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Shamsher Ali

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IBS Intelligence Global FinTech Interviews2022-09-1216 minShamsher Ali2022-08-1403 minShamsher Ali2022-08-1303 minConnecting the dots in FinTech... by Marcel van Oost2022-04-2705 minShamsher Ali2022-03-2201 minShamsher Ali2022-02-1902 minShamsher Ali2022-01-3002 minShamsher Ali2021-11-0109 minShamsher Ali2021-10-0208 minShamsher Ali2021-09-2802 minShamsher Ali2021-09-2602 minShamsher Ali2021-09-1101 minShamsher Ali2021-09-0102 minShamsher Ali2021-08-2507 minShamsher Ali2021-08-1905 minShamsher Ali2021-07-2003 minShamsher Ali2021-07-1502 minShamsher Ali2021-06-2502 minShamsher Ali2021-06-1202 minShamsher Ali2021-05-2803 minShamsher Ali2021-05-1601 minShamsher Ali2021-04-1503 minShamsher Ali2021-04-1203 minShamsher Ali
Shamsher AliHow did Prithviraj Chauhan died? Did he kill Md Ghori?क्या सच में पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गोरी को मारा था? भारत का इतिहास बहुत स्वर्णिम रहा है इसमें कोई शक नहीं है. इस भारत की धरती ने ऐसे-ऐसे शूरवीरों को जन्म दिया है जिनपर हम आज भी गर्व करते हैं. लेकिन इसी इतिहास के पन्नों में कुछ कथाएं इतनी कड़वी हैं जिनको हम भारतीय आजतक हजम नहीं कर पाए और उसको छुपाने के लिए तरह-तरह की मनगढ़ंत कहानियां रच कर अपने दिल को तसल्ली देते हैं. मोहम्मद गोरी की मृत्यु का सच भी उनमे से एक है. हम यह नहीं कह रहे कि पृथ्वीराज चौहान महान भारतीय शासक या वीर नहीं थे, लेकिन मोहम्मद गोरी को उन्होंने मारा ये पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी है. क्या करें कि हमारा इतिहास कहीं-कहीं बहुत कड़वा बन बैठता है, लेकिन इसे किसी तरह बदला नहीं जा सकता. यह जैसा है वैसा ही हमें इसे जस का तस स्वीकार करना होगा।
2021-04-1006 minShamsher Ali2021-04-0402 minShamsher Ali2021-03-2511 minShamsher Ali
Shamsher AliMain Bihar Hoonबिहार का उल्‍लेख वेदों, पुराणों और प्राचीन महाकाव्‍यों आदि में मिलता है और यह राज्‍य महात्‍मा बुद्ध और 24 जैन तीर्थंकरों की कर्मभूमि रहा है। ईसा पूर्व काल में इस क्षेत्र पर बिम्‍बसार, पाटलिपुत्र शहर की स्‍थापना करने वाले उदयन, चंद्रगुप्‍त मौर्य और सम्राट अशोक सहित मौर्य, शुंग तथा कण्‍व राजवंश के नरेशों ने राज किया। इसके पश्‍चात कुषाण शासकों का समय आया और बाद में गुप्‍त वंश के चंद्रगुप्‍त विक्रमादित्‍य ने बिहार पर राज किया। मध्‍यकाल में मुस्लिम शासकों का इस क्षेत्र पर अधिकार रहा। बिहार पर सबसे पहले विजय पाने वाला मुस्लिम शासक मोहम्‍मद बिन बख्तियार खिलजी था। खिलजी वंश के बाद तुगलक वंश तथा मुगल वंश का आधिपत्‍य था। बिहार भारत के प्रमुख राज्‍यों में से एक है। इसके उत्‍तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्‍तर प्रदेश तथा दक्षिण में झारखंड राज्‍य हैं।
2021-03-2201 minShamsher Ali2021-03-0401 minShamsher Ali2021-02-2402 minShamsher Ali2021-02-1401 minShamsher Ali2021-02-0803 minShamsher Ali
