक लिया गया और गिरफ़्तार करके वापस बम्बई भेज दिया गया। जहाँ तक में समझता हूँ, भाईजान, अगर अँग्रेज़ ये ग़लती न करता तो जलियाँवाला बाग़ का हादसा उस की हुक्मरानी की स्याह तारीख़ में ऐसे ख़ूनीं वर्क़ का इज़ाफ़ा कभी न करता। क्या मुसलमान, क्या हिन्दू, क्या सिख, सब के दिल में गांधी जी की बेहद इज़्ज़त थी। सब उन्हें महात्मा मानते थे। जब उन की गिरफ़्तारी की ख़बर लाहौर पहुँची तो सारा कारोबार एकदम बन्द हो गया। यहाँ से अमृतसर वालों को मालूम हुआ, चुनाँचे यूँ चुटकियों में मुकम्मल हड़ताल हो गई। कहते हैं कि नौ अप्रैल की शाम को डाक्टर सत्यपाल और डाक्टर किचलू की ज़िलावतनी के आर्डर डिप्टी कमिशनर को मिल गए थे। वो उन की तामील के लिए तैयार नहीं था क्योंकि उसके ख़्याल के मुताबिक़ अमृतसर में किसी हैजान-ख़ेज बात का ख़तरा नहीं था। लोग पुरअम्न तरीक़े से एहितजाजी जलसे वग़ैरा करते थे। जिनसे तशद्दुद का सवाल ही पैदा नहीं होता था। मैं अपनी आँखों देखा हाल बयान करता हूँ। नौ को रामनवमी थी।। जलूस निकला मगर मजाल है जो किसी ने हुक्काम की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ एक क़दम उठाया हो, लेकिन भाईजान, सर माईकल अजब औंधी खोपड़ी का इनसान था। उस ने डिप्टी कमिशनर की एक ना सुनी। उस पर, बस, यही ख़ौफ़ सवार था कि ये लीडर महात्मा गांधी के इशारे पर सामराज का तख़्ता उलटने के दर पे हैं और जो हड़तालें हो रही हैं और जलसे मुनअक़िद होते हैं उनके पस-ए-पर्दा यही साज़िश काम कर रही है।
2020-10-2221 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-10-2103 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyतेनालीराम की कहानी: मनपसंद मिठाईतेनालीराम की कहानी: मनपसंद मिठाई तेनालीराम हमेशा जवाब देने के अपने नायाब तरीकों के कारण जाने जाते थे। उनसे कोई भी सवाल पूछा जाए, वह हमेशा एक अलग अंदाज के साथ जवाब देते थे, फिर चाहे वो सवाल उनकी मनपसंद मिठाई का ही क्यों न हो। आइए, जानते हैं कि कैसे तेनालीराम ने अपनी मनपसंद मिठाई के पीछे महाराज कृष्णदेव राय की कसरत करवा दी। सर्दियों की एक दोपहरी महाराज कृष्णदेव राय, राजपुरोहित और तेनालीराम महल के बागीचे में टहल रहे थे। महाराज बोले, “इस बार बहुत गजब की ठंड पड़ रही है। सालों में ऐसे ठंड नहीं पड़ी। ये मौसम तो भरपूर खाने और सेहत बनाने का है। क्यों राजपुरोहित जी, क्या कहते हैं?” “बिल्कुल सही कह रहे हैं महाराज आप। इस मौसम में ढेर सारे सूखे मेवे, फल और मिठाइयां खाने का मजा ही अलग होता है”, राजपुरोहित ने जवाब दिया। मिठाइयों का नाम सुनकर महाराज बोले, “यह तो बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। वैसे ठंड में कौन सी मिठाइयां खाई जाती हैं?” राजपुरोहित बोले, “महाराज सूखे मेवों की बनी ढेर सारी मिठाइयां जैसे काजू कतली, बर्फी, हलवा, गुलाब जामुन, आदि। ऐसी और भी कई मिठाइयां हैं, जो हम ठंड में खा सकते हैं।” यह सुनकर महाराज हंसने लगे और तेनालीराम की तरफ मुड़कर बोले, “आप बताइए तेनाली। आपको ठंड में कौन सी मिठाई पसंद है?”
