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The American Bhau Show (English)2025-10-1731 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...79: मिलिये स्टोरीटेल के पहले ओरिजिनल हिंदी ऑडियो ड्रामा के राइटर्स दीपा और श्रीकांत सेइस पोडकास्ट में हम बात कर रहे हैं हमारे पहले ओरिजिनल ऑडियो ड्रामा 'फिर मिलेंगे की' जिसके ख़ास आकर्षण हैं सेहबान अज़ीम.  इसकेलेखक दीपा गणेश और श्रीकांत अग्नीश्वरण बात कर रहे हैं एडिटर क्रियेटर सुरोमिता रॉय से इसकी कहानी, इसके संगीत और ऋषि-पायल की उस  अद्भुत प्रेमगाथा की,  कोलकाता से पेरिस और न्यूयॉर्क के उसके गुनगुनाते सफ़र  की. ऋषि की कविता, पायल की आवाज़ यानि प्यार का संगीत.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.inस्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. 
2020-07-0837 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...78: सेलेब्रिटीज़ का किताबें नैरेट करना इंडिया में भी कॉमन होता जायेगा: सुकीर्ति शर्माहम सब के जीवन में एक अप्रत्याशित आपदा की तरह कोरोना संक्रमण के आने से पहले हमने 'बोलती किताबें' में स्टोरीटेल इंडिया में पब्लिशर सुरोमिता रॉय और ऑडियो प्रोडक्शन मैनेजर राहुल पाटिल के साथ बातचीत की थी ताकि जो श्रोता लेखक या वायस आर्टिस्ट के रूप में हमारे साथ जुड़ना चाहते हैं, उनके प्रश्नों का एक जगह जवाब उपलब्ध हो जाये। स्टोरीटेल इंडिया की मार्केटिंग हेड सुकीर्ति शर्मा के साथ यह बातचीत उसी सिलसिले में उन सवालों के बारे में है जो भारत में ऑडियोबुक्स के  वर्तमान और भविष्य के बारे में सामान्यतः उठते हैं. सुकीर्ति एक स्वावलम्बी, स्वंतंत्र स्त्री हैं जिसकी झलक इस बातचीत में आपको मिलेगी. यह बातचीत फरवरी के सुहाने दिनों में हमारे मुंबई ऑफिस में रिकार्ड की गयी थी और तब यह नहीं पता था कि आने वाले दिनों में 'बोलती किताबें' के दस एपिसोड एक ग्लोबल महामारी के बारे में होंगे। आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.inस्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. 1. कैसी आवाज़ें ढूँढ रहे हैं स्टोरीटेल के ऑडियो प्रोडक्शन मैनेजर राहुल पाटिल?https://audioboom.com/posts/7480055-2. अगर आप अंग्रेज़ी, बांग्ला और हिंदी में ऑडियो सीरीज़ लिखना चाहते हैं तो स्टोरीटेल पब्लिशर सुरोमिता रॉय को सुनियेhttps://audioboom.com/posts/7463744-
2020-06-1836 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-06-0846 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-06-0538 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-06-0156 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-2930 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-2533 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...76: जीत ही लेंगे एक दिन लड़ते-लड़ते: नीलोत्पल मृणालकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा दसवाँ पॉडकास्ट है.महामारी से सबसे ज्यादा हैरान परेशान वो गरीब मजूदर हैं जो शहरों से गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं. ऐसे मुश्किल वक्त में कुछ लेखक अपने सामाजिक सरोकारों को समझते हुए सामने आ रहे हैं और जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं. वे वालेंटियर बन कर उन तक राशन, दवाएं और दूसरी जरूरी चीजें उन तक पहुंचा रहे हैं. हिन्दी के बेस्ट सेलर राइटर और गीतकार नीलोत्पल मृणाल उनमें से एक हैं.इन दिनों नीलोत्पल अपने झारखंड स्थित अपने गांव, दुमका में लोगों की मदद कर रहे हैं. वे लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने, गांव में बाहर से आये लोगों को क्वारंटाइन सेंटर भेजने और उन लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं. साथ ही सरकार से मिलने वाली सुविधाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे है. वो एक वालेंटियर के रूप में अपनी टीम के साथ जमीन पर मुस्तैदी से डटे हुए हैं.  इन्होंने इस पॉडकास्ट में अपने काम, चुनौतियों और भविष्य पर इसके पड़ने वाले प्रभाव के बारे में खुलकर और बेहद दिलचस्प ढंग से बात की है. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना संकट के दौरान हमारे अन्य पॉडकास्ट:9. कब तक बन सकता है कोरोना का वैक्सीन जानिये वैज्ञानिक सुषमा नैथानी सेhttps://audioboom.com/posts/7577075- 8. सैकड़ों जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुँचा रहे हैं लेखक ललित कुमार https://audioboom.com/posts/7572101-7. इंदौर के किसी सरकारी कर्मचारी ने छुट्टी का सोचा भी नहीं है: कैलाश वानखेड़े https://audioboom.com/posts/7569617-6. मिलिये उस अभिनेत्री से जो मुंबई में कोरोना मरीज़ों की सेवा नर्स के रूप में कर रही है https://audioboom.com/posts/7559410-5. सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरhttps://audioboom.com/posts/7553275- 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-05-1733 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-1111 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-0943 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-0816 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...75: कब तक बन सकता है कोरोना का वैक्सीन जानिये वैज्ञानिक सुषमा नैथानी सेकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा नौवाँ पॉडकास्ट है. जिस तेज़ी से वायरस का प्रसार हुआ है और जिस पैमाने पर मृत्यु हुई है, वैक्सीन मनुष्यता की सबसे बड़ी उम्मीद की तरह नज़र आ रहा है. हमने इस विषय पर मॉलीक्यूलर बायोलोजिस्ट और जीनोम विज्ञानी डॉक्टर सुषमा नैथानी से बात की. भारतीय मूल की सुषमा अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ़ बॉटनी एंड प्लांट पैथोलॉजी में एसिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं. उनका चीन के शहर वुहान से रिश्ता रहा है जहां वे शोध के सिलसिले में जा चुकी हैं.  सुषमा अंग्रेज़ी और हिंदी की सुपरिचित लेखक भी हैं.  आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना संकट के दौरान हमारे अन्य पॉडकास्ट:8. सैकड़ों जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुँचा रहे हैं लेखक ललित कुमार https://audioboom.com/posts/7572101-7. इंदौर के किसी सरकारी कर्मचारी ने छुट्टी का सोचा भी नहीं है: कैलाश वानखेड़े https://audioboom.com/posts/7569617-6. मिलिये उस अभिनेत्री से जो मुंबई में कोरोना मरीज़ों की सेवा नर्स के रूप में कर रही है https://audioboom.com/posts/7559410-5. सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरhttps://audioboom.com/posts/7553275- 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-05-0852 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-05-0721 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...74: सैकड़ों जरूरतमंद लोगों तक राशन पहुँचा रहे हैं लेखक ललित कुमारकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा आठवाँ पॉडकास्ट है.इस संकट में लेकिन सबसे ज्यादा हैरान परेशान गरीब और मज़दूर हैं जिनके घरों में दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो पाना भी मुश्किल है. ऐसे कठिन वक्त में कुछ लेखकों ने नई जिम्मेदारी उठाई है उनकी मदद करने की, उन तक राशन पहुँचाने की उनके परिवार का हर तरह से ख्याल रखने की. "विटामिन ज़िंदगी" के लेखक, 'कविता कोश' और 'गद्य कोश' के संस्थापक ललित कुमार उन लेखकों में से हैं जो राहत कार्य में लगे हुए हैं. वे सोशल मीडिया के मार्फ़त  दिल्ली से दूर, गांवों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं, उन्हें आवश्यक सामग्री मुहैया करा रहे हैं.  उनके इस काम में उनकी  दिव्यांग लोगों की टीम ग्राउन्ड में डटी हुई है. इस बातचीत में वे बता रहे हैं  इस काम के बारे में और हौसला बनाए रखने की अपनी तरकीब के बारे में. ललित को 2018 में दिव्यांग लोगों के रोल मॉडल के लिए नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है. आप we capable नाम की वेबसाइट चलाते हैं, इसके अलावा दशमलव नामक ब्लाग भी है.  आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना संकट के दौरान हमारे अन्य पॉडकास्ट:7. इंदौर के किसी सरकारी कर्मचारी ने छुट्टी का सोचा भी नहीं है: कैलाश वानखेड़े https://audioboom.com/posts/7569617-6. मिलिये उस अभिनेत्री से जो मुंबई में कोरोना मरीज़ों की सेवा नर्स के रूप में कर रही है https://audioboom.com/posts/7559410-5. सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरhttps://audioboom.com/posts/7553275- 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-05-0535 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...73: इंदौर के किसी सरकारी कर्मचारी ने छुट्टी का सोचा भी नहीं है: कैलाश वानखेड़ेकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा सातवाँ पॉडकास्ट है. इस बार हम बातचीत कर रहे हैं इंदौर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मेजिस्ट्रेट और हिंदी के अग्रणी कथाकार कैलाश वानखेड़े से. इंदौर भारत के सर्वाधिक संक्रमित शहरों में से है और वहाँ प्रशासन के सम्मुख अन्य चुनौतियाँ भी रही हैं जिन्होंने इस लड़ाई को और भी मुश्किल बना दिया. कैलाश बता रहे हैं इंदौर प्रशासन कैसे इन सब चुनौतियों के साथ साथ अपने एक पुलिसकर्मी साथी के संक्रमण से देहांत के दुखद सदमे से उबरा और कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई को युद्ध समझकर फिर से कर्मठता से जुट गया. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना संकट के दौरान हमारे अन्य पॉडकास्ट:6. मिलिये उस अभिनेत्री से जो मुंबई में कोरोना मरीज़ों की सेवा नर्स के रूप में कर रही है https://audioboom.com/posts/7559410-5. सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरhttps://audioboom.com/posts/7553275- 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-04-2931 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...72: मिलिये उस अभिनेत्री से जो मुंबई में कोरोना मरीज़ों की सेवा नर्स के रूप में कर रही हैकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा छठा पॉडकास्ट है. इस पॉडकास्ट में हमने एक्‍ट्रेस, शिखा मल्होत्रा से बात की जो इन दिनों बतौर नर्स कोरोना मरीजों को अपनी सेवाएं मुम्बई के एक अस्पताल में दे रही हैं और सुर्खियों में हैं. शिखा एक्ट्रेस के साथ-साथ सर्टिफाइड नर्स भी हैं. उनकी ये नि:स्वार्थ सेवा लोगों के लिए एक प्रेरणा है.  शिखा ने हाल में कांचली फिल्म से बतौर लीड एक्ट्रेस, डेब्यू किया है. ये फिल्म महान साहित्यकार, विजयदान देथा की कहानी पर आधारित है. शिखा बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं, उन्होंने क्लासिकल संगीत और नृत्य भी सीखा है, साथ ही कविताएं भी लिखती हैं. उनका सफ़र भी काफी संघर्ष और चुनौतियों से भरा रहा है. उन्होंने इस पॉडकास्ट में न केवल नर्स के रूप में अपनी चुनौतियों को बताया है बल्कि कोरोना को लेकर कुछ टिप्स भी दिए हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना संकट के दौरान हमारे अन्य पॉडकास्ट:5. सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरhttps://audioboom.com/posts/7553275- 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-04-1750 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-04-1308 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...71: सरकारी क्षेत्र किसी को बेलआउट करने जितना समर्थ नहीं रह जाएगा: डॉ. अवनींद्र ठाकुरकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा पाँचवा पॉडकास्ट है. इस एपिसोड में हम जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट एंड पब्लिक पॉलिसी में एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉ. अवनींद्र ठाकुर से बात कर रहे हैं ग्लोबल और भारतीय इकॉनमी पर कोरोना संकट के प्रभाव की. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना से सम्बंधित हमारे अन्य पॉडकास्ट: 4. ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियाल https://audioboom.com/posts/7548910- 3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाhttps://audioboom.com/posts/7536684-