Shamsher AliKya hind ka Zinda - Josh MalihabadiKya hind ka Zinda - Josh Malihabadi क्या हिन्द का ज़िंदाँ काँप रहा है गूँज रही हैं तक्बीरें उकताए हैं शायद कुछ क़ैदी और तोड़ रहे हैं ज़ंजीरें दीवारों के नीचे आ आ कर यूँ जम्अ हुए हैं ज़िंदानी सीनों में तलातुम बिजली का आँखों में झलकती शमशीरें भूखों की नज़र में बिजली है तोपों के दहाने ठंडे हैं तक़दीर के लब को जुम्बिश है दम तोड़ रही हैं तदबीरें आँखों में गदा की सुर्ख़ी है बे-नूर है चेहरा सुल्ताँ का तख़रीब ने परचम खोला है सज्दे में पड़ी हैं तामीरें क्या उन को ख़बर थी ज़ेर-ओ-ज़बर रखते थे जो रूह-ए-मिल्लत को उबलेंगे ज़मीं से मार-ए-सियह बरसेंगी फ़लक से शमशीरें क्या उन को ख़बर थी सीनों से जो ख़ून चुराया करते थे इक रोज़ इसी बे-रंगी से झलकेंगी हज़ारों तस्वीरें क्या उन को ख़बर थी होंटों पर जो क़ुफ़्ल लगाया करते थे इक रोज़ इसी ख़ामोशी से टपकेंगी दहकती तक़रीरें संभलों कि वो ज़िंदाँ गूँज उठा झपटो कि वो क़ैदी छूट गए उट्ठो कि वो बैठीं दीवारें दौड़ो कि वो टूटी ज़ंजीरें --- This episode is sponsored by · Anchor: The easiest way to make a podcast. https://anchor.fm/app
2021-01-3101 minShamsher Ali2021-01-2903 minShamsher Ali2021-01-2502 minShamsher Ali2021-01-2400 minShamsher Ali2021-01-1703 minShamsher Ali
Shamsher AliThird Battle of Panipat: जब 12 घंटे में मारे गए थे डेढ़ लाख सैनिक और मराठा सेना को मिली थी करारी हारThird Battle of Panipat: जब 12 घंटे में मारे गए थे डेढ़ लाख सैनिक और मराठा सेना को मिली थी करारी हार भारत के इतिहास में 14 जनवरी की तारीख का एक खास महत्व है. 1761 में 14 जनवरी के दिन अफगान शासक अहमद शाह अब्दाली की सेना और मराठों के बीच पानीपत की तीसरी लड़ाई (Third Battle of Panipat) हुई थी. इस युद्ध को 18वीं सदी के सबसे भयंकर युद्ध के रूप में याद किया जाता है, जिसमें मराठों को हार का सामना करना पड़ा. इस लड़ाई में एक ही दिन में हजारों लोगों की मौत हुई और मराठों के बढ़ते साम्राज्य विस्तार पर न सिर्फ रोक लग गई बल्कि औरंगजेब की मौत के बाद कमजोर हुए मुगलिया शासन के स्थान पर देश में भगवा परचम लहराने की संभावनाएं भी धूल में मिल गईं.
2021-01-1402 minShamsher Ali
Shamsher AliHappy Lohari: दुल्ला भट्टी न होते तो लाहौर, लाहौर न होता और तो और लोहड़ी भी न होतीHappy Lohari: दुल्ला भट्टी न होते तो लाहौर, लाहौर न होता और तो और लोहड़ी भी न होती. दुल्ला भट्टी न होते तो लाहौर, लाहौर न होता. सलीम कभी जहांगीर न हो पाता. मिर्जा-साहिबा के किस्सों में संदल बार न आता. पंजाब वाले दुल्ले दी वार न गाते और जानो कि लोहड़ी भी न होती. वाघा बॉर्डर से लगभग 200 किलोमीटर पार, पाकिस्तान के पंजाब में पिंडी भट्टियां है. वहीं लद्दी और फरीद खान के यहां 1547 में हुए राय अब्दुल्ला खान, जिन्हें दुनिया अब दुल्ला भट्टी बुलाती है. राजपूत मुसलमान थे वो. उनके पैदा होने से चार महीने पहले ही उनके दादा संदल भट्टी और बाप को हुमायूं ने मरवा दिया था. खाल में भूसा भरवा के गांव के बाहर लटकवा दिया था. वजह ये कि मुगलों को लगान देने से मना कर दिया था. संदल भट्टी वो जिनके नाम पर नाम पड़ा था, संदल बार. संदल बार जिसका जिक्र मिर्जा-साहिबा के किस्सों में आता है, पंजाब के लोकगीतों में आता है. दुल्ला भट्टी उस जमाने के रॉबिनहुड थे. अकबर उन्हें डकैत मानता था. वो अमीरों से, अकबर के जमींदारों से, सिपाहियों से सामान लूटते. गरीबों में बांटते. अकबर की आंख की किरकिरी थे. इतना सताया कि अकबर को आगरे से राजधानी लाहौर शिफ्ट करनी पड़ी.