2020-10-2104 minLegal Awareness with RKD2020-10-1502 minLegal Awareness with RKD2020-10-1502 minLegal Awareness with RKD2020-10-1501 minLegal Awareness with RKD2020-10-1505 minLegal Awareness with RKD2020-10-1504 minLegal Awareness with RKD2020-10-1506 minLegal Awareness with RKD2020-10-1501 minTHE ONE TAKE SHOW: Law, Logic and Life with Kaustubh2020-10-1531 minLegal Awareness with RKD2020-10-1401 minLegal Awareness with RKD2020-10-1103 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyबच्चों की कहानी-भेड़िया आया… भेड़िया आया…भेड़िया आया… भेड़िया आया… एक बार एक लड़का था जिसके पिता ने एक दिन उससे कहा कि अब वह इतना बड़ा हो गया है कि भेड़ों की देखभाल कर सके।हर दिन वह भेड़ों को घास चरने के लिए ले जाता और उन पर निगरानी रखता। देखते ही देखते, भेड़ें बड़े हो गए और उनका ऊन भी घना हो गया था । परंतु वह लड़का दुखी था, वह इन उबाऊ भेड़ों पर नज़र नहीं रखना चाहता था, उसे भागना था, जी भर के खेलना था। इसलिए, उसने कुछ मज़ेदार करने का फैसला किया और एक दिन वह चिल्लाने लगा ‘भेड़िया! भेड़िया!’ इससे पहले कि भेड़िया किसी भेड़ को खा जाए, उसे भगाने के लिए पूरा गाँव पत्थरों के साथ दौड़ता हुआ वहाँ पहुँचा। जब उन्होंने देखा कि वहाँ कोई भेड़िया नहीं है, तब वे उसे डाँटते – फटकारते हुए वहाँ से निकल गए कि कैसे वह उनका समय बर्बाद कर रहा था और बिना वजह के डरा भी रहा था। अगले दिन, लड़का फिर चिल्लाया ‘भेड़िया! भेड़िया!!’ और गाँव वाले फिर से उस भेड़िये को भगाने के लिए दौड़ते हुए वहाँ पहुँचे। लड़का उसने पैदा किए दर पर हस रहा था और गाँव वाले वहाँ से निकल गए, और उनमें से कुछ औरों से ज़्यादा क्रोधित थे। तीसरे दिन, जब वह लड़का एक छोटी पहाड़ी पर गया, तो उसने अचानक एक भेड़िए को अपनी भेड़ों पर हमला करते देखा। वह जितना हो सके उतने ज़ोर से चिल्लाया, “भेड़िया! भेड़िया! भेड़िया! भेड़िया!’ लेकिन इस बार कोई गाँव वाला उसके भेड़ों को बचाने नहीं आया क्योंकि उन्हें लगा कि वह फिर से मज़ाक कर रहा है।पहले बिना वजह सिर्फ ‘भेड़िया!’ चिल्लाने से, उस दिन उसने अपनी तीन भेड़ें खो दी। कहानी से मिली सीख- लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कहानियाँ न बनाएं क्योंकि ऐसा करने से जब आपको वाकई में ज़रूरत होगी तब आपकी मदद करने के लिए कोई नहीं आएगा।
2020-10-1003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyबच्चों की कहानी-एक चतुर गणनाएक चतुर गणना- अकबर ने एक बार अपनी अदालत में एक प्रश्न रखा, जिसने सभी को चक्कर में डाल दिया। वे सब जवाब ढूंढने की कोशिश कर ही रहे थे कि इतने में वहाँ बीरबल आया और उसने समस्या जाननी चाही। फिर उन्होंने उसे, अकबर द्वारा पूछे सवाल के बारे में बताया। ‘इस शहर में कुल कितने कौवे हैं?’ बीरबल तुरंत मुस्कुराया, अकबर के पास गया और घोषणा की, कि उनके सवाल का जवाब “इक्कीस हजार पाँच सौ तेईस” है। जब उससे पूछा गया कि उसे जवाब कैसे पता है, तो बीरबल ने कहा कि, ‘अपने आदमियों से कौओं की संख्या गिनने को कहें। यदि संख्या ज़्यादा है, तो शहर के बाहर से कौओं के रिश्तेदार उनसे मिलने आए हैं और यदि संख्या कम है, तो कौवे शहर के बाहर अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हैं। जवाब से प्रसन्न होकर अकबर ने बीरबल को माणिक और मोती की माला भेंट की। कहानी से मिली सीख- आपके उत्तर के लिए स्पष्टीकरण होना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उत्तर देना।
2020-10-1001 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyहिंदी कहानी-सुई का पेड़सुई का पेड़- पुराने समय की बात है, दो भाई थे जो एक जंगल के नज़दीक रहते थे, बड़ा भाई अपने छोटे भाई के प्रति बहुत धूर्त था, और उसका सारा खाना खा जाता था और उसके सभी अच्छे कपड़े भी ले लेता था। एक दिन, बड़ा भाई, बाज़ार में बेचने के लिए , कुछ लकड़ियाँ इक्कठा करने जंगल में गया। जैसे ही वह एक पेड़ से दूसरे पेड़ की शाखाएं काटकर आगे बढ़ा , उसकी मुलाकात एक जादुई पेड़ से हुई। पेड़ ने उससे कहा, “हे! दयालु महोदय, कृपया मेरी शाखाओं को ना काटें। यदि आप मुझे छोड़ देते हैं, तो मैं आपको अपने सुनहरे