2020-04-1030 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-04-0611 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...70: ख़बर के लिए बाहर सड़क पर जाने में कोई डर नहीं: राहुल कोटियालकोरोना क्राइसिस के समय में यह हमारा चौथा पॉडकास्ट है. इससे पहले हमने नॉर्वे और भारत से दो डाक्टर्स से बात की है इसके प्रसार और बचाव के बारे में और अमेरिका में रह रहे एक भारतीय कलाकार दंपत्ति से. इस एपिसोड में हम बात कर रहे हैं युवा पत्रकार राहुल कोटियाल से जो दैनिक भास्कर के लिए दिल्ली में ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे हैं. राहुल हर बड़ी खबर के समय सड़क पर थे - नोयडा हाईवे पर प्रवासी मज़दूरों का महापलायन हो, निज़ामुद्दीन में तबलीगी मरकज़ से इवेक्युएशन हो या दिल्ली दंगो के बाद बने रीलीफ कैम्प से लोगों की निकासी. 33 साल के राहुल एक उदाहरण हैं उन बहुत सारे प्रेरणादायी पत्रकारों का जो इस समय बहादुरी और संजीदगी से अपना काम अंजाम दे रहे हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. आप घर पर रहिए, अपना ख़याल रखिए, हो सके तो रोज़ कोई किताब सुनिए या पढ़िए. कोरोना से सम्बंधित हमारे अन्य पॉडकास्ट:  3. लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्ल https://audioboom.com/posts/7542314- 2. अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेhttps://audioboom.com/posts/7539665-1. यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झा https://audioboom.com/posts/7536684-
2020-04-0637 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-03-3119 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...69: लॉकडाउन में कोरोना संक्रमण से कैसे बचें?: डॉ. स्कंद शुक्लडाॅक्टर स्कन्द शुक्ल, एमडी मेडिसिन , डीएम इम्यूनोलॉजी , लखनऊ में गठिया-रोग-विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं. वे हिंदी भाषा में सोशल मीडिया पर वैज्ञानिक चेतना के प्रसार और जनशिक्षण का काम करने वाले थोड़े-से लोगों में हैं.  इस बातचीत में वे बता रहे हैं कि हम मनुष्य से मनुष्य को होने वाले संक्रमण के अलावा पार्सल, सब्ज़ियों और अन्य वस्तुओं के मार्फ़त होने वाले संक्रमण से कैसे बच सकते हैं. Cover Art: Mee Jeyदोस्तो हम इस बीमारी को हरा सकते हैं. हमें ख़ुद का और दूसरों का ख़याल रखना होगा. संयम रखना होगा. निर्देशों का पालन करना होगा. यह जीवन एक अद्भुत उपहार है और हमें इसे नहीं खोना है. अपना ख़याल रखिये और जितना सम्भव हो दूसरों का भी. शरीर से दूर रहने की ज़रूरत है दिल से नहीं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-03-2833 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...68: अचानक लगा हम निर्वासित हो गए हैं, देश के धूल धक्के में लौटना है: मी और जेमी और जे [मीनाक्षी और सुशील] कलाकार दम्पत्ति हैं जो अभी अमेरिका में रहते हैं. उनके लिए कला रोज़ की दैनिक, साझा गतिविधि है और वे 2013 से इसकी प्रस्तुतियाँ करते रहे हैं. दोनों मिलकर बरसों से एक कम्यूनिटी प्रोजेक्ट 'आर्टोलॉग' भी चलाते रहे हैं. जे ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है और वे कुछ वर्षों तक बीबीसी के साथ सोशल मीडिया एडीटर और मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर काम चुके हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के इन दिनों में जब हम घरों में क़ैद हैं, जे और मी का कला को एक रोज़मर्रा की गतिविधि की तरह प्रैक्टिस करने का बरसों का अभ्यास उन्हें इस असाधारण परिस्थिति का सामना करने में कैसे मदद कर रहा है और मनुष्य, दम्पत्ति, कलाकार और पेरेंट के रूप में वे दोनों यह किस तरह कर रहे हैं यह जानने के लिए हमने उनसे एक लॉंग-डिसटेंस पोडकास्ट के रूप में बातचीत की. उम्मीद यह बातचीत आपको अपने लिए उपयोगी लगेगी. अपना ख़याल रखिए. घर में रहिये. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-03-251h 06Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-03-2550 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...67: यह संसार का अंत क़तई नहीं है, उम्मीद रखिये, ख़याल रखिये: डॉ. प्रवीण झाकोरोना वायरस का संक्रमण पूरे संसार में फैलने और उसके द्वारा हज़ारों लोगों की मृत्यु के साये में अचानक हम सबकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गयी है. हम सबको अपने घरों में ख़ुद को सीमित करके  इसकी रोकथाम करने की ज़रूरत है. इस महामारी के कारणों, इसके फैलने और इससे बचाव पर हमने नार्वे में रहने वाले भारतीय मूल के रेडियोलोजिस्ट और हिंदी लेखक डॉ. प्रवीण झा से बात की.  डॉ. प्रवीण सम्प्रति नॉर्वे के कॉन्ग्सबर्ग (Kongsberg) में विशेषज्ञ चिकित्सक (रेडियोलॉजिस्ट, हेल्सेहुसे कॉन्ग्सबर्ग, Helsehuset Kongsberg) हैं. इसके पूर्व वह पुणे, अमरीका, दिल्ली, और बेंगलुरू में भिन्न-भिन्न अस्पतालों में कार्य कर चुके हैं. वह स्वास्थ्य और अन्य विषयों पर स्तंभ लिखते रहे हैं. उनकी पुस्तकें ‘कुली लाइन्स’ (वाणी प्रकाशन) और ‘वाह उस्ताद’ (राजपाल प्रकाशन) चर्चा में रही हैं. एक डॉक्टर के रूप में वे इसकी रोकथाम से सीधे जुड़े हुए हैं. अपना ख़याल रखिये. हम सब मिलकर इस आपदा को परास्त करेंगे. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-03-2146 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...66: बातचीत आवाज़ के जादूगरों से: ओशो पर किताब 'मैं क्यूँ आया था' की आवाज़ मनोहर महाजनरेडियो के स्वर्णिम युग से जुड़ा ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है बल्कि इनसे बात करते वक़्त असंख्य ऐसे रह्स्योदघाटन हुए कि आज की हमारी पीढ़ी के मुँह से बरबस ही "आह" या "वाह" निकलेगा. मनोहर महाजन ने रेडियो सिलोन और विविध भारती के लिए दशकों तक ऐसे कार्यक्रमों को बनाया और संचालित किया जिन्हें रेडियो सुनने वाले आज भी याद किया करते हैं. शशिकांत सदैव की ओशो रजनीश के जीवन पर लिखी किताब "मैं क्यों आया था" की ऑडियो बुक को अपनी आवाज़ देने वाले मनोहर महाजन बताते हैं कि रजनीश के ओशो बनने से पहले वो एक अध्यापक थे और ये एक बेहद ही सुखद संयोग भी रहा कि मनोहर जी उनके स्टूडेंट. कई हस्तियों के साक्षात्कार करने वाले, कई कार्यक्रमों की आवाज़ और कई कहानियों को रेडियो के दौर में आप तक पहुँचाने वाले मनोहर महाजन किताबों की दुनिया से जुड़े अपने अनुभव बताते हुए बेहद नोस्टैल्जिक होने लगते हैं तो आप भी इस नास्टैल्जिया का हिस्सा बन जाइये.