2021-01-1302 minShamsher Ali
Shamsher Ali5 जनवरी 1592 को उस मुगल बादशाह का जन्म, जिसने दुनिया के लिए प्रेम का प्रतीक "TajMahal" बनाया - Aliपांच जनवरी 1592 को जुमेरात (गुरुवार) के दिन जहांगीर की बेगम ने एक बेटे को जन्म दिया। जहांगीर ने अपने पिता अकबर से उसके बेटे का नाम रखने की इच्छा जताई। अकबर ने उसे खुर्रम बुलाया। फारसी में खुर्रम का मतलब होता है खुशी। पैदाइश के छठवें दिन खुर्रम को अकबर की बेगम रुकैया के हवाले कर दिया गया। क्योंकि बेगम रुकैया की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने खुर्रम को गोद ले लिया। अकबर खुर्रम के दादा थे। खुद अनपढ़ थे, लेकिन उन्होंने खुर्रम को तालीम दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही बढ़िया उस्तादों से उसे जंग के सबक भी सिखवाए। अकबर का खुर्रम से इतना लगाव हो गया था कि वो जंग में खुर्रम को भी साथ ले जाने लगे। यहीं से सफर शुरू हुआ खुर्रम के 'शाहजहां' बनने का।
2021-01-0503 minShamsher Ali
Shamsher AliFatima Sheikh: फ़ातिमा शेख़, सावित्री बाई फुले के साथ वंचितों को शिक्षित करने वाली सहयोगी शिक्षिका!Fatima Sheikh: फ़ातिमा शेख़, सावित्री बाई फुले के साथ वंचितों को शिक्षित करने वाली सबसे मज़बूत सहयोगी और साथी शिक्षिका! आमतौर पर हम अपने पुरखों यानी मर्दों के काम और समाजी योगदान के बारे में ख़ूब जानते हैं. चाहे घर हो या समाज या फिर देश… सदियों से मर्दों के किए गए को ही असली काम और योगदान माना गया. घर में संकटों से बेड़ा पार लगाने वाली महिलाओं को कोई याद नहीं करता. ठीक उसी तरह समाज और देश को बनाने में अपने को आहूत कर देने वाली ज़्यादातर महिलाएं भी गुमनाम रह जाती हैं. हम उदाहरण के तौर पर कुछ महिलाओं के नाम ज़रूर गिना सकते हैं. मगर ये कुछ नाम ही होंगे. हज़ारों के बारे में हमें बस बेनाम ज़िक्र ही मिलता है. कई के बारे में तो बेनामी ज़िक्र भी नहीं मिलता है. कुछ के नाम पता हैं लेकिन उनके काम का कोई लेखा-जोखा नहीं मिलता है. यही नहीं, कई मामलों में स्त्री ने ख़ुद अपने या अपनी साथी महिलाओं के बारे में न लिखा होता तो अनेक पुरखिनों के तो नामोनिशान भी न मिलते. जी, बतौर भारतीय मर्दाना समाज, हम ऐसे ही हैं. इतिहास में जहां पहला स्कूल खोलने का श्रेय ज्योतिबा फुले को दिया जाता है तो पहली शिक्षिका में नाम सावित्री बाई फुले और उनकी सहयोगी फ़ातिमा शेख़ को भी याद किया जाता है. फ़ातिमा शेख़ ने तकरीबन 175 साल पहले समाज के सबसे दबे-कुचले लोगों और ख़ासकर महिलाओं की तालीम के लिए सावित्री बाई फुले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया. एक जनवरी सन् 1848 में पुणे के बुधवार पेठ में जब पहला स्कूल खोला गया तो सावित्री बाई के साथ फ़ातिमा शेख़ भी वहाँ पढ़ाती थीं हालांकि फ़ातिमा शेख़ के बारे में लोग कम ही जानते हैं. फ़ातिमा शेख़. के बारे में कुछ फुटकर सूचनाएँ मिलती हैं।
2021-01-0306 min