सेब दूंगा। बड़ा भाई मान गया लेकिन वह पेड़ द्वारा दिए गए सेबों की संख्या से निराश था, लालच ने उस पर क़ाबू पा लिया, और उसने पेड़ को डराया कि यदि पेड़ ने उसे और सेब नहीं दिए तो वह पूरी शाखा काट देगा। सेब देने के बजाय, जादुई पेड़ ने उसपर सैकड़ों छोटी सुइयों की बौछार कर दी । बड़ा भाई दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर गिर गया और धीरे–धीरे सूरज ढलने लगा। यहाँ छोटा भाई चिंतित हो गया और अपने बड़े भाई की तलाश में निकल पड़ा, उसने अपने भाई को शरीर पर सैकड़ों सुइयों के साथ पाया। वह उसकी तरफ़ दौड़ा और उसने प्रत्येक सुई बहुत सावधानी और प्यार से निकाली। सारी सुईयाँ निकालने के बाद, बड़े भाई ने उसके साथ बुरा व्यवहार करने के लिए माफ़ी मांगी और बेहतर इंसान बनने का वादा भी किया। पेड़ ने बड़े भाई के दिल में आया बदलाव देखा और उन्हें सभी सुनहरे सेब दे दिए, जिससे उन्हें कभी कोई कमी महसूस नहीं हुई। कहानी से मिली सीख नम्र और दयालु होना महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका फल हमेशा अच्छा ही मिलेगा।
2020-10-1002 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyहिंदी कहानी-बोले हुए शब्द वापस नहीं आतेबोले हुए शब्द वापस नहीं आते एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा. संत ने किसान से कहा , ” तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया. तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ” किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते. इस कहानी से क्या सीख मिलती है: कुछ कड़वा बोलने से पहले ये याद रखें कि भला-बुरा कहने के बाद कुछ भी कर के अपने शब्द वापस नहीं लिए जा सकते. हाँ, आप उस व्यक्ति से जाकर क्षमा ज़रूर मांग सकते हैं, और मांगनी भी चाहिए, पर human nature कुछ ऐसा होता है की कुछ भी कर लीजिये इंसान कहीं ना कहीं hurt हो ही जाता है. जब आप किसी को बुरा कहते हैं तो वह उसे कष्ट पहुंचाने के लिए होता है पर बाद में वो आप ही को अधिक कष्ट देता है. खुद को कष्ट देने से क्या लाभ, इससे अच्छा तो है की चुप रहा जाए.
2020-10-1002 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyहिंदी कहानी- मुश्किल दौर से गुजर कर आप क्या बनते हैं, आप पर निर्भर करता हैहिंदी कहानी- मुश्किल दौर से गुजर कर आप क्या बनते हैं, आप पर निर्भर करता है एक बार कि बात है, एक कक्षा में गुरूजी अपने सभी छात्रों को समझाना चाहते थे कि प्रकर्ति सभी को समान अवसर देती हैं और उस अवसर का इस्तेमाल करके अपना भाग्य खुद बना सकते है। इसी बात को ठीक तरह से समझाने के लिए गुरूजी ने तीन कटोरे लिए। पहले कटोरे में एक आलू रखा, दूसरे में अंडा और तीसरे कटोरे में चाय की पत्ती डाल दी। अब तीनों कटोरों में पानी डालकर उनको गैस पर उबलने के लिए रख दिया। सभी छात्र ये सब हैरान होकर देख रहे थे लेकिन किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। बीस मिनट बाद जब तीनों बर्तन में उबाल आने लगे, तो गुरूजी ने सभी कटोरों को नीचे उतरा और आलू, अंडा और चाय को बाहर निकाला। अब उन्होंने सभी छात्रों से तीनों कटोरों को गौर से देखने के लिए कहा। अब भी किसी छात्र को समझ नहीं पा रहा था| आखिर में गुरु जी ने एक बच्चे से तीनों (आलू, अंडा और चाय) को स्पर्श करने के लिए कहा। जब छात्र ने आलू को हाथ लगाया तो पाया कि जो आलू पहले काफी कठोर हो गया था और किन पानी में उबलने के बाद काफी मुलायम हो गया था। जब छात्र ने, अंडे को उठाया तो देखा जो अंडा पहले बहुत नाज़ुक था उबलने के बाद वह कठोर हो गया है। अब बारी थी चाय के कप को उठाने की। जब छात्र ने, चाय के कप को उठाया तो देखा चाय की पत्ती ने गर्म पानी के थ मिलकर अपना रूप बदल लिया था और अब वह चाय बन चुकी थी। अब गुरु जी ने समझाया, हमने तीन अलग अलग चीजों को समान विपत्ति से गुज़रा, यानी कि तीनों को समान रूप से पानी में उबाला लेकिन बाहर आने पर तीनों चीजें एक जैसी नहीं मिली। आलू जो कठोर था वो मुलायम हो गया, अंडा पहले से कठोर हो गया और चाय की पत्ती ने भी अपना रूप बदल लिया उसी तरह यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। कहानी से शिक्षा-सभी को समान अवसर मिलते है और मुश्किले आती हैं लेकिन ये पूरी तरह आप पर निर्भर है की आप परेशानी का सामना कैसा करते हैं और मुश्किल दौर से निकलने के बाद क्या बनते हैं।