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2020-03-1434 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...65: बातचीत आवाज़ के जादूगरों से: 'मित्रों मरजानी' और 'कोठागोई' की आवाज़ सुनीता शर्माहरियाणा से मुंबई के सफ़र में जो एक चीज़ सुनीता शर्मा के साथ हमेशा रही वो थी आवाज़ की दुनिया. ऑल इंडिया रेडियो की एनाउंसर के तौर पर वॉइसओवर की दुनिया में कदम रखने वाली सुनीता आज वॉइसओवर और डबिंग की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं. दंगल फ़िल्म में आमिर ख़ान और तनु वेड्स मनु में कंगना रनौत द्वारा निभाए गए दत्तो किरदार के लिए दोनों अदाकारों को एक्सेंट ट्रेनिंग देने के बाद चर्चा में आई सुनीता शर्मा किताबों के बारे में बात करते वक़्त अपने बचपन के गलियारों में पहुँच जाती हैं. प्रेमचंद की निर्मला, कृष्णा सोबती की मित्रो की आवाज़ बनी सुनीता, शिवानी के उपन्यास "चौदह फेरे" और प्रभात रंजन के लघु प्रेम की बड़ी कहानियों की किताब "कोठागोई" को भी ज़िंदा करती हैं. नई पीढ़ी की भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में ब्रह्मकुमारी शुभा के लिखे कुछ बेहद ज़रूरी विषयों को सुनीता अपनी आवाज़ से शांति और मैडिटेशन की तरफ़ भी लेकर जाती हैं. व्यक्तित्व से बेहद सौम्य सुनीता शर्मा जब माइक के पीछे पहुँचती हैं तो आवाज़ के पुल से लेखक और श्रोताओं को बेहद मज़बूत डोर से बाँध देती हैं.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2020-03-0736 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...64: बातचीत आवाज़ के जादूगरों से: शशि थरूर की किताबों की हिंदी आवाज़ अनिल दत्त25 साल से भी ज़्यादा वक़्त से वॉइसओवर की दुनिया से जुड़े अनिल दत्त डिस्कवरी और नेशनल जियोग्राफिक जैसे जाने माने चैनल्स की भारत में शुरुआत से उनके साथ मौजूद रहे. हम में से कइयों ने इनकी आवाज़ को सुना और पसंद किया होगा लेकिन अक्सर पर्दे के पीछे रहने वाली आवाज़ों के नाम से बेख़बर हम चाहकर भी वो तारीफ़ उन तक नहीं पहुँचा पाते हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी से थिएटर की पढ़ाई करने वाले अनिल दत्त फिल्मों और नाटकों के बेहद शौक़ीन हैं और शायद यही वजह है कि वो अपनी विचारधारा और रुझान के बारे में बात करते वक़्त बिलकुल भी नहीं हिचकिचाते. स्टोरीटेल एप पर मौजूद शशि थरूर की बेहद चर्चित रही किताबों, "अंधकार काल - भारत में ब्रिटिश साम्राज्य" और "मैं हिन्दू क्यों हूँ" के हिंदी अनुवाद को अपनी आवाज़ देने वाले अनिल दत्त के साथ बातों का सिलसिला कुछ यूँ निकला की वक़्त का कोई अंदाज़ा ही नहीं रहा.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2020-02-2955 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2020-02-2123 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...62: बातचीत आवाज़ के जादूगरों से: 'अक्टूबर जंक्शन' और 'बाबली घोष ज़िंदा है' की आवाज़ पूजा पंजाबीएडवरटाइजिंग, फिल्मों की डबिंग और वॉइसओवर की दुनिया में एक जाना माना नाम है पूजा पंजाबी. बच्चों के बीच चर्चित कई किरदारों को पूजा अपनी आवाज़ दे चुकी हैं और इन्हें बेहद पसंद भी किया जाता है. स्टोरीटेल पर दिव्य प्रकाश दुबे की बेस्टसेलर किताब "अक्टूबर जंक्शन" पूजा की ही आवाज़ में मौजूद है और श्रोताओं ने इन्हें बेहद सराहा भी है. उर्दू शायरों और शायरी को पसंद करने वाली पूजा अक्सर उनकी ग़ज़लों नज़्मों को अपनी आवाज़ में सिर्फ़ देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी सुनाती नज़र आती हैं. स्टोरीटेल ओरिजिनल "बाबुली घोष ज़िंदा है" के लिए हाल ही में हुए इंडिया वॉइस फ़ेस्ट में बेहतरीन नरेशन के लिए अवार्ड पाने वाली पूजा बता रही हैं अपने कुछ बेहद दिलचस्प अनुभव एक दिलचस्प अंदाज़ में.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-02-1533 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...61: बातचीत आवाज़ के जादूगरों से: 'राग दरबारी' और 'कसप' की आवाज़ त्रिलोक पटेलकई अंग्रेज़ी फिल्मों के किरदारों की हिंदी आवाज़ के तौर पर आप इन्हें सुनते रहे हैं लेकिन एक वक़्त पर क्राइम रिपोर्टर रहे त्रिलोक जब किताबों पर बातें करने लगते हैं तब ऐसा लगता है जैसे वो किसी बड़ी तफ़्तीश में जुटे हैं और किताबें वो कड़ियाँ हैं जो उन्हें उस रहस्य को सुलझाने में मदद कर रही हैं. मंटो के "दस्तावेज़", श्रीलाल शुक्ल के कालजयी उपन्यास "राग दरबारी", मनोहर श्याम जोशी के "कसप" से लेकर बाबूराव बगुल की मराठी किताब का हिंदी अनुवाद "जब मैंने जात छुपाई" और बालेंदु द्विवेदी की "मदारीपुर जंक्शन" से अपनी आवाज़ में आपको बाँधने वाले त्रिलोक जब बात करते हैं अपनी पसंद की किताबों पर तो आप चाहेंगे कि एक कॉपी पेन लेकर बैठ जाएँ और सारी किताबों के नाम लिख लें. वैसे "राग दरबारी" के लिए हाल ही में हुए इंडिया वॉइस फ़ेस्ट में इन्हें बेस्ट वॉइसओवर आर्टिस्ट का अवार्ड भी मिल चुका है.आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-02-0830 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...60: हिंदी में "फ़िल्म कम्पेनियन" जैसा प्लेटफ़ॉर्म चाहिए फ़िल्मों पर बात करने के लिएप्रख्यात सिनेमा विशेषज्ञ और समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज ने अपने बरसों से काम से हिंदी में फ़िल्म समीक्षा और फ़िल्म पर बातचीत का एक व्याकरण और माहौल विकसित किया है. वे अपने बेबाक़ अन्दाज़ और ठोस कहन के लिए जाने जाते हैं. दैनिक जागरण में एक लम्बी पारी खेलने के बाद आजकल वे डिजिटल माध्यमों में स्वतंत्र प्रयोग कर रहे हैं. इस बातचीत में वे पिछले बीस साल में सिनेमा पर बात करने, उसे रिव्यू करने के तरीक़ों पर खुल कर अपनी राय साझा कर रहे हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-01-3045 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...59: जासूस जो जासूस लगता नहीं लेकिन मिस्ट्री जिसके सामने टिकती नहीं उर्फ़ आपका प्यारा डिटेक्टिव गिरिस्टोरीटेल की हिट ओरिजिनल सीरीज़ 'डिटेक्टिव गिरि' के लेखक हरपाल महल डिटेक्टिव गिरिराज धारकर का एक और नया कारनामा ले कर आए हैं शॉर्ट स्टोरी 'छल' में. क्या कह रहे हैं हरपाल इस पोडकास्ट में इस मिस्ट्री को हम नहीं खोलेंगे, आपको सुनकर खुद ही पता करना पड़ेगा. 'छल' रीलीज हो रही है 22 जनवरी 2020 को और उसे आप इस लिंक पर सुन पाएँगे.https://www.storytel.com/in/en/books/1130989-DetectiveGiri---Chhalआप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.  
2020-01-2011 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...58: कैसी आवाज़ें ढूँढ रहे हैं स्टोरीटेल के ऑडियो प्रोडक्शन मैनेजर राहुल पाटिल?इस बार के पोडकास्ट में भी कोई मेहमान नहीं है क्यूँकि इस में हम बात कर रहे हैं स्टोरीटेल के ऑडियो प्रोडक्शन मैनेजर राहुल पाटिल से. राहुल ने थिएटर से शुरुआत की और क्या खूब की, उसके बाद वे ऑडियो की दुनिया में आये और क्या खूब आये. बड़े बड़े कलाकारों और चैनलों के साथ काम किया और फिर स्टोरीटेल इंडिया के सबसे पहले जुड़ने वाले साथियों में से एक बने. धुन के पक्के, उसूल के पक्के और बेस्ट को बेहतर करने की जुगत में लगे रहने वाले राहुल भीतर-बाहर  से एक आर्टिस्ट हैं, जो करते हैं उसकी बारीकियाँ जानने वाले और उन्हें खुले दिल से सबके साथ साझा करने वाले प्रोफ़ेशनल हैं. इमोशनल तो हैं ही, उसके बिना कोई आर्टिस्ट होता है क्या! पर्दे के पीछे रहने वाले राहुल से हमनें उनकी अब तक की ज़िंदगी और आर्ट की बात की है और पूछा है कि वो इतना सारा काम क्वालिटी के साथ कैसे करते हैं, कैसे हर किताब के लिए सही आवाज़ ढूँढ निकालते हैं. अगर आप वॉयस आर्टिस्ट हैं तो आपके लिए यह बातचीत एक ट्रीट भी है मौक़ा भी. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2020-01-1638 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...57: इम्तियाज़ अली ने यह फ़िल्म देखकर अपनी फ़ैमिली के साथ बजाई तालीअविनाश दास को आज बहुत-से लोग उनकी फ़िल्म 'अनारकली ऑफ़ आरा' से जानते हैं. लेकिन मुंबई जाने से पहले और अपनी फ़िल्म बनाने से पहले वे लेखक, पत्रकार और ब्लॉगर रहे हैं. इस बातचीत में अविनाश बता रहे हैं दरभंगा से मुंबई तक की यात्रा के बारे में, जनकवि बाबा नागार्जुन के साथ अपने लम्बे आत्मीय सम्बन्ध के बारे में, अपने पहली और दूसरी वेब सीरीज के बारे में जो 2020 में आ रही हैं [और जिनमें से एक इम्तियाज़ अली ने लिखी है], अपने कविता और उपन्यास लिखने के बारे में और 'अनारकली ऑफ़ आरा' के बारे में. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.  
2020-01-0544 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...56: अगर आप अंग्रेज़ी, बांग्ला और हिंदी में ऑडियो सीरीज़ लिखना चाहते हैं तो स्टोरीटेल पब्लिशर सुरोमिता रॉय को सुनियेयह पोडकास्ट इस मायने में ख़ास है कि इसमें कोई 'मेहमान' नहीं है. स्टोरीटेल इंडिया परिवार की सदस्य सुरोमिता रॉय जो अंग्रेज़ी, बांग्ला, हिंदी तीनों में ओरिजिनल सीरीज़ लिखवाने का काम करती हैं, [अंग्रेज़ी और बांग्ला में वो प्रकाशित पुस्तकें ऑडियो के लिए सेलेक्ट करने का काम भी करती हैं] इस बातचीत में हमसे शेयर कर रही हैं कोलकाता से मुंबई तक का अपना सफ़र, फ़िल्म इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव और सबसे ज़रूरी वह सब जो इन तीन भाषाओं में हमारे लिए ऑडियो ओरिजिनल लिखने की तमन्ना रखने वालों के लिए ख़ास काम का है. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2019-12-2728 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...55: हिंदी में आज की जनरेशन की कहानियाँ हमनें ही लिखना शुरू की: सत्य व्याससत्य व्यास नई वाली हिंदी के पोस्टर बॉय कहे जाते हैं और ऐसा हो भी क्यों न! नई पीढ़ी को हिंदी किताबें पढ़ने के लिए तैयार करने में सत्य जैसे लेखकों को बड़ा हाथ है. उनके लिखे लगभग सभी उपन्यास पिछले कई सालों से बेस्टसेलर  सूचियों में लगातार अपनी जगह बनाये हुए हैं. उन्हीं का लिखा उपन्यास "चौरासी" हार्ड कॉपी के साथ साथ अब ऑडियो बुक के रूप में स्टोरीटेल एप पर मौजूद है. 1984 के दंगों की पृष्ठभूमि में लिखे उनके उपन्यास में जहाँ दंगों का वीभत्स रूप है, वहीं इंसानियत के सबसे मुश्किल दौर से गुज़रती एक प्रेम कहानी भी. इस पॉडकास्ट में सुनिए "चौरासी" के लिखे जाने और ऑडियो बुक बनने के सफ़र के बारे में. फिल्मों, क्रिकेट और किताबों को पढ़ने के शौक़ीन सत्य ने इस बार के "बोलती किताबें" पॉडकास्ट में हमारी होस्ट इला जोशी के साथ अपने लेखन के सफ़र, अपनी पसंद नापसंद और आने वाली योजनाओं को लेकर विस्तार में बात की है. इला जोशी की आवाज़ में सत्य का उपन्यास "84" सुनने के लिये लिंक: https://www.storytel.com/in/en/books/633003-84-Chaurasiसत्य का लिखी स्टोरीटेल ओरिजिनल 'शिशिर की गर्लफ़्रेंड' सुनने के लिए लिंक: https://www.storytel.com/in/en/books/831673-Shishir-Ki-Girlfriendआप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2019-12-1637 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...54: जब अनुराग कश्यप ने मुझसे कहा तुम मुंबई आ जाओ क्यूँकि तुमने फ़िल्म रीलीज कर ली और मैं नहीं कर पाता'सरकार 3' के संवाद लेखक और 'जेड प्लस' के लेखक रामकुमार सिंह पश्चिमी राजस्थान में बिरानियाँ नाम के एक गाँव से आते हैं. उनके लेखक बनने, जर्नलिज़्म तथा साहित्य के मार्फ़त उनके मुंबई पहुँचने और अपने ड्रीम फ़िल्ममेकर राम गोपाल वर्मा के साथ काम करने का उनका सफ़र उत्साह और ऊर्जा से भरने वाला है. यह बातचीत रामकुमार की किस्सागोई और ज़िंदादिली से आबाद है. स्टोरीटेल के लिए रामकुमार ने हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार चरण सिंह पथिक की कहानी 'दो बहनें' पढ़ी है जिसे आप इस लिंक पर जा कर सुन सकते हैं. 'दो बहनें' पर ही विशाल भारद्वाज ने अपनी फ़िल्म 'पटाखा' बनाई थी. https://www.storytel.com/in/en/books/631182-Do-Behneinऔर चरण सिंह पथिक के साथ 'पटाखा' के बनने की कहानी वाल पोडकास्ट सुनने का लिंक यह रहा: https://audioboom.com/posts/7055699-आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ.