2020-10-1003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyहिंदी कहानी-एक आइसक्रीमआइसक्रीम की एक डिश A Ice cream Dish Story in Hindi एक बार एक छोटा सा लड़का एक होटल में गया ।कुछ ही देर में वहां वेटर आया और पुछा आपको क्या चाहिए सर ? छोटे बच्चे ने उल्टा पुछा ! वैनिला आइसक्रीम(vanilla ice-cream) कितने रूपए का है ? उस वेटर वाले ने जवाब दिया 50 रुपये का । यह सुन कर उस छोटे लड़के ने अपने जेब में हाँथ डाल कर कुछ निकला और हिसाब किया । उसने दुबारा पुछा कि संतरा फ्लेवर आइसक्रीम(orange flavor ice-cream) कितने का है । वेटर ने दुबारा जवाब दिया और कहा 35 रुपये का सर । यह सुने के बाद उस लड़के ने कहा ! मेरे लिए एक संतरा फ्लेवर आइसक्रीम(orange flavor ice-cream) ले आईये । कुछ ही देर में वेटर आइसक्रीम की प्लेट और साथ में बिल लेकर आया और उस बच्चे के टेबल पर रखकर चले गया । उस लड़के ने उस आइसक्रीम को खाने के बाद पैसे दिए और वह चले गया । जब वह वेटर वापस आया तो वह दंग रहे गया यह देखकर कि उस लड़के नें खाए हुए आइसक्रीम प्लेट के बगल में उसके लिए 15 रुपय का टिप छोड़ गया था । कहानी से शिक्षा-उस लड़के पास 50 रुपये होने पर भी उसने उस वेटर के टिप के बारे में पहले सोचा न की अपने आइसक्रीम के बारे में । उसी प्रकार हमें अपने फायदे के बारे में सोचने से पहले दूसरों के बारे में भी सोचना चाहिए ।
2020-10-1002 minThe Experience Business2020-09-0442 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-02-1706 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-02-1408 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-02-1408 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-02-1402 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2020-02-0909 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story
हिन्दी कहानियाँ Hindi Storyसत्संग का महत्व।जीवन को समुन्नत बनाने और सुधारने के लिए सत्संग मूलाधार है। जीवन के उद्देश्य की प्राप्ति में सत्संग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सत्संग क्या है? इस संसार में तीन पदार्थ- ईश्वर, जीव और प्रकृति- सत हैं। इन तीनों के बारे में जहां अच्छी तरह से बताया जाए, उसे सत्संग कहते हैं। श्रेष्ठ और सात्विक जनों का संग करना, उत्ताम पुस्तकों का सत्संग, पवित्र और धार्मिक वातावरण का संग करना, यह सब सत्संग के अंतर्गत आता है। सत्संग हमारे जीवन के लिए उतना ही आवश्यक है, जितना कि शरीर के लिए भोजन। भोजनादि से हम शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते हैं, किंतु आत्मा जो इस शरीर की मालिक है, उसकी संतुष्टि के लिए कुछ नहीं करते।
2020-01-0205 minLive It Logical2020-01-0100 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-3005 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-3004 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-3006 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-3003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-3003 minहिन्दी कहानियाँ Hindi Story2019-12-2902 minLive It Logical2019-12-2100 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2019-12-121h 46Rajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2019-12-051h 55Live It Logical2019-11-2700 minLive It Logical2019-10-2000 minLive It Logical2019-09-1600 minLive It Logical2019-08-3100 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2019-08-311h 38Live It Logical2019-08-2400 minLive It Logical2019-08-0600 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2019-07-301h 49Live It Logical2019-07-2300 minLive It Logical2019-07-2300 minLive It Logical2019-07-1600 minLive It Logical2019-07-0400 minLive It Logical2019-07-0200 minRajesh Thakur\'s Podcast Show | Retro Rewind: Bollywood Legends, Iconic Films & Global Moments2019-06-141h 50