2019-12-1041 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...53: मुझे हृषिकेश मुखर्जी जैसी फ़िल्में लिखनी हैं : अनु सिंह चौधरीपत्रकार, साहित्यिक लेखक, रेडियो लेखक, अनुवादक, डाक्यूमेंट्री फ़िल्म मेकर और अब स्क्रीन राइटिंग में सक्रिय अनु सिंह चौधरी की प्रकाशित किताबों में 'नीला स्कार्फ़' और 'भली लड़कियाँ बुरी लड़कियाँ' शामिल हैं जिसे आप स्टोरीटेल पर सुन सकते हैं. आई.आई.एम. सी. से पढ़ाई करने के बाद टीवी मेल मिली नौकरी करने की जगह पहली बार मुंबई 'धक्क खाने' आई अनु अब फिर से मुंबई हैं. मुंबई से मुंबई के बीच उन्होंने एनडी टीवी में काम किया, माँ के रूप में अपने दायित्य को निभाया, ब्लॉग लिखा, किताबें लिखीं, कुछ डाक्यूमेंट्री एक वेब सीरीज़ बनायी. इस बातचीत में वे बात रही हैं अपनी इस पूरी यात्रा के बारे में. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-12-0237 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...50: नवंबर में क्या नया आ रहा है स्टोरीटेल पर, और कविताएँ कुछ महान कवियों की'बोलती किताबें' के इस एपिसोड में हम बात कर रहे हैं नवम्बर में नया क्या आ रहा है स्टोरीटेल पर. इसमें वो नयी किताबें शामिल हैं जो हमने प्रिंट से ऑडियो में बदली हैं और वो ओरिजिनल भी सीधे आपन सुनने वालों के लिए लिखें जाते हैं. ये कौनसी किताबें और कौनसे ओरिजिनल हैं यह जानने के लिए लेकिन आपको यह पोडकास्ट सुनना होगा.  यह पोडकास्ट आप इसलिए भी सुन सकते हैं कि इसमें गिरिराज और मयंक टंडन आपको सुना रहे हैं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, केदारनाथ सिंह, श्रीकांत वर्मा और नागार्जुन की कुछ बेहद फ़ेमस कविताएँ. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-11-0435 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-10-3120 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...49: मैं बहुत बोलती हूँ क्यूँकि जो नहीं बोल पाईं उन स्त्रियों के हिस्से का भी बोलती हूँ: गीता श्रीपत्रकार और कथाकार गीता श्री ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थाओं में लम्बे समय तक काम किया. 'आऊटलुक हिंदी' में बतौर फ़ीचर सम्पादक किए उनके काम को यादगार माना जाता है लेकिन उनके भीतर के लेखक और पत्रकार के बीच एक तरह का क्रिएटिव कानफ़्लिकट और आपसदारी का रिश्ता हमेशा रहा. उनकी शुरुआती किताबें इस रिश्ते से निकली और उन्होंने हिंदी स्त्रीवादी लेखन को जेरेबहस करने में एक भूमिका निभाई. उनकी प्रकाशित कृतियों में 'स्त्री को पुकारता है स्वप्न', 'डाउनलोड होते हैं सपने', 'हसीनाबाद' और 'भूत खेला' शामिल हैं. 'हसीनाबाद को आप स्टोरीटेल पर सुन भी सकते हैं. इस बातचीत में गीता श्री अपने पारिवारिक सामाजिक माहौल और धीरे धीरे एक पत्रकार और लेखक बनने की यात्रा पर बात कर रही हैं - एक यात्रा को उनके लिए ख़ुद को स्त्री के तौर पर परिभाषित करने की यात्रा भी रही है और अपने समाज और देश में स्त्री होने को समझने की भी. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-10-3140 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...48: अंग्रेज़ी न बोलने के लिए बेंत खाते हुए बच्चों के बीच मैं चार भाषाओं में बड़ा हुआ: अखिल कात्याल‘बोलती किताबों’ के इस पॉडकास्ट में हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता आज मशहूर कवि और क्वीयर कार्यकर्ता अखिल कात्याल से बात कर रही हैं. लखनऊ में जन्मे अखिल के दो संग्रह How Many Countries Does the Indus Crossऔर Night Charge Extraप्रकाशित हो चुके हैं. आपने रवीश कुमार की किताब ‘इश्क में शहर होना’ का A City Happens in Loveनाम से अनुवाद किया है. अखिल की कविताओं ने तेजी से अपने पाठकों के बीच अपनी छाप छोड़ी है. अखिल दिल्ली यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को क्रिएटिव राइटिंग भी पढ़ाते हैं. यहाँ अखिल बात कर रहे हैं उन समयों की जिनमें कवि और कविता को कोमलता और सम्वेदनशील होने के साथ साथ सख़्त-जान और सख़्त-जिगर भी होना होता है. अपने समय की अंधेरी सचाइयों को कहने के लिए और ताक़त के सम्मुख खड़ा होने के लिए. वे बात कर रहे हैं उस माहौल के बारे में जिसमें अंग्रेज़ी न बोलने के लिए प्रताड़ित होते बच्चों के बीच वे बड़े हुए और कैसे हिंदी, अंग्रेज़ी, पंजाबी, उर्दू उनके होने का हिस्सा बनी. वे बात कर रहे हैं रवीश कुमार की लघु प्रेम कथाओं  [लप्रेक] को अंग्रेज़ी में अनुवाद करने में उनके सामने आयी चुनौतियों के बारे में.  और वे बात कर रहे हैं दक्षिण एशिया की क्वीयर राइटिंग के बारे में.  आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-10-2033 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...47: हास्य, व्यंग्य और राजनीति पर ‘जनता स्टोर’ वाले की चुटकी: नवीन चौधरीहास्य, व्यंग्य और राजनीति आज तनाव दूर करने का जरिया है. सोशल मीडिया के इस युग में मजेदार मीम औरट्रोलिंग में जहाँ हर कोई किसी ट्रेंड को फॉलो करता नज़र आता है, वहीँ सोशल मीडिया पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो संतुलित शब्दों में अपनी बात रखते हुए भी उसकी रोचकता बनाये रखते हैं. दरअसल जितनी ‘असहिष्णुता’ आपको सोशल मीडिया पर नज़र आती है, उतनी शायद वास्तविक दुनिया में नहीं है. ऐसे में ये और जरूरी हो जाता है कि संतुलित नजरिया रखने वाले व्यक्तित्व अपने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से माहौल को हल्का बनाये रखें.               हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता,आज के इस पोडकास्ट में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के मार्केटिंग हेड नवीन चौधरीसे बात कर रही हैं. मार्केटिंग में अपनी धार दिखाने के साथ ही नवीन फोटोग्राफी, व्यंग्य लेखन और ट्रेवल राइटिंग में भी अपनी विशेष पहचान रखते हैं. आप अपने ब्लॉग ‘कटाक्ष’ और ‘हिंदी वाला ब्लॉगर’ पर भी नियमित रूप से लिखते रहते हैं. हाल ही में आई आपकी किताब ‘जनता स्टोर’ बेहद चर्चा में रही, और दैनिक जागरण बेस्टसेलर लिस्ट में भी इसने अपनी जगह बनाई. नवीन अपने काम, अपनी किताब ही नहीं अपनी सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से भी खासे चर्चा में रहते हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-10-1335 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...46: कुमांउनी महक, किस्सों और अनुवाद से प्यार पर इरा पांडे से एक गुफ्तगूकिस्से-कहानियां साहित्य का अभिन्न अंग रही हैं और साहित्य से किसी भी इन्सान का पहला लगाव उन्हीं किस्सों के माध्यम से होता है, जो उसने अपनी दादी/नानी से सुनी होती हैं. ये किस्से इतिहास की वाचिक परम्परा का ही हिस्सा होते हैं. वो इतिहास जो जाने-अनजाने हमारे मन में घर कर, यादों का एक ऐसा नगर बसा देता है, जो ताउम्र हमें घेरे रहता है. किस्सों की ये गली जब खुलती है तो कहने वाला और सुनने वाला दोनों ही एक अनजान जगह पर घूम आते हैं. ऐसे ही कुछ दिलचस्प किस्से हमें सुना रही हैं हमारी आज की मेहमान. उन्होंने ये किस्से अपनी मां शिवानी से सुने थे. वही शिवानी, जो हमें कृष्णकली, कालिंदी, अतिथि, पूतों वाली, श्मशान चंपाइत्यादि के रूप में याद हैं.           हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता,आज के इस पोडकास्ट में इरा पांडेसेइन क़िस्सों और उनकीकुमांउनी महक पर बात कर रही हैं. इरा ने सेमिनार, Biblio, Dorling Kindersley और रोली बुक्स के लिए संपादन किया है. आप IIC पब्लिकेशन की चीफ एडिटर भी रह चुकी हैं. माँ शिवानी पर लिखी आपकी किताब ‘दिद्दी’ और मनोहर श्याम जोशी के उपन्यास‘ट’टा प्रोफेसर’ का आपका अनुवाद बहुत प्रसिद्ध हुए हैं. इनके अलावा आपने और बहुत सी किताबों का अनुवाद किया है औरफिल्मों और टेलीविजन के लिए भी काम किया है. जिनमें ‘मानसून वेडिंग’ और टीवी सीरिज ‘आज की नारी’ (1998) का जिक्र किया जा सकता है. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-10-0137 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-09-301h 34Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...44: सुनिये स्टोरीटेल ओरिजिनल 'टपक'कभी कभी कुछ अजीब और भयानक घटने के लिए आपको कहीं जाना नहीं पड़ता. अजीब और भयानक ख़ुद चल कर आपके दरवाज़े तक आ जाता है. लेकिन  नैना और देव को अपने घर के सुरक्षित, आत्मीय घेरे में यह कहाँ पता था कि ऐसा उनके साथ भी बस अभी होने वाला है. रत्ना सक्सेना की लिखी इस हॉरर मिस्ट्री को आवाज़ दी है राहुल पाटिल, प्रशांत सुमन, प्रशांत मित्रा और ख़ुद रत्ना सक्सेना ने. 'टपक' जैसी और कहानियाँ सुनने के लिए सब्सक्राइब करें स्टोरीटेल. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in
2019-09-2008 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-09-1125 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...43: अनुवाद और मातृत्व में बैलेंस की तलाश: उर्मिला गुप्ताकिसी भी अन्य विधा की तरह ही अनुवाद भी कागजों, किसी एक जगह या व्यक्ति तक सीमित रहने वाली प्रक्रिया नहीं है. यह एक लाइफ लॉन्ग जर्नी है, जिसके हर कदम पर आप कुछ न कुछ सीखते हुए आगे बढ़ते हैं. अनुवाद के विषय में हमारी आज की मेहमान का मानना है कि जब एक लेखक के लिए उसकी कृति बच्चे के समान होती है, तो वहीं अनुवादक के लिए भी वो उसका सेरोगेट चाइल्ड है. किताब का मूल भले ही अनुवादक का नहीं होता, लेकिन उस मूल को अपने परिवेश में लाने तक का सफर अनुवादक भी एक अभिभावक की तरह ही पूरा करता है, फिर वो चाहे एक सेरोगेट अभिभावक ही क्यों न हो.    हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता,आज के इस पोडकास्ट में उर्मिला गुप्ता से अनुवाद और लाइफ के पेचीदा बैलेंस पर बात कर रही हैं. उर्मिला गुप्ता,पेशे से अनुवादक, संपादक,ब्लॉगर, स्क्रिप्ट राइटर हैं तोदिल से पूरी तरह फ़िल्मी . पिछले बारह सालों से किताबों की दुनिया में काम करते हुए 20से ज्यादा किताबों का अनुवाद किया, जिनमें कई बेस्टसेलर किताबें शामिल हैं. आपने यात्रा बुक्स, राजकमल प्रकाशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादन और अनुवाद कार्य किया. इसके अलावा टीमवर्क, स्कोलास्टिक, हार्पर कॉलिन्स,जगरनॉट, वेस्टलैंड और पेंगुइन के साथ स्वतन्त्र रूप से काम किया है। भारतीय अनुवाद परिषद् से आपको 'द्विवागीश पुरस्कार'प्राप्त हुआ है. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-09-0540 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...42: संवेदनशीलता और ख़ूबसूरती पर सत्यानंद निरुपम से एक ख़ास बातचीतशहरी आपधापी में जो कुछ जरूरी चीजें हमसे छूट रही हैं, उनमें साहित्य और प्रकृति भी है. प्रकृति जहां आपके शारीरिक विकास के लिए आवश्यक है, वहीं साहित्य का आपके मानसिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है. क्या ये सही नहीं है कि शहरी युवाओं में तेजी से बढ़ते हुए तनाव का भी यही कारण है. वो न तो खुलकर सांस ले पा रहे हैं और न ही अपनी कल्पनाओं को उड़ान दे रहे हैं.     हमारे आज के पोडकास्ट में, हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता राजकमल प्रकाशन समूह के संपादकीय निदेशक सत्यानंद निरुपम से बात कर रही हैं. सत्यानंद किताबों के संपादन के साथ ही हिंदी साहित्य को भी एक आकार प्रदान कर रहे हैं. साहित्य में उनके द्वारा किये गए नए प्रयोगों की अक्सर ही चर्चा होती है. इस सम्पादकीय व्यक्तित्व के साथ ही, एक प्रकृति प्रेमी के रूप में भी उनकी झलक अक्सर देखने को मिलती है| आज के इस पोडकास्ट में इन्हीं सब भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा की गई है.  आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-08-2939 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-08-2639 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...41: उर्दू का अदब, नज़ाकत, परिवेश और ग़ालिब को अंग्रेज़ी में अनुवाद करने की बारीकियाँआज के दौर में जब व्हाट्सअप पर हर दूसरा शेर ग़ालिब और गुलज़ार के नाम से ठेल दिया जाता है, तब हम समझ सकते हैं कि आधुनिक युवा भी उर्दू की शायरी और गजलों के मोह से अछूता नहीं है.शेर, ग़ज़ल या कविता कम शब्दों में मार्मिक बात कहने की कूवत रखते हैं.इसीलिए प्राचीन समय से इनका अनुवाद कार्य अनेक भाषाओँ में बड़े पैमाने पर होता रहा है.तभी तो आज फारसी न जानने वाला पाठक भी रूमी का उद्धरण बड़े गर्व के साथ देता है.    हमारे आज के पोडकास्ट में, हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता माज़ बिन बिलाल से बात कर रही हैं.माज़ प्रोफेशन से असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और दिल से एक लेखक, कवि, शायर,समीक्षक और अनुवादक.आपका महत्वपूर्ण कार्य ग़ालिब का अनुवाद है और उन्हीं के माध्यम से माज़ संस्कृति, साहित्य और समाज पर रौशनी डाल रहे हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-08-2241 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...40: किस्से हैं, संस्कृति है, इतिहास है और हैं व्यंजन : बोलती किताबें में इस बार पुष्पेश पन्तकहा जाता है कि एक किताब सौ मित्रों के समान होती है, तो एक अच्छा मित्र पुस्तकालय के बराबर है.लेकिन जब बात एक प्रमुख अकादमिक, फ़ूड क्रिटिक, लेखक व प्रख्यात अनुवादक पुष्पेश पन्त की हो रही हो तो उन्हें तो एक चलायमान थिसारस, आर्काइव और आज के युवाओं की भाषा में कहें तो, ‘गूगल’ ही कहा जा सकता है| उन्हें सुनना एक युग को सुनने के समान है, इसमें दिलचस्प बात ये है कि एक दौर, एक समय की बात बताते हुए भी उनकी बातों में प्राचीनता या जड़ता नहीं आ पाती.  हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता इस पोडकास्ट में पुष्पेश जी से बात करते हुए, उनके विविध आयाम को आप तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं|   आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें'कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-08-1743 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-08-0626 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...39: मैं चाहता हूँ तीस साल में 'आर्टिकल 15' जैसी फ़िल्म बनाने की ज़रूरत न रहे : गौरव सोलंकीअनुभव सिन्हा की फ़िल्म 'आर्टिकल 15' के सह-लेखक गौरव सोलंकी से फ़िल्म गीतकार पुनीत शर्मा की यह बातचीत फ़िल्म को लिखे जाने की प्रक्रिया और उसकी बारीकियों में जाती है. हमें पता चलता है कि कैसे हिंदी की महानतम कृतियों में से एक ओम प्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा 'जूठन' फ़िल्मकार अनुभव सिन्हा, एक्टर आयुषमान खुराना और गौरव के बीच एक कड़ी बन गयी थी जिसके सहारे वे अपनी कहानी में अभिव्यक्त हो रहे सामाजिक यथार्थ को और गहराई से समझ पा रहे थे. फ़िल्म के अलावा यह बातचीत गौरव की साहित्यिक कहानियों के बारे में और दिल्ली में एक हिंदी लेखक के रूप में उनके दिनों के बारे में भी है! और अंत में पर उनकी आवाज़ में एक कविता भी . उम्मीद है आपको बोलती किताबें का यह एपिसोड पसद आएगा. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-08-0356 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...38: इस बार मिलिये बुकसेलर और पाठक से: क़िस्से मंडी हाउस, खान मार्केट, मढ़ आईलैंड सेआजकल लोग, बाकी चीज़ों की तरह, किताबें भी ऑनलाइन ख़रीदते हैं लेकिन इसके बावजूद अभी भी बुकसेलर्स और किताबों की दुकानों की एक जीवंत दुनिया है जिसमें किताब हाथ में लेकर उलट पलट कर, बुक सेलर से बात करते हुए ख़रीदी जाती है. आत्मीयता और गर्माहट से भरा एक रिश्ता है जो किताबों के पाठकों और किताबों के विक्रेताओं के बीच शुरू से रहा है और अब भी क़ायम है. दिल्ली जैसे शहर में इसका एक छोर बाहरी संस है जो यहाँ किताबें  पाने का सबसे पुराना, सबसे मशहूर ठिकाना है तो दूसरा छोर संजनाजी हैं जो एक अरसे से मंडी हाउस के पास पेड़ नीचे किताबें बेचती हैं. पास ही नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा है जिसके रंगकर्मी उनके गहरे दोस्त हो गए हैं. संजना तिवारी और बाहरी संस दोनों दिल्ली के और किताबों की दुनिया के आयकन हैं. हमारी होस्ट मोहिनी गुप्ता इस पोडकास्ट में बात कर रही हैं संजनाजी और बाहरी संस के एक्सपर्ट बुक सेलर मिथिलेश से. इसके अलावा इस एपिसोड में हमारे एक और ख़ास मेहमान हैं राम जो किताबें ख़ूब पढ़ते और सुनते हैं. राम इस बातचीत में बता रहे हैं वो कैसी किताबें पसंद करते हैं और किताबें सुनने का उनका अनुभव कैसा है. राम बिहेवियरल चेंज के फ़ील्ड में काम करते हैं, मूलतः तमिल हैं लेकिन अंग्रेज़ी और हिंदी में भी किताबें सुनते हैं. आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे? email: support@storytel.in  स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. 
2019-07-3050 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-07-2342 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-07-1624 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-07-0324 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-06-1819 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-06-1435 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-05-2430 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...31: जानिये जयंती रंगनाथन से कि कैसे लिखी जाय दो बाकमाल चूहों की धमाल स्टोरीराइटर, एडिटर, जर्नलिस्ट जयंती रंगनाथ ने अपना करियर शुरू किया हिंदी की आइकोनिक मैगज़ीन धर्मयुग से और आज वे दैनिक हिन्दुस्तान में एग्जीक्यूटिव एडिटर हैं. दक्षिण भारतीय मूल की जयंती भिलाई से हैं और हिंदी उनकी पहली भाषा रही है. "बोलती किताबें" के इस एडिशन में वे बात कर रही हैं अपनी ज़िंदगी की पहली ऑडियो सीरीज़ 'बाला और सनी' लिखने के अनुभव के साथ साथ और बहुत सारी चीज़ों के बारे में. स्टोरीटेल की ये ख़ास पेशकश 'बाला और सनी' सुनने के लिए [यहाँ](https://www.storytel.com/in/en/books/792860-Bala-aur-Sunny-S01-E01) क्लिक करें. और स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए [यहाँ](https://www.storytel.com/hindi).
2019-05-1829 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-05-1727 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-05-1026 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-04-3026 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-04-1532 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-04-0511 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-03-2826 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-03-2232 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-02-2812 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2019-02-1224 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-12-3109 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-12-1028 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-12-0320 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-11-2616 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-11-1926 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-11-1226 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-11-0125 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-10-2234 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-10-1511 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-10-0829 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-10-0212 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-09-2427 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-09-1839 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-09-0341 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-08-2818 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-08-1329 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-07-3017 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...
Storytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...9: झलक - कॉल सेंटर (हॉरर स्टोरी)हृषिकेश गुप्ते लिखित और बरखा स्वरुप की आवाज़ में सुनाई गयी "कॉल सेंटर" एक हॉरर स्टोरी है.  यह कहानी ऊर्मी नाम की युवती की है, जो कॉल सेंटर जॉइन करती है.  उसके बाद ऐसी कुछ घटनाऐ घटती है, जो उसकी सोचके दायरें से बिल्कुल बाहर थी. क्या हुआ उसके साथ? आप हमारे साथ ज़रूर साझा करें कि आपको 'बोलती किताबें' कैसा लग रहा है और आप इसमें क्या सुनना पसंद करेंगे?  email: support@storytel.in स्टोरीटेल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ जाएँ. Urmi takes up a job in a BPO, The Communicators. The company claims they have been into the business for more than 500 years. Urmi finds the company strange and eerie. Not being able to make her peace with the profile, she leaves the job. One day she gets a call from the call center, leading her to rejoin the company. Who called her up?
2018-07-1358 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-07-1314 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-07-0129 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-06-2516 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-06-1819 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-06-1316 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-05-2819 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-05-2115 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-05-0710 minStorytel Bolti Kitabein: बोलती किताबें...2018-04-2320 min